अब पाकिस्तान के लिए ‘मलतबी दोस्त’ बन गया है अमेरिका!
इस्लामाबाद। पिछले एक हफ्ते में भारत के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर काफी कुछ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच दिनों तक पांच अहम देशों के दौरे पर गए और भारत की एनएसजी सदस्यता के लिए एक बड़ा समर्थन हासिल कर लिया। स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मैक्सिको, इन तीनों देशों ने भारत की एनएसजी सदस्यता का समर्थन किया है।

जिसने की मदद अब उसी ने मोड़ा मुंह
इन सबके बीच पाकिस्तान में भी एक उठापटक का माहौल बना हुआ है। भारत के साथ अमेरिका की बढ़ती करीबियों के बीच पाक की मीडिया ने उसी अमेरिका को 'मतलबी दोस्त' का खिताब दे डाला है जिसने 71 की जंग में पाक को सपोर्ट किया था। पाक मीडिया ने पीएम मोदी के दौरे के बाद अमेरिका पर काफी तल्ख टिप्पणियां की हैं।
सरताज अजीज के हवाले से लिखा 'मतलबी दोस्त'
पाक के न्यूजपेपर 'जंग' ने लिखा है कि पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज का हवाला देते हुए लिखा है कि अमेरिका एक मतलबी दोस्त है जो मतलब पड़ने पर पाकिस्तान के पास आता है और मतलब निकल जाने पर बात तक नहीं करता है।
पाक के साथ बेवफा है अमेरिका
जंग ने आगे लिखा है कि इस ऐतिहासिक सच को कोई नहीं झुठला सकता कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में मौजूद सोवियत संघ जैसी सुपरपावर को नजरअंदाज कर अमेरिका से दोस्ती का हाथ बढ़ाया।
उस समय तो अमेरिका ने इशारा किया कि वह भारत के रूस समर्थक होने की वजह से उससे नाराज़ है, लेकिन बाद के हालात ने साबित किया कि वो पाकिस्तान के साथ वफादार नहीं है।
पाक के दो टुकड़े होते देखने वाला अमेरिका
जंग ने आगे लिखा है कि जब वर्ष 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े हो रहे थे तो उस समय भी अमेरिका ख़ामोश था। अमेरिका कश्मीर के मसले पर शांत था और आखिरी समय तक पाकिस्तान पर परमाणु परीक्षण न करने का दबाव बनाता रहा। अब वही अमेरिका, भारत को एनएसजी में शामिल करवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। जबकि 9/11 के बाद अपने 60 हजार लोगों की कुर्बानी पाकिस्तान ने दी और सवा खरब डॉलर का नुकसान सहा।












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