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Special Report: क्या आर्मी चीफ जनरल बाजवा खत्म कर पाएंगे पाकिस्तान में भारत विरोधी माहौल?

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इस्लामाबाद: क्या पाकिस्तान की सेना भारत से दोस्ती करने के लिए भारत के पक्ष में देश में माहौल बनाना शुरू कर दिया है? क्या पाकिस्तान की सेना अब चाहती है कि किसी भी तरह भारत से सुलह कर लिया जाए? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान सरकार की भारत से चीनी और कॉटन खरीदने के फैसले पर यू टर्न लेने के बाद पाकिस्तान की सेना इमरान खान सरकार से नाराज नजर आ रही है साथ ही पाकिस्तानी मीडिया के एक हिस्से ने इमरान खान सरकार के इस फैसले की जमकर आलोचना की है। जिसके बाद भारत-पाकिस्तान मामलों के जानकार कह रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना के इशारे पर पाकिस्तानी मीडिया का एक हिस्सा भारत के पत्र में देश में माहौल बनाने की कोशिश में जुट गया है।

भारत विरोधी लहर

भारत विरोधी लहर

द स्टेट्समेन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के मुद्दे पर पाकिस्तान का राजनीतिक वर्ग बुरी तरह से दो हिस्सों में बंटा हुआ है। खासकर पाकिस्तानी मीडिया भी भारत के मुद्दों पर दो अलग अलग विचार रखता है। जिसमें एक हिस्सा चाहता है कि पाकिस्तान के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान को भारत के साथ दोस्ती कर लेनी चाहिए और कश्मीर मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए। इसके लिए पाकिस्तान की मीडिया भारत-चीन संबंध का उदाहरण देता है कि कैसे भारत और चीन के बीच सीमा विवाद होते हुए भी दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, मीडिया का एक पक्ष अब भी भारत से किसी भी तरह का कोई राब्ता रखने का हिमायती नहीं है।

‘डॉन’ ने की आलोचना

‘डॉन’ ने की आलोचना

भारत से चीनी और कॉटन खरीदने को लेकर इमरान खान के यू-टर्न की पाकिस्तान के सबसे बड़े अखबार डॉन ने जमकर आलोचना की। 3 अप्रैल को डॉन ने अपने संपादकीय में इमरान खान सरकार के यू-टर्न को ‘अबाउट टर्न' लिखा। ‘अबाउट टर्न' का मतलब होता है ‘वो जो दुर्भाग्यवश बुरी स्थिति मे घिरा हुआ हो और उसे मालूम नहीं हो कि आखिरी सही रास्ता क्या है। पाकिस्तानी अखबार डान ने कहा कि इसका मतलब सिर्फ ये नहीं है कि सरकार में आपसी सामंजस्य का घोर अभाव है, बल्कि इसका मतलब ये भी है कि सरकार के अंदर फैसले लेने की काबिलियत नहीं है खासकर उन मुद्दों पर जो काफी ज्यादा संवेदनशील है और जिसपर काफी ज्यादा मातापच्ची की जरूरत होती है'।

इमरान सरकार में दरार

इमरान सरकार में दरार

पाकिस्तान सरकार के यू टर्न भरे फैसले को इस्लामाबाद टूडे जैसे अखबारों ने भी काफी आलोचना की। वहीं, पाकिस्तानी मीडिया में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इमरान खान सरकार के अंदर शक्ति प्रदर्शन चल रहा है। और उसी का नतीजा है कि सरकार को भारत के मुद्दे पर अपना फैसला बदलना पड़ा। इसमें सबसे बड़ा चेहरा हैं पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का पाकिस्तान में बड़ा राजनीतिक विरासत है, जो उन्हें अपने पुरखों से हासिल हुआ है और सुफी समुदाय के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक शाह महमूद कुरैशी इमरान खान के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिस्पर्धी के तौर पर सामने आ रहे हैं और शाह महमूद कुरैशी का पाकिस्तानी सेना के एक हिस्से के साथ काफी अच्छे ताल्लुकात भी हैं, जो कुरैशी की सबसे बड़ी ताकत है।

भारत के पक्ष में आर्मी चीफ बाजवा

भारत के पक्ष में आर्मी चीफ बाजवा

पाकिस्तानी अखबार ‘द फ्राइडे टाइम्स' मे वरिष्ठ पाकिस्तानी कॉलमनिगार नजिम सेठी ने लिखा था कि ‘आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा भारत से अच्छे संबंध की अहमियत को समझते हैं और वो मानते हैं कि जब तक भारत के साथ पाकिस्तान के संबंध अच्छे नहीं होंगे तब तक पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर नहीं लाया जा सकता है'। उन्होंने अपने आर्टिकल में दावा किया है कि ‘पाकिस्तान आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा भारत के साथ संबंध सामान्या करने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए वो कश्मीर मुद्दे को फिलहाल के लिए ठंढ़े बस्ते में रखने को भी तैयार हैं'। उन्होंने लिखा है कि ‘पाकिस्तान आर्मी चीफ मानते हैं कि एलओसी पर भारत के साथ लंबे वक्त कर लड़ाई का खर्च उठाना पाकिस्तान के लिए बहुत बुरा सौदा साबित हो रहा है। हर दिन भारत के साथ तनाव के चलते लाखों अमेरिकी डॉलर का नुकसान पाकिस्तान को हो रहा है। आर्मी चीफ का मानना है कि पाकिस्तानी एयरफोर्स को सिर्फ सरहद पर ट्रेनिंग के दौरान उड़ने के लिए जितनी पेट्रोल की जरूरत है, उसका खर्च उठाना भी सरकार को भारी हो रहा है, लिहाजा भारत के साथ सामान्य रिश्ते से पाकिस्तान को फायदा होगा'

पाकिस्तान आर्मी में दरार

पाकिस्तान आर्मी में दरार

अंदरूरी रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच 25 फरवरी को हुए सीजफायर समझौते को लेकर भी पाकिस्तान आर्मी में कलह की स्थिति है। पाकिस्तानी आर्मी के जूनियर रैंक के अफसर, जिसमें कई कर्नल और मेजर शामिल हैं, वो भारत के साथ सीजफायर के खिलाफ थे, लेकिन इसका फैसला पाकिस्तानी आर्मी के बड़े अधिकारियों ने लिया। जिसमें खुद आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजफायर फैसले के बाद पाकिस्तानी सेना के अंदर फूट हो गई है और कई मेजर-कर्नल रैंक के अफसर उच्चाधिकारियों से भारी नाराज हैं। वहीं, पाकिस्तान का विपक्ष भी भारत से व्यापार को लेकर इमरान खान सरकार पर आक्रोशित है। कई विपक्षी नेताओं ने इमरान खान के भारत से व्यापार शुरू करने के फैसले की जमकर आलोचना की थी और कहा था कि इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे को भारत के पास गिरवी रख दिया है

सरकार से नाराज कारोबारी

सरकार से नाराज कारोबारी

इमरान खान पर पाकिस्तान के कारोबारी लगातार भारत से व्यापारिक संबंध बहाल करने का दबाव बनाते आए हैं। और भारत से चीनी और कॉटन खरीदने का फैसला उसी दबाव से निकला एक फैसला था। लेकिन अब पाकिस्तान के कारोबारी इमरान खान के यू-टर्न को पाकिस्तान के लिए आने वाले वक्त मे घातक बता रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि सरकार का भारत से कॉटन नहीं खरीदने का फैसला पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के पैर पर मारा गया कुल्हाड़ी है और पाकिस्तान को इसका भयानक नुकसान होने वाला है। इस वक्त पाकिस्तान भारत का कॉटन डायरेक्ट भारत से नहीं खरीदकर दुबई से खरीदता है, जिसकी लागत काफी ज्यादा बढ़ जाती है और कारोबारियों को काफी नुकसान होता है।

क्या करेंगे कमर बाजवा?

क्या करेंगे कमर बाजवा?

पाकिस्तान में फैसले लेने वाला वर्ग भारत के मुद्दे पर दो हिस्सों में बुरी तरह से बंट गया है और जानकारों का मानना है कि ये स्थिति पाकिस्तान के लिए काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। भारत का पहले से ही पाकिस्तान से तमाम उम्मीदें और यकीन टूटा हुआ है ऐसे में सवाल ये है कि क्या आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा भारत विरोधी तत्वों को खामोश रखने में कामयाब होते हुए पाकिस्तान में भारत के पक्ष में माहौल बना पाएंगे। और क्या आर्मी चीफ पाकिस्तान सरकार पर भारत से सामान्य संबंध बनाने के लिए बाध्य कर पाएंगे, पाकिस्तानी मीडिया तो यही कहते हैं कि आर्मी चीफ बाजवा लगातार भारत के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं और हो सकता है कि कुछ महीनों बाद इसमें उन्हें कामयाबी हासिल हो जाए।

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English summary
Is army chief Qanar Javed Bajwa is trying to counter anti India sentiment in Pakistan and trying to make good relation with India?
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