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एप्पल के अलार्म से टूटेगी अमरीका-चीन ट्रेड वॉर की दीवार?

By Bbc Hindi
  • दुनिया की दिग्गज आईटी कंपनी एप्पल का शेयर गुरुवार को 10 फ़ीसदी टूटा
  • एक कारोबारी सत्र में कंपनी की वैल्युएशन सवा पाँच लाख करोड़ रुपये घटी
  • वैल्युएशन के हिसाब से माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़ॉन और अल्फाबेट से पिछड़ी, दो हफ्ते पहले थी नंबर वन
  • आईफ़ोन की बिक्री घटने का अंदेशा, निवेशकों में चिंता
  • कंपनी के सीईओ ने कर्मचारियों को लिखा खत, ट्रेड वॉर को बताया मौजूदा संकट की वजह
  • अमरीका और चीन के अधिकारियों के बीच ट्रेड वॉर पर दो दिन की बातचीत सोमवार से
डोनल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग
Getty Images
डोनल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 'अमरीका फ़र्स्ट' की अपनी नीति के तहत जो ट्रेड वॉर छेड़ा है, क्या उसका सबसे बड़ा शिकार टिम कुक की कंपनी एप्पल बनी है?

एप्पल के भविष्य को लेकर निवेशकों में चिंता है और ये चिंता तब साफ़ तौर पर सामने आ गई जब न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में गुरुवार को निवेशकों में एप्पल का शेयर बेचने की होड़ सी मची रही. देखते ही देखते कंपनी का शेयर 10 फ़ीसदी लुढ़क गया और कारोबारी सत्र के दौरान संभलना तो दूर शेयर तक़रीबन 10 फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ.

स्टॉक एक्सचेंजों में शेयरों का चढ़ना-गिरना तो को रोज़मर्रा की बात है, लेकिन एप्पल के शेयर के लुढ़कने जो कारण बताया जा रहा है, वह वाक़ई चिंता में डालने वाला है. न सिर्फ़ एप्पल के निवेशकों के लिए बल्कि उन सभी निवेशकों और देशों के लिए जो ट्रंप के ट्रेड वॉर की मार झेल रहे हैं.

दरअसल, कंपनी ने 2019 की पहली तिमाही में 93 अरब डॉलर की आय का अनुमान लगाया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 89 अरब डॉलर और एक बार फिर संशोधित करते हुए 84 अरब डॉलर कर दिया.

यूँ तो भारत में भी इंफ़ोसिस और टाटा कंसल्टेंसी जैसी आईटी कंपनियां भी अपनी गाइडेंस का अनुमान समय-समय पर बदलती रहती हैं, लेकिन एप्पल के मामले में ये अलग इसलिए था कि पिछले डेढ़ दशक में पहली बार एप्पल ने अपनी कमाई का अनुमान घटाया है.

टिम कुक
Reuters
टिम कुक

तो क्या निवेशक सिर्फ़ कंपनी की कमाई घटने से परेशान हो गए हैं?

विश्लेषक इससे इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते. उनके मुताबिक़ निवेशकों में घबराहट की असल वजह थी कंपनी के मुख्य कार्यकारी टिम कुक का वो बयान जिसमें उन्होंने आशंका जताई थी कि अमरीका के चीन के साथ ट्रेड वॉर के चलते आईफ़ोन की बिक्री में गिरावट आई है और इसके जल्द थमने की उम्मीद भी नहीं है.

कंपनी के मुख्य कार्यकारी टिम कुक ने निवेशकों को लिखे पत्र में कहा कि कुछ प्रमुख उभरते बाज़ारों में हमारे सामने चुनौतियां बढ़ी हैं. अमरीका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव से चीन में बनते आर्थिक हालात आने वाले समय में भी हमें प्रभावित करेंगे.

चीन की अर्थव्यवस्था में धीमापन तो एक वजह है ही एक और कारण ये भी बताया जा रहा है कि चीन की कंपनी हुवावेई की मुख्य वित्त अधिकारी मेंग वांझोऊ की कनाडा में गिरफ्तारी के बाद एप्पल को चीन में विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

चीन क्यों है अहम

टिम कुक ने निवेशकों को भेजे अपने ख़त में लिखा है कि वो वैश्विक आर्थिक हालात को तो नहीं बदल सकते, लेकिन कंपनी अपनी सेवाओं, वेयरबल्स और मैक कारोबार से राजस्व बढ़ाने पर ज़ोर देगी.

कुक ने कहा, "चीन की अर्थव्यवस्था में 2018 की दूसरी छमाही में धीमापन आना शुरू हुआ. जुलाई-सितंबर तिमाही में चीनी सरकार ने जीडीपी विकास दर का जो आंकड़ा बताया वो 25 सालों में सबसे कम है. हमारा मानना है कि चीन और अमरीका के बाच व्यापारिक तनाव से वहां हालात आगे भी और मुश्किल होंगे."

ग्रेटर चाइना यानी चीन, हॉन्गकॉन्ग और ताइवान का एप्पल की कमाई में तक़रीबन 20 फ़ीसदी योगदान रहा है और इसमें कमी आने का सीधा असर कंपनी पर पड़ना लाज़मी है.

फ़ाइल फोटो
Getty Images
फ़ाइल फोटो

बाज़ार विश्लेषक और दिल्ली स्थित एक रिसर्च फ़र्म में एनालिस्ट आसिफ़ इक़बाल का भी मानना है कि एप्पल का अपने कारोबार के लिए ट्रंप के ट्रेड वॉर पर उंगली उठाना नया ट्रिगर साबित हो सकता है.

वह कहते हैं, "एप्पल ने अपनी गाइडेंस में कमी की घोषणा की और उसके कुछ ही देर बाद अमरीका का जो मैन्युफैक्चरिंग डाटा आया है वो पिछले दो साल में सबसे कम है. इसे पहला संकेत माना जा सकता है कि ट्रंप का ट्रेड वॉर अमरीका के लिए भी भारी पड़ सकता है. यानी अब ट्रंप का ट्रेड वॉर बैक फ़ायर कर रहा है."

अमरीका में विनिर्माण गतिविधियों को मापने वाले आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स में तेज़ गिरावट आई है. गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर में 62.1 के मुक़ाबले ये 51.1 के स्तर तक पहुँच गया है.

आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक़ पिछले 35 सालों में इस इंडेक्स में इतनी बड़ी गिरावट नहीं आई. इससे पहले, अक्तूबर 2001 में 5.4 अंक गिरा था, जबकि अक्तूबर 2008 में ये गिरावट तक़रीबन 9 अंकों की थी.

अमरीका का ट्रेड वॉर

सांकेतिक तस्वीर
Getty Images
सांकेतिक तस्वीर

दरअसल, अमरीका का तर्क है कि चीन की 'अनुचित' व्यापार नीति के कारण टैरिफ़ बढ़ाए गए हैं. टैरिफ़ लगाने से आयात किए गए उत्पादों के मुक़ाबले अमरीकी उत्पाद सस्ते हो जाएंगे और इससे अमरीकी उत्पादों की बिक्री बढ़ जाएगी. इस तरह अमरीका में स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को मज़बूती देना चाहता है.

अमरीकी अधिकारियों को उम्मीद थी कि अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचने के डर से चीनी सरकार अपनी नीतियों में कुछ बदलाव करेगी.

दोनों देशों के बीच टकराव का ये सिलसिला जुलाई में शुरू हुआ था जब अमरीका ने पहली बार चीनी उत्पादों पर नए टैरिफ़ लगाए थे.

इसके बाद से दोनों ही देश कई बार एक-दूसरे को चेतावनियां दे चुके हैं.

जुलाई 2018 में, अमरीका ने 34 अरब डॉलर के चीनी उत्पादों पर शुल्क बढ़ाया था. इसके बाद पिछले अगस्त में एक क़दम और आगे बढ़ते हुए अमरीका ने 16 अरब डॉलर के चीनी उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाया था. सितंबर में अमरीका ने 200 अरब डॉलर के चीनी उत्पादों पर आयात शुल्क लगा दिया.

क्या खत्म होगा ट्रेड वॉर

फ़ाइल फोटो
Getty Images
फ़ाइल फोटो

पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया था कि चीन पर आयात शुल्क लगाने से उसे लंबी अवधि में फ़ायदा होगा. हालाँकि ट्रंप ने ये भी माना था कि कुछ समय के लिए निवेशकों और ग्राहकों को दिक़्क़तें हो सकती हैं.

ट्रंप ने कहा था, "ट्रेड वॉर्स अच्छे हैं और इन्हें जीतना आसान है". अमरीकी राष्ट्रपति ने तो ये भी कहा था कि अगर चीन ने अपनी नीतियों में बदलाव न किया तो एक मार्च से वह चीनी सामान पर टैरिफ़ बढ़ाकर 25 फ़ीसदी कर देगा. लेकिन अब जो हालात बन रहे हैं उसमें अमरीका प्रशासन को अपना बचाव कर पाना मुश्किल हो रहा है.

हालांकि ट्रेड वॉर को लेकर ट्रंप के रुख़ में बदलाव के संकेत पिछले कुछ समय से मिलने लगे हैं. पहली बार ये संकेत एक नवंबर को मिले. हर बार टैरिफ़, टैरिफ़, टैरिफ़ का राग अलापते ट्रंप अब 'ग्रेड डील' की बात करने लगे हैं.

इसके बाद, अर्जेंटीना में जी-20 देशों के सम्मेलन के दौरान दिसंबर की पहली तारीख़ को ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक तरह का 'संघर्ष विराम' हुआ, जिसमें एक-दूसरे तक किसी भी तरह के आयात शुल्क नहीं लगाने की बात कही गई थी ताकि बातचीत से मामले का का हल निकाला जा सके.

अब पता चला है कि एक अमरीकी प्रतिनिधिमंडल ट्रेड वॉर पर बात करने के लिए अगले हफ्ते चीन जा रहा है. ट्रेड वॉर का ऐलान होने के बाद अमरीका और चीन के बीच ये पहली सीधी बातचीत होगी.

विश्लेषकों के मुताबिक़ दोनों ही देश व्यापार की इस जंग के शुरुआती नतीजे देख रहे हैं. सोमवार को जारी चीन के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां धीमी हो रही हैं और ये दर पिछले दो साल में सबसे कम है.

BBC Hindi
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English summary
Apples alarm will break the US-China Trade War Wall

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