चीन के बैन से Apple बेदम, दो दिन में गंवाए 200 अरब डॉलर, भारत की शरण में आना ही आखिरी रास्ता?
चीन में अमेरिकी कंपनी एपल के प्रोडक्ट iPhone पर बैन लगा दिया गया है। अब से चीन में सरकारी कर्मचारी एपल आईफोन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। वहीं चीनी राष्ट्रवाद के जोर पकड़ने से ऐपल के बॉयकाट की मुहिम भी तेज हो गई है।
चीन द्वारा सरकार समर्थित एजेंसियां और कंपनियों ने भी iPhone के उपयोग पर बैन लगाए जाने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे ऐपल को बड़ा जोरदार झटका लगा है। गुरुवार को ऐपल के शेयर धड़ाम से गिर पड़े।

गुरुवार को Apple के शेयरों में 2.9% की गिरावट आई है। एपल को कुल 5.35 प्वाइंट का नुकसान हुआ है। कंपनी को दो दिनों में लगभग 200 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है और इसका स्टॉक वर्तमान में डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला है।
चीन से न केवल ऐपल को अच्छा-खासा रेवेन्यू मिलता है बल्कि यह उसकी सप्लाई चेन का भी हब भी है। चीन कंपनी के उत्पादों के लिए सबसे बड़ा विदेशी बाजार है, और पिछले साल चीनी बिक्री कंपनी के कुल राजस्व का लगभग पांचवां हिस्सा थी।
ऐसे में iPhone पर लगे प्रतिबंध को Apple के लिए एक अशुभ संकेत माना जा रहा है। निवेशक दुनिया की सबसे मूल्यवान सार्वजनिक कंपनी की दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कारोबार करने की क्षमता को लेकर चिंतित हैं।
Apple देश के आधार पर iPhone की बिक्री का खुलासा नहीं करता है, लेकिन शोध फर्म TechInsights के विश्लेषकों का अनुमान है कि पिछली तिमाही में संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में चीन में अधिक iPhone की बिक्री हुई थी।
आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच तनाव की असल वजह अमेरिका की ओर से चिप इंडस्ट्री से चीन की मोनोपॉली को खत्म करने के प्रयास और चिप में यूज होने वाले कंपोनेंट को चीन तक ना पहुंचने देने के प्रयासों की वजह से बढ़ा है।
अमेरिकी प्रतिबंधों से नाराज होकर चीन ने भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट मेकर बोइंग और चिप कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के साथ कई अहम अमेरिकी कंपनियों के शिपमेंट्स पर रोक लगा दी है। चीन की कंपनी हुवैई पर अमेरिकी प्रतिबंधों से चीन की सरकार और लोग बहुत नाराज है। आपको बता दें कि हुवैई चीन में स्मार्टफोन मार्केट में ऐपल का सबसे बड़ा कंपीटिटर है।












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