अनवर इब्राहिम बने मलेशिया के PM, कट्टपंथियों का सपना टूटा, हिन्दू उत्पीड़न कर सकेंगे खत्म?

अनवर इब्राहिम मलेशिया के 10वें पीएम बन गए हैं। इसके साथ ही देश में कई दिनों से चल रही राजनीतिक उठापटक भी फिलहाल खत्म होती दिख रही है। हालांकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अनवर किसके साथ गठबंधन करने जा रहे हैं।

मलेशिया में चुनाव के बाद कई दिनों तक चले गतिरोध के बाद दिग्गज विपक्षी नेता अनवर इब्राहिम ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। वह देश के 10वें पीएम बने हैं। इसके साथ ही देश में कई दिनों से चल रही राजनीतिक उठापटक भी फिलहाल खत्म होती दिख रही है। हालांकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अनवर किसके साथ गठबंधन करने जा रहे हैं।

अनवर इब्राहिम को साबित करना होगा बहुमत

अनवर इब्राहिम को साबित करना होगा बहुमत

गौरतलब है कि शनिवार को हुए आम चुनाव में एक अभूतपूर्व त्रिशंकु संसद बन गई थी, जिसमें दो मुख्य गठबंधनों में से किसी को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका था। एक गुट अनवर के नेतृत्व में और दूसरा पूर्व-प्रधानमंत्री मुहीद्दीन यासीन का था। बता दें कि मलेशिया के किंग सुल्तान अब्दुल्लाह सुल्तान अहमद शाह के पास प्रधानमंत्री को नियुक्त करने की पावर होती है। हालांकि इसके लिए बहुमत साबित करना भी जरूरी है। अनवर काफी समय से इंडोनेशिया में विपक्ष के नेता रह चुके हैं। 20 नवंबर को हुए चुनाव में अनवर इब्राहिम के समर्थन वाले गठबंधन पकतान हरापात ने सबसे ज्यादा 82 सीटें जीती थी।

सुधारवादी नेता के तौर पर जाने जाते हैं अनवर इब्राहिम

सुधारवादी नेता के तौर पर जाने जाते हैं अनवर इब्राहिम

75 वर्षीय अनवर इब्राहिम सुधारवादी नेता के तौर पर जाने जाते हैं जिन्हें भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर लगभग एक दशक तक जेल में रखा गया। इब्राहिम1990 के दशक में देश के उपप्रधानमंत्री थे। अब अनवर इब्राहिम के प्रधानमंत्री बनने की खबर से देश में मौजूद अल्पसंख्यक राहत की सांस लेते दिख रहे हैं। अनवर के प्रधानमंत्री बनने के बाद मलेशिया का शेयर मार्केट भी उछाल पर है। अनवर इब्राहिम के समर्थकों का मानना है कि अब मलेशिया में एक ताकतवर और स्थायी सरकार रहेगी। उनके एक समर्थक ने कहा, हम धर्म और जाति के आधार पर औऱ विभाजित देश में नहीं रह सकते। इससे हम दस साल पीछे चले जाते हैं।

इस्माइल साबरी ने नहीं किया मुहीद्दीन खेमे का समर्थन

इस्माइल साबरी ने नहीं किया मुहीद्दीन खेमे का समर्थन

वहीं, पीएम इस्‍माइल साबरी याकूब के नेतृत्व वाले गठबंधन पार्टी की इस चुनाव में बुरी गत हुई थी और उन्हें महज 30 सीटें हासिल हुईं, लेकिन फिर भी ऐसा माना जा रहा था कि सत्ता की चाबी उसके हाथों में होगी। यूएमएनओ ने विपक्ष में बने रहने के अपने फैसले को पलटते हुए कहा था कि वह एकता सरकार के गठन के सुल्तान के प्रस्ताव पर विचार करेगी। हालांकि यूएमएनओ महासचिव अहमद मसलन ने कहा था कि पार्टी के सर्वोच्च निर्णय करने वाली संस्था ने अब एक ऐसी एकता सरकार का समर्थन करने का फैसला किया है, जिसका नेतृत्व मुहीद्दीन खेमे के हाथों में नहीं होगा।

मलेशिया के बढ़ते इस्लामिकरण पर लग पाएगी रोक?

मलेशिया के बढ़ते इस्लामिकरण पर लग पाएगी रोक?

मलेशिया के आम चुनाव में अनवर के नेतृत्व वाले गठबंधन पाकतन हरपन (उम्मीदों के गठबंधन) को सर्वाधिक 82 सीटें मिली थी। हालांकि, इस गठबंधन को सरकार बनाने के लिए 112 सीटों की जरूर थी, जिससे वो काफी पीछे रह गया था। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री मुहीद्दीन के मलय-केंद्रित पेरिकटन नेशनल (राष्ट्रीय गठबंधन) को 73 सीटें मिली थी। जैसे ही विभिन्न छोटे दलों ने अनवर का साथ देने का ऐलान किया, उनके पीएम बनने का रास्ता साफ हो गया। अनवर के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता तब साफ हो गया, जब एकता सरकार के गठन के लिए विभिन्न छोटे दल उन्हें समर्थन देने के लिए तैयार हो गए। अनवर के पीएम बनने से मुहीद्दीन के शासन में मलेशिया के बढ़ते इस्लामिकरण को लेकर उपजी चिंताओं के दूर होने और शासन प्रणाली में सुधार की पहल की बहाल की उम्मीद जगी है।

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