चीन में 'तानाशाह हटाओ' के नारे! ताजपोशी से पहले शी जिनपिंग को हटाने के बैनर लगे
16 अक्टूबर को सीपीसी की बैठक और शी जिनपिंग की ताजपोशी से पहले ही कुछ जिनपिंग विरोधी नारों में राष्ट्रपति को तानाशाह और देशद्रोही कहा गया है।
सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 16 अक्टूबर को बीजिंग (Beijing) में राष्ट्रीय कांग्रेस (20th CPC National Congress) की बैठक होनी है। जिसमें शी जिनपिंग (xi jinping) के लगातार तीसरी बार ताजपोशी होने की उम्मीद है। लेकिन उससे पहल चीन की सड़कों पर जिनपिंग के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। राजधानी बीजिंग में कई जगहों पर उनके खिलाफ बैनर लगाए गए हैं। बीजिंग में पत्रकार स्टीफन मैकडॉनेल ने ट्वीट कर बताया कि, बैनर में जो नारे लिखे गए थे, वे चीन की शून्य कोविड नीतियों का विरोध में थे। नारे में लिखा हुआ था ' हम COVID टेस्ट नहीं चाहते, हम लॉकडाउन नहीं चाहते, हम आजादी चाहते हैं।'

शी जिनपिंग के खिलाफ लगे बैनर
16 अक्टूबर को सीपीसी की बैठक और शी जिनपिंग की ताजपोशी से पहले ही जिनपिंग विरोधी नारों में उन्हें तानाशाह और देशद्रोही कहा गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद अधिकारियों ने हैडियन जिले में लगाए गए जिनपिंग विरोधी बैनर को फौरन हटा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक उस इलाके से काला धुंआ उठता हुआ देखा गया।

तानाशाह को हटाओ
ट्विटर पर शेयर किए गए कई फोटो में सड़क पर आग का धुंआ उठते और एक बैनर नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लगाए गए बैनर में शी जिनपिंग को तानाशाह और देशद्रोही भी कहा गया है। एक बैनर पर लिखा था, 'हम सांस्कृतिक क्रांति नहीं, सुधार चाहते हैं। हमें कोरोना टेस्ट नहीं बल्कि भोजन चाहिए।' तानाशाह जिनपिंग को हटा दें। बैनरों में लिखा था, 'आइए हम स्कूल और काम से हड़ताल करें और तानाशाह शी जिनपिंग को हटा दें। हम COVID टेस्ट नहीं चाहते, हम लॉकडाउन नहीं चाहते, हम आजादी चाहते हैं।' इस तरह के विरोधी नारों ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट के नेताओं को चिंतित कर दिया है।

तानाशाह और देशद्रोही के नारे
बता दें कि चीन में साल 1949 की कम्युनिस्ट क्रांति के बाद से ही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का शासन है। देश में लोकतंत्र नहीं है और एक ही पार्टी बारी-बारी से सत्ता के शीर्ष पर काबिज रहते हैं। पहले चीन में राष्ट्रपति के अभी तक 5-5 साल के अधिकतम 2 कार्यकाल की सीमा तय थी। हालांकि, शी जिनपिंग के इशारे पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने पिछली बैठक में वह शर्त हटा दी थी। अब जब वह शर्तें हट चुकी हैं, जिनपिंग के आजीवन पद पर बने रहने का भी रास्ता साफ हो गया है।
शी की ताजपोशी की तैयारी
राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 16 अक्टूबर को होने वाली सीपीसी की बैठक में तीसरी बार ताजपोशी की तैयारी हो रही है। अब जब विरोध की लहरें उठने लगी हैं, तो कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन को देखते हुए पुलिस भी हाई अलर्ट मोड पर है। फिलहाल अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि, बैनरों को किसने कब और कैसे लटकाया ।
(Photo Credit : Twitter)
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