अफगानिस्तान के लिए एक और बुरी खबर, उज्बेकिस्तान में मिलिट्री विमान दुर्घटनाग्रस्त
ताशकंद,16 अगस्त: तालिबान के हाथों मात खा चुके अफगानिस्तान के लिए एक और बहुत ही बुरी खबर है। अफगान मिलिट्री का एक विमान उज्बेकिस्तान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह विमान हादसा उस वक्त हुआ जब अफगानी सेना का विमान सीमा पार करके उज्बेकिस्तान में दाखिल हो चुका था। मीडिया रिपोर्ट में उज्बेक रक्षा मंत्रालय के हवाले से सोमवार को बताया गया है कि विमान हादसाग्रस्त होने से ठीक पहले उसका पायलट विमान से इजेक्ट कर गया और वह जिंदा है। गौरतलब है कि रविवार को ही अफगानिस्तान की सरकार तालिबान के हाथों हार चुकी है और उसने राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया है। (तस्वीर-प्रतीकात्मक)

अफगानिस्तान की सीमा पर हुआ हादसा-रिपोर्ट
जानकारी के मुताबिक मिलिट्री जेट उज्बेकिस्तान के दक्षिणी प्रांत में हुआ है, जो इलाका अफगानिस्तान से सटा हुआ है। रूसी न्यूज एजेंसी आरआईए के मुताबिक उज्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक पायलट विमान से कूद गया, लेकिन वह घायल हो गया है। रविवार को उज्बेकिस्तान ने कहा था कि उसने 84 अफगान सैनिकों को हिरासत में ले रखा है, जो सीमा पार करके आ गए थे और मेडिकल सहायता मांगी थी। इससे पहले एक न्यूज रिपोर्ट में बताया गया था कि यह हादसा रविवार को देर रात हुआ था। गजेटा डॉट यूजेड की रिपोर्ट में कुछ फोटोग्राफ पब्लिश किए गए थे, जिसमें एयरफोर्स की वर्दी वाले एक शख्स को मेडिकल टीम मदद कर रही थी। इसमें सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया था किअफगान मिलिट्री के दो लोगों को उस प्रांत की राजधानी तरमेज के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस हादसे के बारे में पूरी स्थिति उज्बेकिस्तान के अधिकारियों से साफ नहीं की जा सकी है।
तालिबान ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी हैं- इमरान
इस बीच जैसे-जैसे तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हो रहा है, पाकिस्तान का चेहरा पूरी तरह से बेनकाब होता जा रहा है। पाकिस्तानी प्रधानममंत्री इमरान खान ने कहा है कि तालिबान ने 'गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी हैं।' पाकिस्तान समर्थित तालिबान के आतंकियों ने रविवार को काबुल पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद यह साफ हो चुका है कि वहां एकबार फिर से कट्टर इस्लामी सत्ता की वापसी होने जा रही है। तालिबान की ओर से शरिया कानून लागू होने के बाद महिलाओं पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका है, क्योंकि दो दशक पहले वह तालिबान की क्रूरता की सबसे बड़ी शिकार बन चुकी हैं।
सांस्कृतिक गुलामी असली गुलामी से बदतर- पाकिस्तानी पीएम
इमरान खान ने अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा और उसके असर के बारे में कहा है कि 'जब आप दूसरी संस्कृति को लेते हैं तो मनोवैज्ञानिक रूप से अधीन हो जाते हैं। कृप्या याद रखिए कि जब ऐसा होता है तो यह असली गुलामी से भी बदतर है। सांस्कृतिक दासता की जंजीरों को फेंककर निकलना मुश्किल है। अफगानिस्तान में अब जो हो रहा है, उन्होंने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ दिया है। ' गौरतलब है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को हटाने की मियाद 31 अगस्त को तय कर रखी थी। लेकिन, हालात ने इतनी तेजी से करवट बदली कि तालिबान ने दो हफ्ते पहले ही काबुल फतह कर लिया और अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी को कारों और कैश को हेलीकॉप्टर में भरकर देश छोड़कर भागना पड़ गया।












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