PM मोदी के पीछे हाथ धोकर पड़ा एमनेस्टी इंटरनेशनल, US में कीचड़ उछालने की 'साजिश' क्यों होगी नाकाम?
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मानवाधिकार के नाम पर भारत को पहले भी बदनाम करने की कोशिश की है, खासकर इसके निशाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार रही है।
BBC documentary Amnesty International: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले हफ्ते अमेरिका की राजकीय यात्रा पर जाने वाले हैं, लेकिन उससे पहले मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल उनके पीछे हाथ धोकर पड़ गया है। पीएम मोदी के सम्मान में व्हाइट हाउस में आयोजित होने वाले डिनर कार्यक्रम से दो दिन पहले एमनेस्टी इंटरनेशनल, अमेरिका में बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करेगा।
ये पहली बार नहीं है, जब एमनेस्टी इंटरनेशनल भारतीय पीएम के विदेशी दौरे को लेकर इस तरह की हरकतें कर रहा है, बल्कि इससे पहले जब पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया गये थे, उस वक्त भी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री ऑस्ट्रेलियाई संसद परिसर में दिखाई गई थी, लेकिन ऐसा लगता है, कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के अपने असफल प्रयास से नहीं सीखा है।

ह्यूमन राइट्स वॉच के साथ मिलकर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अब अमेरिका में भी इसी तरह की रणनीति की योजना बनाई है। उनकी आधिकारिक राजकीय यात्रा से दो दिन पहले, यानि 20 जून को वे फिर से बीबीसी के डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करेंगे।
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने 20 जून को दो पार्ट वाले डॉक्यूमेंट्री "इंडिया: द मोदी क्वेश्चन" की निजी स्क्रीनिंग के लिए नीति निर्माताओं, पत्रकारों और विश्लेषकों को आमंत्रित किया है। स्क्रीनिंग की घोषणा करते हुए ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा, कि वह लोगों को याद दिलाना चाहता है, कि डॉक्यूमेंट्री को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है।
भारतीय पीएम को बदनाम करने की कोशिश
एमनेस्टी इंटरनेशनल, जिसकी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट (FCRA) के कथित उल्लंघन के लिए भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है, उसने कैनबरा में ऑस्ट्रेलिया के संसद भवन में एक कार्यक्रम में पीएम मोदी पर बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की थी। इसे पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा से महज तीन दिन पहले दिखाया गया था।
लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल अपने प्रयास में सफल नहीं हुआ और भारतीय पीएम का ऑस्ट्रेलिया में एक रॉक स्टार जैसा स्वागत किया गया, और 20,000 से ज्यादा लोगों ने मोदी के कार्यक्रम में शिरकत की। इतना ही नहीं, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी पीएम मोदी को "बॉस" कहकर संबोधित किया।
इसके अलावा, पीएम मोदी का नाम ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में कुछ समय के लिए आसमान पर लिखा गया और ऑस्ट्रेलिया में जिस तरह से पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, उसने एमनेस्टी इंटरनेशनल के आयोजकों को दिल में जरूर दर्द दिया होगा।
अमेरिका में स्वागत नहीं, जश्न मनेगा
अमेरिका पीएम मोदी के दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहा है और बाइडेन परिवार ने पीएम मोदी के लिए 21 जून को अंतरंग डिनर कार्यक्रम रखा है, जबकि व्हाइट हाउस पीएम मोदी के सम्मान में 22 जून को डिनर कार्यक्रम का आयोजन करेगा।
एमनेस्टी इंटरनेशनल के किसी भी प्रयास से अमेरिका में भारतीय समुदाय के उत्साह के कम होने की दूर दूर तक कोई संभावना नहीं है। इतना ही नहीं, राज्य के सचिव एंटनी ब्लिंकन ने सोमवार को कहा, कि पीएम मोदी की अमेरिका की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा 21 वीं सदी के परिभाषित संबंधों को और मजबूत करेगी।
इसके अलावा, भारतीय अमेरिकी उत्साह के साथ पीएम मोदी के स्वागत की तैयारी कर रहे हैं। करीब 600 भारतीय समुदाय के सदस्य वाशिंगटन में विलार्ड इंटरकांटिनेंटल के सामने फ्रीडम प्लाजा में इकट्ठा होने की तैयारी कर रहे हैं, जो व्हाइट हाउस के करीब है, और जहां पीएम मोदी अपनी यात्रा के दौरान रहेंगे, जबकि भारतीय अमेरिकियों का एक समूह न्यूयॉर्क के एंड्रयूज एयरफोर्स बेस जाने की योजना बना रहा है, जब पीएम का एयर इंडिया वन 21 जून को दोपहर को उतरेगा।
22 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति बाइडेन और प्रथम महिला जिल बाइडेन के साथ 21 तोपों की सलामी दी जाएगी।
अमेरिकी संसद में होगा संबोधन
इसके बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिकी संसद को संबोधित करें। मोदी अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को दो बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे, जो एक इतिहास होगा। भारतीय अमेरिकियों के अनुसार, अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने के लिए पीएम का निमंत्रण, अमेरिका और भारत के बीच संबंधों के ऐतिहासिक महत्व की याद दिलाता है।
इसके अलावा अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, 23 जून को दोपहर के भोजन के लिए पीएम मोदी की मेजबानी करेंगी, जिसकी सह-मेजबानी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और सेकंड जेंटलमैन द्वारा की जा रही है।
भारतीय पीएम 23 जून को प्रवासी भारतीयों और व्यापारिक समुदाय के साथ भी बातचीत करेंगे। इस बीच, बाइडेन प्रशासन के कई कैबिनेट मंत्रियों और प्रमुख नेताओं के पीएम मोदी से मुलाकात करने की संभावना है। लिहाजा, एमनेस्टी इंटरनेशनल की ये हरकत कुछ अखबारों में हेडलाइन बनने के अलावा कोई और महत्व नहीं रखेगा।
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