BRICS: डगमगाती अर्थव्यवस्था, कंगाल होती कंपनियां... आज दक्षिण अफ्रीका के लिए निकलेंगे शी जिनपिंग

BRICS Summit China South Africa: चीनी नेता शी जिनपिंग विकासशील और उभरते देशों के बीच बीजिंग के प्रभाव को बढ़ाने के इरादे से सोमवार को दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर निकल रहे हैं। शी जिनपिंग का दक्षिण अफ्रीका दौरा उस वक्त हो रहा है, जब संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंध गहरे तनावपूर्ण बने हुए हैं और घरेलू स्तर पर आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं।

तीन दिवसीय राजकीय यात्रा, जिसमें ब्रिक्स की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के साथ एक शिखर सम्मेलन में शामिल होना भी शामिल है, इस साल शी जिनपिंग की ये केवल दूसरी अंतर्राष्ट्रीय यात्रा है, जबकि कोविड संकट से पहले शी जिनपिंग करीब करीब हर महीने विदेश यात्रा किया करते थे।

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इस साल की दूसरी विदेश यात्रा

चीनी नेता ने इस साल की पहली विदेश यात्रा मार्च महीने में की थी, जब वो मॉस्को में अपने "प्रिय मित्र" व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए देश छोड़ा था, जहां दोनों सत्तावादी ताकतों ने अमेरिका के खिलाफ अपने रणनीतिक गठबंधन की पुष्टि की और एक नई विश्व व्यवस्था के लिए अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया, जिस पर अब पश्चिम का प्रभुत्व नहीं होगा।

शी जिनपिंग के लिए, महामारी के बाद से ब्रिक्स समूह का पहला व्यक्तिगत शिखर सम्मेलन, उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का एक और मौका बनाएगा।

ब्रिक्स ब्लॉक के सदस्य, ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका - वैश्विक आबादी का 40 प्रतिशत से ज्यादा का हिस्सा हैं। और ये सभी देश एक मल्टीपोलर वर्ल्ड की इच्छा और वैश्विक मामलों में ज्यादा भागीदारी की मांग भी साझा करते हैं।

लंदन विश्वविद्यालय में एसओएएस चीन संस्थान के निदेशक स्टीव त्सांग ने कहा, कि "शी जिनपिंग अमेरिका के प्रभुत्व वाली मौजूदा उदारवादी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य विश्व व्यवस्था को चीन-केंद्रित व्यवस्था में बदलना है।"

त्सांग ने कहा, कि उस महत्वाकांक्षा का समर्थन करने के लिए, "चीन के लिए ग्लोबल साउथ के साथ जुड़ना समझ में आता है, (जो) पश्चिमी लोकतंत्रों की तुलना में काफी बड़ा है और ग्लोबल साउथ के ज्यादातर देशों में सत्तावादी ताकतें सरकार में हैं।"

शुक्रवार को शी जिनपिंग की यात्रा का पूर्वावलोकन करते हुए, दक्षिण अफ्रीका में चीन के राजदूत चेन जियाओदोंग ने ब्रिक्स को "उभरते और विकासशील देशों के बीच सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच" और "अंतर्राष्ट्रीय निष्पक्षता और न्याय की रीढ़" बताया है।

घरेलू स्तर पर चीन का बुरा हाल

शी जिनपिंग ग्लोबल साउथ में चीन को किंग और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को चीन केन्द्रित करने का लक्ष्य जरूर लेकर चल रहे हैं, लेकिन कोविड महामारी के बाद की बनी स्थिति ने उनके सामने असंख्य चुनौतियां खड़ी कर रखी हैं।

कठोर कोविड लॉकडाउन से चीन की बहुप्रतीक्षित आर्थिक वापसी लड़खड़ा रही है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था समस्याओं के संगम से घिरी हुई है, रियल एस्टेट संकट और बढ़ते स्थानीय सरकारी ऋण से लेकर बिगड़ते अपस्फीति दबाव तक, चीन काफी मुश्किल में जूझ रहा है।

देश की युवा बेरोजगारी दर, जो हाल के महीनों में लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई, वो अब इतनी खराब स्तर पर पहुंच चुकी है, कि चीनी सरकार ने इसे एक साथ जारी करना सस्पेंड कर दिया है।

वाशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर थिंक टैंक में चीन कार्यक्रम के डायरेक्टर युन सन ने कहा, कि संघर्षरत अर्थव्यवस्था शी जिनपिंग के कूटनीतिक आकर्षण, उनकी आक्रामक के लिए एक प्रमुख बाधा है, खासकर ग्लोबल साउथ में।

उन्होंने कहा, कि "चीन ने ग्लोबल साउथ में खूब कर्ज बांटें हैं और देशों के लिए पैकेज का ऐलान किया है, लेकिन अब चीन की जो अर्थव्यवस्था है, उसे देखते हुए बीजिंग के लिए शायद ही अब ऐसा करना संभव है।"

लिहाजा, चीन की बिगड़ी आर्थिक स्थिति, शी जिनपिंग की उस महान शक्तिशाली नेता की भूमिका निभाने की क्षमता को बाधित कर रहा है, जो वह करते आए हैं।

शी जिनपिंग को चीन को उस जनता का भी सामना करना पड़ रहा है, जो विदेशों में अपनी सरकार के भारी खर्च को लेकर बहुत अधिक सशंकित हो गई है।

जैसे चीनी सोशल मीडिया पर शी जिनपिंग के ड्रीम बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिलता है। चीनी नागरिक पूछ रहे हैं, कि विदेशों में इतना पैसा निवेश करने का क्या औचित्य है, जबकि, घरेलू स्तर पर चीन को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।"

लिहाजा, लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के बीच, चीन के लिए किस देश में निवेश करना है, इसका फैसला लेना काफी मुश्किल हो गया है और अब उसे ये फैसला काफी सोच-समझकर करना होगा।

चीन की अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग धीमी हो गई है, लेकिन फिर भी बीजिंग ने अफ्रीका में राजनीतिक और सैन्य भागीदारी बढ़ा दी है, जिसमें पार्टी दर पार्टी भागीदारी बढ़ाना, ज्यादा कन्फ्यूशियस संस्थान स्थापित करना और चीन में सैन्य अकादमियों में ज्यादा अफ्रीकी अधिकारियों को प्रशिक्षण देना शामिल है।

यह यात्रा पांच सालों में शी जिनपिंग की पहली अफ्रीका यात्रा है।

और सबसे दिलचस्प ये है, कि पिछली बार जब शी जिनपिंग ने अफ्रीका का दौरा किया था, तो उसमें कई देशों के तुफानी कार्यक्रम शामिल थे, जो उप-सहारा अफ्रीका के लगभग हर कोने तक फैली हुई है।

लेकिन इस बार, बीजिंग ने शी जिनपिंग के लिए किसी अन्य पड़ाव की घोषणा नहीं की है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि इसके बजाय, चीनी नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर अपने दक्षिण अफ्रीकी समकक्ष सिरिल रामफोसा के साथ चीन-अफ्रीका नेताओं की वार्ता की सह-अध्यक्षता करेंगे।

शिखर सम्मेलन में सभी अफ्रीकी राज्यों सहित कुल 69 देशों को आमंत्रित किया गया है।

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