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धनकुबेर और एक ताक़तवर कम्युनिस्ट की मुलाक़ात

By Bbc Hindi
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    चीन-अमरीका
    REUTERS
    चीन-अमरीका

    अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप एक ऐसे व्यक्ति हैं जो समय-समय पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उलझते नज़र आते हैं. दंभी अरबपति ट्रंप को लगता है कि पार्टी की तुलना में उनका कद बड़ा है और उनके सामने राष्ट्रीय परियोजनाएं भी बौनी हैं.

    ट्रंप का यह व्यक्तित्व चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के कड़े अनुशासन के सामने बहुत काम नहीं आया और बाद में वो तारीफ़ करने लगे. दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों के ये नेता दिलचस्प विरोधाभास के बीच बीजिंग में मिलने जा रहे हैं.

    डोनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों ने व्हाइट हाउस को 'अडल्ट डे सेंटर' क़रार दिया है जबकि शी की पार्टी के प्रतिनिधि अपने नेता को महान, बुद्धिमान और 'समाजवाद के मसीहा' बताते हैं. ट्रंप यहां तक कि अपने साथी अमरीकी पूंजीपतियों पर भी निर्भर नहीं हो सकते हैं.

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    अमरीका में तकनीकी दुनिया के बादशाह ट्रंप के साथ एशियाई दौरे पर नहीं हैं. पिछले हफ़्ते फ़ेसबुक के मार्क ज़करबर्ग, ऐपल के टिम कुक और माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नाडेला बीजिंग में शी जिनपिंग से कंधा से कंधा मिलाए खड़े दिखे थे.

    एक व्यक्ति के तौर पर लोगों के बीच भी दोनों नेताओं में काफ़ी असमानता है. ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वो राष्ट्रपति शी का सम्मान करते हैं. अमरीकी राष्ट्रपति शी के असाधारण उभार के भी कायल हैं. शी को ट्रंप शक्तिशाली और एक अच्छा दोस्त बताते हैं.

    पूर्व मुख्य रणनीतिकार स्टीफ़न बैनन का कहना है कि दुनिया में ऐसा कोई नेता नहीं है जिसकी तारीफ़ ट्रंप ने शी की तरह की हो, लेकिन सार्वजनिक तौर पर शी ने ट्रंप को दोस्त के सिवा कभी महान या क़ाबिल नहीं कहा.

    चीन
    Reuters
    चीन

    शी दावा करते हैं कि उन्होंने वॉल्ट विटमैन से लेकर मार्क ट्वाइन और अर्नेस्ट हेमिंग्वे समेत कई लेखकों को पढ़ा है, लेकिन इस सूची में डोनल्ड ट्रंप कहीं नहीं हैं. रियल एस्टेट के कारोबारी ट्रंप की 'आर्ट ऑफ द डील' नाम की एक किताब है.

    हो सकता है कि ट्रंप की यह किताब अमरीका में बेस्टसेलर रही हो, लेकिन शी के लिए सन ज़ी के आर्ट ऑफ़ वॉर ज़्यादा अहम है. यही शी की शासनकला है.

    ट्रंप अपनी किताब में कहते हैं, ''अगर आपके पास बहुत संरचना है तो कल्पनाशील या उद्यमी नहीं हो सकते हैं. मैं हर दिन काम को प्राथमिकता देता हूं और उसका मूल्यांकन करता हूं.''

    लेकिन प्राचीन सैन्य ग्रंथ सभी चीनी रणनीतिकारों के लिए काफ़ी अहम है. इसमें कहा गया है, ''शत्रु को जानो, ख़ुद को पहचानो और तब तुम्हारी विजय कभी संकटग्रस्त नहीं होगी. ज़मीनी हक़ीक़त समझो, मौसम का रुख़ भांपो और इसके बाद संपूर्ण जीत तय है.''

    डोनल्ड ट्रंप
    AFP
    डोनल्ड ट्रंप

    शी और ट्रंप के बीच विरोधाभास उनके पूरे जीवन का है. शी एक कम्युनिस्ट क्रांतिकारी के बेटे हैं. चीन में सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने से पहले शी ने एक किसान के तौर पर सात सालों तक गुफा में जीवन व्यतीत किया है.

    8.9 करोड़ कार्यकर्ताओं के साथ शीर्ष पर पहुंची चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में कठोर अनुशासन और रणनीतिक सब्र काफ़ी अहम है. दूसरी तरफ़ ट्रंप के आचरण में इन गुणों का शायद ही कभी ज़िक्र किया जाता है.

    ज़ाहिर है दोनों नेताओं की शैली में भी काफ़ी फ़र्क़ है. शी शायद ही कभी किसी वाक्य की शुरुआत 'मैं' से करते हैं. उनके नेतृत्व के लिए राष्ट्रीय ध्वज की मर्यादा ज़्यादा अहम है. शी जिनपिंग चीनी राष्ट्र के कायाकल्प के सपने को लेकर पूरी तरह से दृढ़ दिखते हैं.

    ऐसे में चीनी राष्ट्रपति के व्यवहार में गंभीरता और संतुलन का पुट हमेशा रहता है. शी जिनपिंग के व्यक्तित्व को लेकर वहां के लोगों के मन में आकर्षण है.

    डोनल्ड ट्रंप
    Getty Images
    डोनल्ड ट्रंप

    चीन के स्कूलों, यूनिवर्सिटियों, कंपनियों और सरकारी दफ़्तरों में शी जिनपिंग थॉट पढ़ाया जाएगा. इसकी तुलना में ट्रंप में आत्ममुग्धता है. उनके व्यक्तित्व को लेकर लोगों के मन में आकर्षण से ज़्यादा उनके मन में है. ट्रंप की शुरुआत ही मैं से होती है.

    ट्रंप जब एशिया के दौरे पर हैं तो अमरीका में कई तरह की सियासी हलचल है. चीन के सरकारी मीडिया ने इसे संकट और उथल-पुथल क़रार दिया है.

    डोनल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग
    Getty Images
    डोनल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग

    बेमेल जोड़ी

    एक धनकुबेर और दूसरे कम्युनिस्ट में इतने सारे विरोधाभासों के बीच दो समानताएं भी हैं. दोनों के हाथों में ताक़तवर राष्ट्र की कमान है और दोनों को ख़ुद पर काफ़ी भरोसा है. दोनों ख़ुद को अपने-अपने देश का मसीहा समझते हैं.

    दोनों को लगता है कि उनका देश दुनिया में ख़ास है. शी जिनपिंग चीनी राष्ट्र में महान कायापलट की बात कर रहे हैं तो ट्रंप सत्ता में आने से पहले अमरीका को फिर से महान बनाने की बात कर रहे थे.

    दोनों नेताओं के वादे एक जैसे हैं- स्वर्णिम काल में देश को फिर से ले जाना और ताक़त के मामले में श्रेष्ठ बनाना. इसके साथ ही कोई बाहरी हित नहीं और अपनी राह पर चलना भी इनका संकल्प है.

    डोनल्ड ट्रंप
    Getty Images
    डोनल्ड ट्रंप

    इसी हफ़्ते ट्रंप और शी विश्व मंच पर इकट्ठा होने वाले हैं. ट्रंप के इस दौरे को चीन एक राजकीय दौरा से बढ़कर देख रहा है. चीन ने इस दौरे 'स्टेट विजिट प्लस' नाम दिया है.

    एक बड़ा सवाल यह है कि दोनों देश अपनी राह साथ मिलकर तैयार करेंगे या दोनों में से किसी एक को क़ीमत चुकानी पड़ेगी. ज़ाहिर है यह सवाल केवल इस हफ़्ते का नहीं है बल्कि लंबे समय तक कायम रहेगा. 2017 का चीन काफ़ी ताक़तवर है.

    2001 या 2009 के मुक़ाबले चीन आज की तारीख़ में ज़्यादा आत्मविश्वास से भरा है. शी के नेतृत्व वाला चीन अमरीकी तौर तरीक़ों के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है.

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    BBC Hindi
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    English summary
    America persident Tantakubar and a strong communist meet

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