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तालिबान पर पाकिस्तानी एयरस्पेस से हमले कर रहा है अमेरिका, पूर्व पाकिस्तानी डिप्लोमेट का बड़ा दावा

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इस्लामाबाद, अगस्त 03: पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक ने बड़ी शंका जताते हुए कहा है कि तालिबान को रोकने के लिए अमेरिका पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल कर रहा है। पूर्व पाकिस्तानी डिप्लोमेट ने ये संभावना उस वक्त जताई है, जब तालिबान लगातार अफगानिस्तान में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और रोकने के लिए अमेरिका ने पिछले हफ्ते कई एयरस्ट्राइक किए हैं, जिनसे तालिबान को काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं, अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद सवाल उठने शुरू हो गये हैं कि आखिर अमेरिका तालिबान को किस सैन्य अड्डे से निशाना बना रहा है और तालिबान पर कहां से बमबारी कर रहा है, जिसको लेकर पूर्व पाकिस्तानी डिप्लोमेट ने कहा है कि ''मेरा मानना है कि अमेरिका पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल कर रहा है''।

पूर्व पाकिस्तानी डिप्लोमेट का दावा

पूर्व पाकिस्तानी डिप्लोमेट का दावा

पाकिस्तान के पूर्व डिप्लोमेट जफर हिलाली ने एक तरह से दावा किया है और सवाल उठाया है कि आखिर तालिबान को अमेरिका कहां से निशाना बना रहा है? उन्होंने कहा कि ''तालिबान पर अमेरिका ने एयरस्ट्राइक करना शुरू कर दिया है और ऐसा करके अमेरिका अपने वायदे को तोड़ रहा है और मेरा मानना है कि तालिबान पर एयरस्ट्राइक करने के लिए अमेरिका पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल कर रहा है''। पाकिस्तान के वरिष्ठ डिप्लोमेट जफर हिलाली का ये दावे में इसलिए दम माना जा रहा है कि क्योंकि उनकी पाकिस्तानी सेना के अंदर काफी ज्यादा पैठ है और पाकिस्तान सरकार के अंदर भी उनकी काफी अंदर तक पहचान मानी जाती है। जफर हिलाली पाकिस्तानी मीडिया में जाने-माने पैनलिस्ट माने जाते हैं।

तालिबान को मिलेगी मान्यता

तालिबान को मिलेगी मान्यता

जफर हिलाली ने तालिबानी नेताओं के चीन दौरे को लेकर कहा है कि ''तालिबान एक्सलेंट डिप्लोमेसी कर रहा है। वो रूस के साथ जबरदस्त रिलेशन बना रहा है। चीन, ईरान, सेन्ट्रल एशिया और पाकिस्तान के साथ बड़े अच्छे ताल्लुक बना रहा है और जैसे ही वो काबुल पर कब्जा कर लेता है, उसे मान्यता लेने में आसानी होगी''। पूर्व पाकिस्तानी डिप्लोमेट के इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तानी एक बार फिर से तालिबान को मान्यता देने जा रहा है? हालांकि, जफर हिलाली ने जिस तरह से तालिबान के पक्ष में बोला है, उससे पता चलता है कि पाकिस्तान सरकार पूरी तरह से तालिबान को फिर से मान्यता देने के पक्ष में हैं, लेकिन इमरान सरकार एफएटीएफ के डर से तालिबान को मान्यता देने में आनाकानी करेगा।

अमेरिकी एयरस्ट्राइक पर सवाल

अमेरिकी एयरस्ट्राइक पर सवाल

पाकिस्तान के पूर्व डिप्लोमेट जफर हिलाली, जो यमन, नाइजीरिया और इटली में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हैं, उन्होंने तालिबान पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल से बात करते हुए जफर हिलाली ने कहा है कि ''तालिबान, चीन और रूस के साथ साथ डिप्लोमेटिक संबंध बढ़ा रहा है, जो एक्सलेंट बात है, लेकिन इन सबके बीच परेशानी पैदा करने वाली बात ये है कि अमेरिका एयरस्ट्राइक कर रहा है''। उन्होंने कहा कि ''अमेरिका ने तालिबान के साथ तय किया था कि तुम हमारी सैनिकों पर हमला नहीं करोगे और तालिबान अपने वादे को पूरा कर रही है, लेकिन यूनाइटेड स्टेट एयरफोर्स जो है, वो तालिबान को स्ट्राइक कर रहा है, काबुल के पक्ष में, ये कोई उस एग्रीमेंट में नहीं था, और मेरे ख्याल से ये उस उस एग्रीमेंट का कुछ हद तक खिलाफत भी है''

पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल?

पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल?

इससे आगे जफर हिलाली ने सीधे तौर पर इमरान खान सरकार पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जफर हिलाली ने दावा किया है कि ''इस वक्त खराब बात ये है कि अमेरिकन हवाई जहाज पाकिस्तान के एयरस्पेस से तालिबान के खिलाफ एक्शन ले रहे हैं और ये हमारे समझौते के खिलाफ है, ऐसा मैं समझता हूं''। पाकिस्तान के पूर्व डिप्लोमेट ने आगे कहा है कि ''मैं समझता हूं कि हमारे समझौते के मुताबिक हमने उनसे कहा हुआ है कि अगर आपके सैनिकों के ऊपर हमला होता है, तो उनको बचाने के लिए आप हमारे एयरस्पेस का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन हमने हरगिज उनको इस बात की इजाजत नहीं दी है कि वो पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल अफगान तालिबान के खिलाफ करें''। यानि, पाकिस्तानी डिप्लोमेट ने एक तरह से साफ कर दिया है कि तालिबान के खिलाफ भी पाकिस्तान डबल गेम कर रहा है।

तालिबान पर एयरस्ट्राइक

तालिबान पर एयरस्ट्राइक

आपको बता दें कि पिछले हफ्ते अमेरिका ने तालिबान के ठिकानों पर कई एयरस्ट्राइक किए हैं और हर तरफ सवाल ये उठ रहा है कि अफगानिस्तान से करीब करीब अपने सैनिकों को बाहर निकाल चुका अमेरिका, आखिर कहां से तालिबान को निशाना बना रहा है। कई सैन्य विशेषज्ञों ने भी कहा है कि पाकिस्तानी अमेरिका को अपना सैन्य अड्डा दे चुका है और उसी सैन्य अड्डे से पिछली बार की तरह के अमेरिका तालिबान के ठिकानों को उड़ा रहा है, जबकि पाकिस्तान सरकार इस दावे से साफ इनकार करती है। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अफगान सीमा से लगा और अमेरिका का पुराना दुश्मन ईरान उसे अपना सैन्य अड्डा नहीं देगा, दूसरी तरफ चीन और रूसी दोस्त देशों की सीमाएं हैं, जहां से भी अमेरिका को हवाई अड्डा नहीं मिलेगा, तो बचता सिर्फ पाकिस्तान है, जहां से अमेरिका इस वक्त तालिबान के ठिकानों पर हवाई हमले कर रहा है और पाकिस्तानी डिप्लोमेट का ये दावा सैन्य विश्लेषकों के शक पर मुहर है।

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English summary
Former Pakistan diplomat Zafar Hilali has claimed that the america is using pakistani airspace to air strike on taliban.
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