अमेरिका ने चीन पर लगाया हैकिंग का आरोप, कहा- उजागर करेंगे उसकी टेक्नोलॉजी
वाशिंगटन, 19 जुलाई: अमेरिका में इस साल सत्ता परिवर्तन हुआ था, लेकिन चीन के साथ उसका विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह ही जो बाइडन भी लगातार ड्रैगन पर हमलावर हैं। पहले उन्होंने चीन पर कोरोना फैलाने का आरोप लगाते हुए अपने खुफिया विभाग को जांच के आदेश दिए थे, तो वहीं अब अमेरिका और उनके सहयोगी गठबंधन ने चीन पर राज्य सुरक्षा मंत्रालय पर एक वैश्विक साइबर हैकिंग अभियान का आरोप लगाया है।

अमेरिकी प्रशासन ने सोमवार को कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, उसके सहयोगी और साझेदार दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों के पीआरसी (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) पैटर्न के विवरण को उजागर कर रहे हैं। इसके बाद उनका मुकाबला करने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने हैकिंग को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के आर्थिक मोर्च के साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से बड़ा खतरा बताया। अमेरिका अब आरोप लगाने के लिए नाटो, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड और कनाडा के साथ खड़ा हो गया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने आगे कहा कि नाटो ने भी चीन की साइबर गतिविधियों की निंदा की है। जिसके जरिए चीनी हैकर्स वसूली, क्रिप्टो जैकिंग, वित्तीय लाभ के लिए चोरी जैसे अपराधों को अंजाम देते हैं। अब अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, साइबर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा एजेंसी और संघीय जांच ब्यूरो, एनएसए, सीआईएसए और एफबीआई के जरिए चीन की उस टेक्नोलॉजी को उजागर करेगा, जिसके जरिए चीनी दुनियाभर को परेशान कर रहे हैं। हालांकि वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने इस मामले में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इससे पहले जब चीन पर ये आरोप लगे थे, तो वहां की सरकार ने खुद को ही साइबर हैकिंग को पीड़ित बताया था।












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