शराब की एक 'घूंट' भी बन रही है साइलेंट किलर, हर साल के हिसाब से इस तरह बढ़ता जाता है खतरा-रिपोर्ट
शराब नुकसानदेह है। यह बात तो सब जानते हैं। लेकिन, दक्षिण कोरिया के सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की देखरेख में एक शोध हुआ है, जिसके नतीजे बहुत ही डरावने हैं। इसमें पाया गया है कि साल-दर-साल शराब पीते जाने से स्ट्रोक का खतरा भी उसी अनुपात में बढ़ता चला जाता है। सबसे गंभीर चेतावनी ये दी गई है कि युवाओं में शराब की लत से कामकाजी आबादी पर संकट मंडराने लगा है। वैसे इस शोध में सिर्फ कोरियाई मूल के प्रतिभागियों को शामिल किया गया है, लेकिन यह भारत जैसे देश के लिए और भी गंभीर चेतावनी की तरह है।

शराब की एक 'घूंट' भी बन रही है साइलेंट किलर
द सन की एक रिपोर्ट के मुताबिक हेल्थ एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि एक दिन में सिर्फ एक ऐल्कहॉलिक ड्रिंक भी साइलेंट किलर का काम कर सकता है। जापान में हेल्थ एक्सपर्ट ने पाया है कि 20 और 30 की उम्र के जो लोग 'मध्यम से ज्यादा' मात्रा में शराब पीने के शौकीन हैं, उन्हें स्ट्रोक की आशंका बहुत ही ज्यादा है। अमेरिकी अकैडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के डॉक्टरों का भी कहना है कि स्ट्रोक का खतरा बढ़ता जाता है, जो जितने ज्यादा साल तक मध्यम से लेकर ज्यादा मात्रा में शराब पीते चले जाते हैं।

जितनी ज्यादा शराब, उतना ज्यादा खतरा
हम जिस शोध की बात कर रहे हैं उसमें जिन सहभागियों को शामिल किया गया उनसे पूछा गया कि वे हफ्ते में कितने दिन शराब पीते हैं और कितनी मात्रा में पीते हैं। जो एक दिन में 443.6 एमएल पीते थे, उन्हें मध्यम से लेकर बहुत ज्यादा शराब पीने वाला माना गया है। शोध में 15 लाख से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया, जिसमें से कुल 3,153 लोगों को स्ट्रोक आ चुका था। एक्सपर्ट ने पाया कि जो ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें स्ट्रोक आने की आशंका 20 फीसदी ज्यादा है, उनके मुकाबले जो कम मात्रा में शराब पीते हैं या शराब नहीं पीते हैं। कम पीने वाले उन्हें माना गया जो एक दिन में 443.6 एमएल से कम शराब पीते हैं।

हर साल के हिसाब से इस तरह बढ़ता जाता है खतरा
इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विस का कहना है कि व्यस्कों को एक हफ्ते में 14 यूनिट से ज्यादा शराब नहीं पीनी चाहिए, वह भी कम से कम तीन दिन या उससे ज्यादा में ली जानी चाहिए। यह शराब की 6 मीडियम ग्लास (175 एमएल) या चार प्रतिशत बियर की 6 ग्लास के बराबर है। लेकिन, शोध में यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि शराबी जितना पुराना है, उसे स्ट्रोक का जोखिम उसी तुलना में बढ़ता चला जाता है। मसलन, जो शख्स दो वर्षों से शराब पी रहा है, उसे स्ट्रोक का खतरा 19 फीसदी अधिक है। लेकिन, जो तीन साल से पीते जा रहा है, उसमें यह खतरा 22 प्रतिशत बढ़ जाता है।

अगर कोई और समस्या है तो ज्यादा खतरा
ठहरिए, यदि शख्स को कोई और समस्या है तो उसका जोखिम उसी मुताबिक और बढ़ जाता है। जैसे कि हाई ब्लड प्रेशर, स्मोकिंग और मोटापा-ये स्ट्रोक के लिए बहुत ही घातक हैं। रिसर्च में पाया गया है कि जो व्यक्ति चार वर्षों से शराब पी रहा है, ऐसे 1000 व्यक्तियों में 0.51 को स्ट्रोक आया। लेकिन, जो तीन साल से पी रहा था, उसका अनुपात घटकर 0.48 रह गया। इसी तरह दो साल में 0.43 और एक साल से पीने वालों में यह अनुपात घटकर 0.37 रह गया। लेकिन, जो बिल्कुल ही शराब नहीं पीते थे, उनमें यह जोखिम अनुपात सिर्फ 0.31 पाया गया।

शराब रोककर बदल सकते हैं समाज-एक्सपर्ट
दक्षिण कोरिया के सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के एमडी, पीएचडी और इस स्टडी के ऑथर -क्यून चोई ने कहा कि पिछले कुछ दशकों से युवाओं में स्ट्रोक के मामले बढ़ने लगे हैं और स्ट्रोक की वजह से युवाओं की मौत हो रही है और उनमें गंभीर विकलांगता की समस्याएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा, 'यदि हम शराब की खपत को कम करके युवा वयस्कों में स्ट्रोक को रोक सकते हैं, तो इसका व्यक्तियों के स्वास्थ्य और समाज पर संभावित रूप से बेहतर प्रभाव पड़ सकता है।' एक्सपर्ट ने कहा कि स्ट्रोक की घटनाओं को 90 फीसदी तक रोका जा सकता है, अगर चीजों में बदलाव लाया जा सके, जिसमें कि शराब भी शामिल है।

प्रतिभागियों में कोरियाई मूल के लोग शामिल थे
यहां यह गौर करना जरूरी है कि इस शोध के सारे प्रतिभागी कोरियाई मूल के थे, जो कि बहुत ही ठंडा क्षेत्र है। यानि भारत जैसे देश में शराब पीने वालों पर इस तरह का जोखिम कहीं ज्यादा भी हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता ये है कि स्ट्रोक की वजह से अगर जान बच भी जाती है तो युवा आबादी जो कि काम करने वाली होती है, उसकी उत्पादकता प्रभावित होती है, जो कि समाज और आखिरकार देश को भी कमजोर कर सकता है। (तस्वीरें- सांकेतिक)












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