तालिबान शासन में अफगानिस्तान में मौत का मातम, काबुल पर कब्जे के बाद एक हजार से ज्यादा नागरिक मरे

Afghjanistan News: यूनाइटेड नेशंस ने मंगलवार को कहा है, कि तालिबान के कब्जे के बाद से अफगानिस्तान के हालात काफी ज्यादा खराब हो गये हैं और अगस्त 2021 में काबुल पर कब्जा करने के बाद से तालिबान के शासनकाल में भारी संख्या में आम नागरिक मारे गये हैं या घायल हुए हैं।

हालांकि, यूएन रिपोर्ट में कहा गया है, कि युद्ध और आतंकियों के खिलाफ चल रहे युद्ध के मुकाबले मौत के आंकड़ों में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन ये आंकड़ा भी काफी खरतरनाक है।अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएएमए) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2021 के मध्य में अधिग्रहण के बाद से इस साल मई महीने तक अफगानिस्तान में हिंसा के दौरान 1,095 लोगों की मौत हुई है, जबकि 3,774 नागरिक घायल हुए हैं।

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थम नहीं रही है अफगानिस्तान में हिंसा

संयुक्त राष्ट्र की एक पूर्व रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा हालात से अगर तुलना की जाए, तो साल 2020 में जब तालिबान का कब्जा अफगानिस्तान पर नहीं हुआ था, उस साल देश में 3 हजार 35 लोग हिंसा में मारे गये थे, जबकि 8 हजार 820 लोग घायल हुए थे।

तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया, जबकि अमेरिकी और नाटो सैनिक दो दशकों के युद्ध के बाद अफगानिस्तान वापस लौट गये।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद से तीन-चौथाई हमले "धार्मिक स्थलों, स्कूलों और बाजारों सहित आबादी वाले क्षेत्रों" में तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों के साथ हुए हैं। वहीं, मरने वालों में 92 महिलाएं और 287 बच्चे शामिल हैं।

यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट में कहा गया है, कि तालिबान के शासन में देश में धार्मिक स्थलों पर होने वाले हमलों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि तालिबान शासन ले पहले बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर आईईडी ब्लास्ट किए जाते थे, जिसकी वजह से भारी संख्या में आम नागरिक मारे जाते थे। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि सबसे ज्यादा शिया मुसलमानों के मस्जिदों पर हमले किए गये हैं और मारे गये लोगों में सबसे ज्यादा शिया मुसलमान हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, कि मुख्य रूप से शिया हजारा समुदाय को निशाना बनाकर स्कूलों, शैक्षिक सुविधाओं और अन्य स्थानों पर किए गए हमलों में कम से कम 95 लोग मारे गए हैं। बयान में कहा गया है कि ज्यादातर आईईडी हमले इस्लामिक स्टेट-खुरासान समूह और उसके सहयोगियों ने किए हैं, जिसे इस्लामिक स्टेट के नाम से जाना जाता है। ये एक सुन्नी मुस्लिम आतंकवादी संगठन है, जो बहुत बेहरमी से लोगों का कत्ल करने के लिए कुख्यात है।

यूएनएएमए की मानवाधिकार सेवा की प्रमुख फियोना फ्रेज़र ने कहा, कि "नागरिकों और नागरिक वस्तुओं पर ये हमले निंदनीय हैं और इन्हें रोका जाना चाहिए।" उन्होंने तालिबान - अफगानिस्तान में वास्तविक अधिकारियों - से अफगान लोगों के "जीवन के अधिकार की रक्षा करने के अपने दायित्व को कायम रखने" का आग्रह किया है।

हालांकि, यूएन ने उन हमलों में होने वाली मौतों की उन बड़ी संख्या के बारें में जानकारी नहीं दी है, जिसको लेकर किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली। संयुक्त राष्ट्र ने कहा, कि मौतों की एक "महत्वपूर्ण संख्या" की रिपोर्ट में नहीं है। रिपोर्ट में तालिबान के कब्जे के बाद से "आत्मघाती हमलों की घातकता" के बारे में भी चिंता व्यक्त की गई है, जिसमें भी भारी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं।

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