अफगानिस्तान, मिडिल ईस्ट, चाबहार पोर्ट, PM मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच किन-किन मुद्दों पर हुई बात?
BRICS Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के कजान में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ द्विपक्षीय बैठक की है। यह मोदी और पेजेशकियन के बीच पहली बैठक थी, जो जुलाई में चुनाव जीतने के बाद राष्ट्रपति बने थे।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, कि "प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें उनकी हालिया जीत पर बधाई दी और ईरान के साथ सदियों पुराने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।"

मोदी से मिले ईरानी राष्ट्रपति
भारतीय विदेश सचिव के मुताबिक, "दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने बढ़ते संघर्ष पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की और नागरिकों की सुरक्षा और नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए भारत के आह्वान को दोहराया। उन्होंने तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने क्षेत्र में शांति और सद्भाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया और सभी पक्षों के साथ अपने अच्छे संबंधों को देखते हुए संघर्ष को कम करने में भारत की भूमिका पर भी जोर दिया।"
मिसरी ने कहा, नेताओं के बीच चर्चा का एक और मुख्य विषय अफगानिस्तान था। दोनों ने अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता जारी रखने के साथ-साथ क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने विशेष रूप से एससीओ और ब्रिक्स, दोनों में ईरान के प्रवेश में भारत की भूमिका को स्वीकार किया, और दोनों नेताओं ने ब्रिक्स और एससीओ सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों के भीतर अपने सहयोग को जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
चाबहार बंदरगाह पर अहम बातचीत
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के अलावा, दोनों नेताओं के बीच की बातचीत, खास तौर पर चाबहार बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे पर केंद्रित थी, जो क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय विदेश सचिव के मुताबिक, "इस संदर्भ में, ईरान में चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए दीर्घकालिक मुख्य अनुबंध पर हाल ही में हस्ताक्षर किए जाने से इन क्षेत्रों में सहयोग के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धताओं को और मजबूती मिली है, जो एक तरह से अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और विकास और मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार, आर्थिक और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण है...।"
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से सभ्यतागत संबंध हैं। ईरान, भारत के विस्तारित पड़ोस में स्थित है और दोनों देशों के आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण समानताएं हैं। भारत और ईरान महत्वपूर्ण व्यापार साझेदार हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर जनवरी 2024 में ईरान का दौरा किया था। सितंबर 2023 में ब्रिक्स में शामिल होने के बाद से यह उनकी पहली ईरान यात्रा थी। उन्होंने ईरान के तत्कालीन विदेश मंत्री डॉ. होसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन से भी मुलाकात की थी, जिनकी बाद में हेलीकॉप्टर हादसे में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के साथ मौत हो गई।
उन्होंने चाबहार बंदरगाह, भारत और ईरान के लोगों के बीच संपर्क, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे, गाजा की स्थिति, अफगानिस्तान में स्थिरता और सुरक्षा तथा यूक्रेन संघर्ष सहित कई विषयों पर चर्चा की।

इजराइल-ईरान तनाव पर भी बातचीत
भारत ने इस महीने की शुरुआत में पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति के बढ़ने पर अपनी चिंता व्यक्त की थी और सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने तथा नागरिकों की सुरक्षा का आह्वान दोहराया था। इस वर्ष अप्रैल में एक बयान में भारत ने कहा था, कि वह इजराइल और ईरान के बीच शत्रुता के बढ़ने से गंभीर रूप से चिंतित है, जो क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। इसने तत्काल तनाव कम करने, संयम बरतने, हिंसा से पीछे हटने तथा कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आह्वान किया।
इसके अलावा, पीएम मोदी ने कज़ान में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गर्मजोशी से गले लगाया। द्विपक्षीय बैठक के दौरान पुतिन ने द्विपक्षीय संबंधों और अपने व्यक्तिगत तालमेल का उल्लेख किया और कहा, "हमारे बीच ऐसा रिश्ता है, कि मुझे लगा कि आपको किसी अनुवादक की आवश्यकता नहीं है।" जवाब में पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती पर प्रकाश डाला।












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