अफगानिस्तान और म्यांमार की 'तानाशाही सरकार' को झटका, नहीं मिलेगा UN में बोलने का मौका
नई दिल्ली, 27 सितंबर: संयुक्त राष्ट्र महासभा का 76वां सत्र जारी है। जिसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष/प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। अफगानिस्तान और म्यांमार भी इसके सदस्य हैं, लेकिन दोनों देशों में तख्तापलट की वजह से वहां पर जनता द्वारा चुनी गई सरकार नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय आम बहस को संबोधित नहीं करेंगे। इसकी जानकारी सोमवार को यूएन के एक शीर्ष अधिकारी ने दी।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के उच्च स्तरीय आम बहस के अंतिम दिन के लिए वक्ताओं की नवीनतम सूची में अफगानिस्तान और म्यांमार के वक्ताओं का नाम नहीं हैं। शुक्रवार को यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक (Stephane Dujarric) ने बताया था कि सोमवार के लिए सूची में अंकित अफगानिस्तान के प्रतिनिधि एच ई श्री गुलाम एम. इसाकजई (H E Mr Ghulam M. Isaczai) हैं। वहीं म्यांमार के सैन्य शासकों ने संयुक्त राष्ट्र में देश के राजदूत मो तुन (Moe Tun) को बर्खास्त कर दिया था। वे चाहते हैं कि आंग थुरिन ( Aung Thurein) उनकी जगह लें।
इसके अलावा पिछले हफ्ते तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres) को पत्र लिखकर अपने प्रवक्ता सुहैल शाहीन को संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान का राजदूत नामित किया था। साथ ही अनुरोध किया था कि उन्हें 76वें सत्र में हिस्सा लेने का मौका दिया जाए। हालांकि अब लिस्ट जारी होने से साफ हो गया है कि दोनों के प्रतिनिधियों का नाम काट दिया गया है।
दोनों देशों में हथियार के बल पर सत्ता
म्यांमार में 1 फरवरी 2021 को सेना ने तख्तापलट कर दिया। साथ ही देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची समेत कई नेताओं को गिरफ्तार कर सत्ता अपने हाथ में ले ली। तब से वहां की जनता सैन्य शासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। जिसमें सैकड़ों नागरिकों की जान भी गई। वहीं अमेरिका की वापसी के बाद हथियारों के दम पर तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबूल पर कब्जा कर लिया। जिसके बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए और वहां पर तालिबान ने सरकार का ऐलान कर दिया।












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