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तालिबान की जीत पर निकले अफगान कमांडर के आंसू, बाइडेन-गनी को बताया धोखेबाज, बताई हार की पूरी कहानी

अफगान सेना के बड़े हिस्से का नेतृत्व करने वाले जनरल सामी सादत ने कहा कि टॉप लीडरशिप ने सेना का मनोबल तोड़ दिया था और इस हार के लिए बाइडेन और अशरफ गनी जिम्मेदार हैं।

काबुल, अगस्त 26: अफगानिस्तान के एक कमांडर ने अफगानिस्तान में हार के पीछे अमेरिका को जिम्मेदार बताया है। इसके साथ ही अफगान कमांडर ने जो बाइडेन के उस बयान की भी निंदा की है, जिसमें उन्होंने अफगान सेना को डरपोक करार दिया था। 15 हजार सैनिकों का नेतृत्व करने वाले अफगान कमांडर ने कहा है कि जो बाइडेन ने अफगानिस्तान की सेना का अनादर किया है और अगर अफगानिस्तान में उनके देश की सेना हारी है तो उसके पीछे अमेरिका की बेवफाई है।

अफगान कमांडर का आरोप

अफगान कमांडर का आरोप

एक अफगान सेना कमांडर ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन पर यह कहने के लिए 'अनादर और बेवफाई' का आरोप लगाया कि उनके सैनिकों ने तालिबान के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी। बुधवार को प्रकाशित एक धमाकेदार लेख में अफगान कमांडर ने अमेरिका की पोल खोलते हुए कहा कि 'अफगानिस्तान युद्ध का फैसला तभी हो गया था जब अमेरिका ने अफगानिस्तान से निकलने की आखिरी तारीख तय कर दी थी'। सामी सादत नाम के अफगानिस्तान सेना के बड़े कमांडर ने बताया कि वो अफगान सेना में 'थ्री स्टार जनरल' थे और दक्षिण-पश्चिमी अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ लड़के हुए उन्होंने अपने सैकड़ों अधिकारियों को अपनी आंखों के सामने मरते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि अफगान युद्ध में उन्होंने 15 हजार अफगान सैनिकों का नेतृत्व किया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखा विस्फोटक आर्टिकिल

न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखा विस्फोटक आर्टिकिल

अफगान सेना के बड़े हिस्से का नेतृत्व करने वाले जनरल सामी सादत ने कहा कि, 'यह सच है कि अफगान सेना ने लड़ने की इच्छा खो दी थी।'' उन्होंने लिखा कि, 'लेकिन ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिका लगातार बाहर निकल रहा था, राजनीतिक सपोर्ट मिलना बंद हो चुका था, अफगान सेना को कोई देखने वाला नहीं था, खाने-पानी तक की सुविधाएं नहीं थीं और अंतिम महीनों में अमेरिका के राष्ट्रपति ने अफगान सेना का अपमान करना शुरू कर दिया था और अमेरिका की तरफ से अफगान सेना के साथ बेवफाई की गई''। इसके साथ ही सामी सादत ने कहा कि 'ऐसा नहीं है कि अफगान सेना की गलतियां नहीं है। अफगान सेना में भी कई कमियां थीं। यहां भी क्रोनिज्म, नौकरशाही थी, लेकिन अंत में हमने लड़ना बंद कर दिया था, क्योंकि हमारे पार्टनर्स ने भी लड़ना बंद कर दिया था।'

बेतुका आरोप लगा रहे हैं बाइडेन

बेतुका आरोप लगा रहे हैं बाइडेन

अफगान सेना के कमांडर ने अपने लेख में कहा कि ''मुझे यह देखकर दुख होता है कि जो बाइडेन और पश्चिमी देशों के सैन्य अधिकारी बिना कारणों को बताए अफगान सेना पर सरेंडर करने का आरोप लगा रहे हैं''। उन्होंने कहा कि पिछले 20 सालों में अफगानिस्तान सेना ने 66 हजार जवानों को गंवाया है। अफगान सेना के कमांडर ने कहा कि, देश के नेता 'सौदेबाजी' कर सके, क्योंकि अफगान सेना लगातार लड़ रही थी और अपनी जान गंवा रही थी। फिर भी काबुल हार के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति कहते हैं कि अफगानिस्तान सेना ढह गई, बिना लड़े अफगानिस्तान सेना हार गई, जबकि ये गलत आरोप है। अफगान सेना के कमांडर ने कहा कि 'हम आखिरी वक्त तक लड़े और हमने अपने सैन्य शक्ति का पांचवां हिस्सा गंवा दिया। हमने 66 हजार सैनिकों को युद्ध में खोया है। हजारों अफसर मारे गये'। उन्होंने कहा कि, पश्चिमी देशों के कुछ नेताओं ने भी इस बात पर आश्चर्य जताया कि जो बाइडेन बार बार अफगान सेना पर दोष मढ़ रहे थे.

यूएस फौज ने लड़ना बंद किया

यूएस फौज ने लड़ना बंद किया

अफगान कमांडर ने कहा कि 'जो बाइडेन ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान में नहीं लड़ना चाहिए, उन्हें अफगानिस्तान में जान नहीं देना चाहिए, जान देने का काम अफगानिस्तान के सैनिकों का है। उनके इस बयान के बाद अमेरिकन सैनिकों ने लड़ना बंद कर दिया, जो बाइडेन के बयान ने उन अमेरिकी सैनिकों को भी गुस्से में भर दिया था, जिन्होंने अफगान सैनिकों को ट्रेन किया था'। अफगान कमांडर ने कहा कि 'अफगानिस्तान की सेना गर्व के साथ लड़ी और अगर किसी की हार हुई है तो वो काबुल और वॉशिंगटन के नेताओं की हार हुई है, क्योंकि दोनों जगहों के राजनेताओं की गलती थी'।

भ्रष्ट थी अशरफ गनी-ट्रंप की सरकार

भ्रष्ट थी अशरफ गनी-ट्रंप की सरकार

अफगानिस्तान सेना के कमांडर सामी सादत ने कहा कि 'अफगानिस्तान में अशरफ गनी की सरकार और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने भारी भ्रष्टाचार किए'। अफगान सेना के कमांडर ने लेख में लिखा है कि 'सबसे पहले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तालिबान के बीच दोहा समझौते ने अफगानिस्तान को बर्बाद कर दिया और इसके साथ ही ये साबित हो गया था कि अब अफगानिस्तान में अमेरिका का मतलब नहीं रह गया है। फिर भी हम लड़ते रहे। लेकिन फिर अप्रैल महीने में जो बाइडेन ने डोनाल्ड ट्रंप की बातों पर मुहक लगा दी और अमेरिकी सैनिकों के लौटने की आखिरी तारीख तय कर दी।' कमांडर ने लेख में लिखा है कि, 'जो बाइडेन ने ये फैसला उस वक्त लिया, जब लगातार उन्हें अफगानिस्तान की स्थिति के बारे में बताया जा रहा था।' कमांडर मे लिखा है कि, 'उन्होंने अमेरिकी वायुसेना का साथ खो दिया'।

अफगानिस्तान में क्या हो रहा था?

अफगानिस्तान में क्या हो रहा था?

अफगान सेना के कमांडर ने अपने लेख में लिखा है कि 'अप्रैल महीने तक 17 हजार अमेरिकी कॉन्ट्रैक्टर अफगानिस्तान छोड़कर जा चुके थए और अमेरिकी वायु सेना के ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और सी-130 विमानें खराब गो गईं थीं। लेकिन, ठेकेदार अपने साथ मालिकाना सॉफ्टवेयर और हथियारों का वो सिस्टम भी लेकर चले गये, जिनसे ये हेलीकॉप्टर ठीक हो पाते।'' अफगान कमांडर ने सनसनीखे खुलासा करते हुए लिखा है कि, 'उन्होंने हमारे हेलीकॉप्टर मिसाइल-डिफेंस सिस्टम को फिजिकली हटा दिया था। अपने वाहनों, हथियारों और जवानों को ट्रैक करने के लिए जिस सॉफ़्टवेयर पर हम भरोसा करते थे, उसे भी अमेरिकी ठेकेदार लेकर चले गये थे, रीयल टाइम इंटेलीजेंस सिस्टम भी अमेरिका ले जा चुका था। और हमारे पास लड़ने का कोई संसाधन नहीं बचा था''। कमांडर ने साफ तौर पर लिखा है कि सिर्फ अफगान सेना को हार का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है और ये सामूहिक हार है।

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