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पाकिस्तान को परमाणु शक्ति बनाने वाले वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कादिर खान का है भोपाल से कनेक्शन

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नई दिल्ली/इस्लामाबाद, अक्टूबर 10: उनका परिवार हिंदुस्तान को छोड़कर पाकिस्तान नहीं जाना चाहता था, लेकिन नियत को कुछ और ही मंजूर था। पाकिस्तान को परमाणु संपन्न बनाने वाले प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कादिर का निधन हो गया है। वो 85 वर्ष के थे, लेकिन उनकी जिंदगी की जड़ें भारत के भोपाल शहर से जुड़ी हुई हैं। आईये जानते हैं कि डॉ. अब्दुल कादिर का परिवार कैसे पाकिस्तान गया और उन्होंने पाकिस्तान को न्यूक्लियर ताकत से संपन्न देश कैसे बनाया?

भारत में हुआ था जन्म

भारत में हुआ था जन्म

डॉ. अब्दुल कादिर का जन्म 1935 में भारत के मध्यप्रदेश के भोपाल में हुआ था और 1947 में भारत का बंटवारा गया। एक नया मुल्क बना पाकिस्तान। भारत के बंटवारे के बाद लाखों मुस्लिम परिवार इस्लामिक देश पाकिस्तान चले गये और वहां से हजारों-लाखों हिंदू और सिख भारत आ गये। डॉ. अब्दुल कादिर अगर पाकिस्तान नहीं गये होते, तो क्या पता वो भारत में ही एक महान वैज्ञानिक बन जाते, जैसे डॉ. अब्दुल कलाम बने थे, लेकिन तकदीर ने कुछ और सोच रखा था। सबसे दिलचस्प बात ये है कि, डॉ. अब्दुल कादिर और भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक भारत रत्न एपीजे अब्दुल कलाम के बीच काफी समानताएं रही हैं।

अब्दुल कलाम से समानताएं

अब्दुल कलाम से समानताएं

डॉ. अब्दुल कादिर और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, दोनों मुस्लिम थे और दोनों का ही जन्म भारत में हुआ था और दोनों ही वैज्ञानिकों का संबंध अपने अपने देश के परमाणु कार्यक्रम से रहा और दोनों ही वैज्ञानिक अपने अपने देश में हीरो रहे हैं। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को हर भारतवाशी अपना गर्व बताता है और हर पाकिस्तानी की नजर में डॉ. अब्दुल कादिर भी हीरो हैं। इन दोनों वैज्ञानिकों ने अपने अपने देश के लिए लंबी दूरी की मिसाइलें बनाईं। लेकिन, बस इतना तक ही दोनों में समानताएं हैं। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को जहां पूरी दुनिया में इज्जत दिया जाता है, वहीं डॉ. अब्दुल कादिर पर कई खतरनाक आरोप लगे।

डॉ. अब्दुल कादिर पर आरोप

डॉ. अब्दुल कादिर पर आरोप

डॉ. अब्दुल कादिर पर सबसे बड़ा आरोप था पाकिस्तान के लिए जासूसी करना और टेक्नोलॉजी की चोरी करना। भोपाल में जन्म लेने वाले डॉ. अब्दुल कादिर के पिता एक स्कूल मास्टर थे और वो 6 भाई-बहन थे। जब अब्दुल कादिर 16 साल के हुए, तब उनका परिवार भारत छोड़कर पाकिस्तान चला गया। डॉ. अब्दुल कादिर ने पाकिस्तान के कराची यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की शिक्षा ली और फिर उन्होंने छोटी-मोटी नौकरियां करनी शुरू कर दी।

जर्मनी में पढ़ाई के दौरान बदला रास्ता

जर्मनी में पढ़ाई के दौरान बदला रास्ता

डॉ. अब्दुल कादिर काफी मेधावी छात्र थे और पाकिस्तान में छोटी-मोटी नौकरियां करने के दौरान जब उनका दिल नहीं लगा, तो वो मास्टर्स की डिग्री करने जर्मनी चले गये और फिर उन्होंने वहां पर मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की शिक्षा हासिल की। इसी बीच उन्होंने साउथ अफ्रीका मूल की एक डच लड़की से शादी की और आगे की पढ़ाई बेल्जियम में रहते हुए पूरी की। साल 1972 में डॉ. अब्दुल कादिर अपनी पत्नी हेनी के साथ एम्सटरडैम शिफ्ट हो गये, जहां उन्होंने यूरोपियन यूरेनियम एनरिचमेंट सेंट्रीफ्यूज कॉरपोरेशन में काम करना शुरू कर दिया, लेकिन इस बीच पाकिस्तान की भारत से 1971 में बुरी तरह से हार हो गई थी और पाकिस्तान का बंटवारा हो चुका था। हारे हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को शिमला समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

1974 में भारत ने किया परमाणु परीक्षण

1974 में भारत ने किया परमाणु परीक्षण

साल 1974 में भारत ने पहली बार न्यूक्लियर टेस्ट किया था, जिसने पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो अब किसी भी तरह से पाकिस्तान को परमाणु संपन्न देश बनाने की कोशिश करने लगे। पाकिस्तान की सरकार एक ऐसे वैज्ञानिक की तलाश में थी, जो देश को परमाणु बम बनाकर दे और पाकिस्तान सरकार की तलाश डॉ. अब्दुल कादिर के साथ खत्म हुई। डॉ. अब्दुल कादिर वापस पाकिस्तान आ गये। गार्डियन कोरिया, जिन्होंने 'शॉपिंग फॉर बॉम्ब्स: न्यूक्लियर प्रोलिफरेशन, ग्लोबल इन्सेकयोरिटी एंड द राइज एंड फॉल ऑफ द एक्यू खान नेटवर्क' नाम की किताब लिखी है, उन्होंने डॉ. अब्दुल कादिर को लेकर काफी अहम बातें बताईं थीं।

पाकिस्तान की हार से लगा था सदम

पाकिस्तान की हार से लगा था सदम

गार्डियन कोरिया ने अपनी किताब में लिखा था कि 1971 में भारत के हाथों हारने के बाद डॉ. अब्दुल कादिर को काफी गहरा धक्का लगा था और जब उन्होंने ढाका में भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान के करीब एक लाख सैनिकों को आत्मसमर्पण करते हुए देखा, तो उन्होंने फैसला कर लिया, कि वो किसी भी हालत में पाकिस्तान को न्यूक्लियर स्टेट बनाकर ही दम लेंगे। जिसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टों से परमाणु बम बनाने को लेकर बात की और भुट्टो के कहने पर वो पाकिस्तान को न्यूक्लियर राष्ट्र बनाने के मिशन पर लग गये।

विदेशों में करने लगे जासूसी

विदेशों में करने लगे जासूसी

डॉ. अब्दुल कादिर एक अच्छे वैज्ञानिक थे, लेकिन ना वो परमाणु बम बनाना जानते थे और ना ही पाकिस्तान के पास परमाणु बम बनाने के संसाधन थे। पाकिस्तान की टेक्नोलॉजी भी काफी कमजोर थी और फिर उन्होंने जासूसी का काम शुरू कर दिया। वो लगातार यूरेनियम चुराने की कोशिश में लगे रहते थे और फिर यूरेनको में काम करने के दौरान उन्होंने बम बनाने लायक यूरेनियम के लिए सेंट्रीफ्यूज प्लान चुराने में सफलता हासिल कर ली। संयोग से डॉ. अब्दुल कादिर को यूरेनको में उस अतिगोपनीय स्थान पर जाने का मौका मिल गया, जहां बम बनाने के लिए डिजाइन और तमाम टेक्नोलॉजी मौजूद था। 1974 में उन्होंने यूरेनको में उस गोपनीय स्थान पर 16 दिन बिताए और प्लान की चोरी कर ली।

गंभीरता से नहीं लिया गया

गंभीरता से नहीं लिया गया

डॉ. अब्दुल कादिर को सेंट्रीफ्यूज टेक्नोलॉजी से जुड़ी रिपोर्ट्स को डच भाषा में ट्रांसलेट करने की जिम्मेदारी दी गई थी और उन 16 दिनों में उन्होंने लगातार टेक्नोलॉजी की चोरी में बिता दिए। जब एक साथी ने उसने ट्रांसलेशन के बारे में पूछा था, तो उन्होंने कहा था कि, वो पाकिस्तान अपने घरवालों को चिट्ठी लिख रहे हैं। कई और साथियों ने उन्हें हाथ में डायरी लेकर कुछ लिखते देखा था, लेकिन उस वक्त किसी ने भी उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन, जब कुछ सालों के बाद खुलासा हुआ कि उन्होंने टेक्नोलॉजी की चोरी की है, तबतब वो वापस पाकिस्तान आ चुके थे। डच की खुफिया टीम की जांच में हालांकि कुछ हाथ तो नहीं लगा, लेकिन इतना पता चल गया था कि उन्होंने पाकिस्तान के लिए जासूसी की थी और उन्हें पूरी प्लानिंग के साथ नीदरलैंड भेजा गया था।

आखिरकार बना लिया एटम बम

आखिरकार बना लिया एटम बम

डॉ. अब्दुल कादिर ने ईरान और विदेशों में अपनी पहचान का इस्तेमाल करते हुए आखिरकार पाकिस्तान को न्यूक्लियर राष्ट्र बना ही दिया। लेकिन, इसके साथ ही उन्होंने परमाणु बम का इस्लामीकरण भी कर दिया। 1984 में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि ''पश्चिमी देशों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक इस्लामिक देश एटम बन बना सकता है और यही बात पश्चिमी देशों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। पाकिस्तान ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया है और वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि एक मुस्लिम देश एटम बम से संपन्न राष्ट्र है।'' बताया जाता है कि उनका निशाना अमेरिका और भारत की तरफ था। उन्हें पाकिस्तान में इस्लामिक बम का जनक भी कहा जाता है।

डॉ. अब्दुल कादिर की अकूत संपत्ति

डॉ. अब्दुल कादिर की अकूत संपत्ति

डॉ. अब्दुल कादिर ने भले ही पाकिस्तान को परमाणु संपन्न देश बना दिया हो, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपने लिए अकूत संपत्ति भी जोड़ ली।डॉ. अब्दुल कादिर बुलेट प्रूफ गाड़ियों में ही घर से बाहर निकलते थे और उनका स्टाइल पश्चिमी देशों की तरह ही था। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के बेहद पॉश इलाके मारगला हिल्स में उनका आलीशान कोठी है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये है। इसके साथ ही उनके तीन और बंगले इस्लामाबाद में अलग अलग जगहों पर हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान में फाइट स्टार होटलों में भी उनकी साझेदारी थी। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. अब्दुल कादिर ने अपनी पत्नी के नाम पर टिंबकटू में एक फाइव स्टार होटल बनवाया था और पाकिस्तान के बाहर के बैंकों में भी उनके अरबों रुपये जमा हैं। कहा जाता है कि ये तमाम पैसे उन्होंने तब बनाए, जब वो पाकिस्तान के लिए परमाणु बम बना रहे थे और पाकिस्तान की सरकार बम बनाने के लिए अथाह पैसे खर्च कर रही थी।

पाकिस्तान के 'परमाणु जनक' डॉ. अब्दुल कादिर खान का निधन, इमरान ने अंतिम वक्त में भी किया अपमानपाकिस्तान के 'परमाणु जनक' डॉ. अब्दुल कादिर खान का निधन, इमरान ने अंतिम वक्त में भी किया अपमान

English summary
Let us know how scientist Dr. Abdul Qadir Khan made Pakistan a nuclear-rich nation and what is his connection with Bhopal.
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