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रावत के बयान पर पाकिस्तानी और चीनी मीडिया की तीखी प्रतिक्रिया

By Bbc Hindi

बिपिन रावत
Getty Images
बिपिन रावत

भारत के आर्मी प्रमुख जनरल बिपिन रावत के उस बयान को चीनी मीडिया में काफ़ी तवज्जो मिली है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और चीन के बीच उत्तरी सीमा पर संघर्ष हुआ तो पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान फ़ायदा उठा सकता है.

जनरल रावत ने कहा था कि भारत को दो मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए.

आर्मी प्रमुख के इस बयान पर गुरुवार को चीन के विदेश मंत्रालय की भी प्रतिक्रिया आई थी. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह इस बयान को लेकर स्पष्ट नहीं है कि वह जनरल रावत का निजी बयान है या भारत भी आधिकारिक रूप से यही सोचता है. शुक्रवार को चीनी मीडिया में भी जनरल रावत का बयान सुर्खियों में रहा.

इस मामले में चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''चीन और भारत की तरफ़ से डोकलाम सीमा पर गतिरोध ख़त्म किए जाने के बाद जनरल रावत का यह बयान आया है. ब्रिक्स सम्मेलन में दोनों देशों के नेताओं ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए संयम और शांति के साथ द्विपक्षीय संबंध की बात कही थी.''

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ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है, ''हर कोई यही सोच रहा था कि डोकलाम गतिरोध को पीछे छोड़ आगे बढ़ जाना चाहिए, लेकिन रावत ने बिल्कुल इसके उलट बयान दिया है. जून में जब डोकलाम सीमा पर गतिरोध शुरू हुआ था तब बिपिन रावत ने कहा था कि भारतीय सेना ढाई मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार है. उन्होंने ढाई मोर्चों की बात चीन, पाकिस्तान और भारत के भीतर सक्रिय विद्रोही समूहों के संदर्भ में कही थी.''

ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है, ''चीन और भारत के बीच शत्रुता के माहौल में रावत का बड़बोलापन आग में घी का काम करेगा. रावत न केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों की उपेक्षा कर रहे हैं बल्कि भारतीय सेना के घमंड को भी हवा दे रहे हैं. वह ढाई मोर्चों पर युद्ध की बात कर रहे हैं लेकिन भारतीय आर्मी में इतना आत्मविश्वास आता कहां से है?''

ग्लोबल टाइम्स ने जनरल रावत पर हमला बोलते हुए लिखा है, ''भारत के जनरलों को वर्तमान हालात के बारे में कुछ बुनियादी ज्ञान रखने की ज़रूरत है. क्या एक साथ चीन और पाकिस्तान दोनों से युद्ध का सामना भारत कर लेगा?''

भारत-चीन
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भारत-चीन

बिपिन रावत के बयान को साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने भी काफ़ी तवज्जो दी है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने लिखा है, ''1962 में अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच युद्ध हो चुका है. पिछले महीने ही दोनों देशों की सेना भूटान में डोकलाम सीमा पर आमने-सामने थी. 10 हफ़्तों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव ख़त्म हुआ है.''

भारत, पाकिस्तान और चीन तीनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं. बिपिन रावत ने कहा था कि परमाणु हथियारों को प्रतिरोधक क्षमता के रूप में देखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि जिन देशों के पास परमाणु हथियार होते हैं उनसे लड़ना भारी विनाशकारी होता है. इस डर के कारण देश युद्ध से बचते हैं.

हालांकि जनरल रावत ने कहा है कि भारत के संदर्भ में इन हथियारों के होने की वजह से युद्ध को टाला जा सकता है, यह पूरी तरह से सही नहीं है.

भारत-चीन
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जनरल रावत के बयान को पाकिस्तानी मीडिया में भी काफ़ी जगह मिली है. वहां के प्रमुख अख़बार डॉन ने लिखा है, ''रावत का मानना है कि चीन सीमा पर अपनी ताक़त हमेशा से दिखाता रहा है ऐसे में भारत को तैयार रहने की ज़रूरत है. जनरल रावत का मानना है कि भारत और पाकिस्तान उलझते हैं तो पाकिस्तान इसका फ़ायदा उठा सकता है. उन्होंने कहा कि युद्ध में सेना अकेले नहीं जाती है बल्कि देशों के बीच होता है और इसी हिसाब से तैयारी होनी चाहिए.''

प्रमुख पाकिस्तानी अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इस मामले में लिखा है, ''भारत और चीन में मतभेदों की कमी नहीं है. भारत हमेशा से पाकिस्तान और चीन के संबंधों को शक की नज़र से देखता रहा है. भारत ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस आमंत्रण को भी ठुकरा दिया था जिसमें उन्होंने वन बेल्ट वन रोड में भारत को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था.''

BBC Hindi
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English summary
A strong reaction from China and Pakistan media on the statement of army chief General Bipin Rawat.
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