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रोई, गुनगुनाईं... 92 साल की भारतीय महिला जब 75 साल बाद पहुंची पाकिस्तान, ऐसा मिला पुश्तैनी घर

पाकिस्तानी मीडिया से बात करते हुए रीना ने कहा कि, 'जब वह छोटी थीं तो बालकनी पर खड़ी होकर गुनगुनाती थी'।

रावलपिंडी, जुलाई 21: 75 साल बाद पाकिस्तान पहुंची भारतीय महिला का रावलपिंडी में भव्य स्वागत किया गया है और 92 साल की रीना वर्मा अपनी पुश्तैनी घर देखकर रो पड़ीं। 92 साल की महिला रीना छिब्बर तीन महीने के वीजे पर पाकिस्तान पहुंची हैं और वहां पर उनका खुले दिल से स्वागत किया जा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब 92 साल की महिला रीना अपने पैतृक घर पहुंची, तो उनके आंसू रूकने का नाम नहीं ले रहे थे।

75 साल बाद पहुंची हैं पाकिस्तान

75 साल बाद पहुंची हैं पाकिस्तान

रीना छिब्बर जब रावलपिंडी के डीएवी कॉलेज रोड स्थित प्रेम निवास महल स्थित अपने पैतृक घर पहुंची, तो छिब्बर के दशकों पुराने पड़ोसियों ने गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर उनका स्वागत किया। जिसे देखकर रीना वर्मा काफी ज्यादा भावुक हो गईं और उन्होंने ढोल की थाप पर वहां नृत्य भी किया। साल 1947 में जब भारत का बंटवारा हुआ, उस वक्त रीना वर्मा महज 15 साल की थीं और बंटवारे के बाद उन्हें अपना पुश्तैनी घर छोड़कर अपने परिवार के साथ पाकिस्तान से भारत आना पड़ा। जिसके बाद रीना वर्मा फिर से अपनी पुश्तैनी घर देखना चाह रही थीं, लेकिन उनका वीजा बार बार कैंसिल कर दिया जा रहा था। जिसके बाद पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हीना रब्बानी खार ने उन्हें वीजा दिलाने में मदद की। रीना वर्मा एक दिन पहले पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थिति अपने पुश्तैनी घर पहुंची हैं।

कैसा है रीना का पुश्तैनी घर

कैसा है रीना का पुश्तैनी घर

पुश्तैनी घर प्रेम निवास पहुंचने के बाद वो अपनी पड़ोसियों के साथ अपने घर के हर कमरे में गईं और 75 बरस पहले का अहसास ताजा किया। अपने पुश्तैनी घर पहुंचने के बाद वो घर की हर बालकनी पर खड़ी होतीं थी, खुशी से गीत गाती थीं और बचपन की यादों को ताजा कर उनकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। वहीं, द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, जब रीना वर्मा अपने पुश्तैनी घर जा रहीं थी, तो वहां पर उनके स्वागत की तैयारियां की जा रही थी और पड़ोसियों ने ढोल बजाकर और फूलों की बारिश कर उनका स्वागत किया। जन्मस्थान पर लौटने के बाद आस-पड़ोस के लोगों ने रीना का गर्मजोशी से स्वागत किया।

'हमें एक साथ रहना चाहिए'

'हमें एक साथ रहना चाहिए'

रीना छिब्बर ने कहा कि, उन्हें नहीं लगता कि वह किसी दूसरे देश से हैं। उन्होंने कहा, "सीमा के दोनों किनारों पर रहने वाले लोग एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और हमें एक रहना चाहिए।" घर में घुसकर उन्होंने सभी कमरों को अंदर जाकर देखा। उन्होंने कहा कि, वह 15 साल की थी, जब वह अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भारत चली गई। वह काफी देर तक अपने बेडरूम, यार्ड और बैठने के कमरे सहित घर के दरवाजे और दीवार को देखती रही। उन्होंने उन दिनों अपने जीवन के बारे में बात की। रीना ने 75 साल पहले रावलपिंडी के नक़्शे के बारे में मोहल्ले के लोगों को बताया।

बचपन की यादों को किया ताजा

पाकिस्तानी मीडिया से बात करते हुए रीना ने कहा कि, 'जब वह छोटी थीं तो बालकनी पर खड़ी होकर गुनगुनाती थी'। अपने बचपन की याद ताजा करने के लिए उन्होंने वही 75 साल पुराना गाना गाया और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि, घर की यादें उन्हें हमेशा से आती रहती थी और "मैं आज भी खुद को यहाँ देख सकती हूं," उन्होंने कहा कि, उस समय वहां रहने वाले पड़ोसी बहुत अच्छे थे। जब किसी की शादी होती थी, तो गली के सभी बच्चे वहां दौड़-भाग करते रहते थे, उधम मचाते रहते थे और हर तरफ खुशियां छा जाती थीं। उन्होंने कहा कि, अब एक बार फिर से दिल पाकिस्तान और भारत के बीच की नफरत को दूर कर, फिर से साथ रहने की चाहत रखता है। उन्होंने कहा कि, "उस समय जब हम चले गए तो हर कोई दुखी था। पड़ोसियों को घर का सदस्य माना जाता था और हम सबके घर जाते थे। वे बहुत अच्छे दिन थे और वो ये नहीं जानते थे, कि यहां से जाकर हम कहां जाएंगे?'

पुश्तैनी घर में रहते हैं पड़ोसियों के पोते

पुश्तैनी घर में रहते हैं पड़ोसियों के पोते

छिब्बर ने कहा कि, उनकी उम्र के सभी लोगों की मौत हो चुकी है। उनके पुराने पड़ोसियों के पोते अब उस घर में रहते हैं, जहां वह और उनका परिवार रहता था। लेकिन दीवार आज भी नहीं बदली गई है। रीना वर्मा छिब्बर ने भी घर में एक कोठरी की ओर इशारा किया और कहा कि, वह वहां किताबें रखती थी। उन्होंने कहा कि, "मैं विभाजन के समय भारत चली आई थी"। उन्होंने कहा कि, 'वह अपने घर या गली को कभी नहीं भूलीं। दोस्तों और यहां का खाना अभी भी मेरे दिमाग में ताज़ा है। आज भी इन गलियों की महक पुरानी यादें ताजा कर देती है। मैंने सोचा भी नहीं था कि जिंदगी में कभी यहां वापस आऊंगा। हमारी संस्कृति एक है। हम वही लोग हैं। हम सब एक दूसरे से मिलना चाहते हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने मुझे ढूंढा और वीजा दिया, जिसके बाद मैं वाघा सीमा के रास्ते रावलपिंडी पहुंची'। उन्होंने कहा कि, बंटवारे से पहले पड़ोस में कोई मुस्लिम या सिख नहीं रहता था। "सभी हिंदू यहाँ रहते थे। मैं पाकिस्तान से बहुत प्यार करती हूं और बार-बार पाकिस्तान आना चाहती हूं।"

हीना रब्बानी ने दिलाया वीजा

हीना रब्बानी ने दिलाया वीजा

भारत में पाकिस्तान उच्चायोग ने सद्भावना भाव में, रीना वर्मा को तीन महीने का वीजा जारी किया है। रीना वर्मा ने 1965 में पाकिस्तानी वीजा के लिए आवेदन किया था, लेकिन उस वक्त दोनों देशों के बीच स्थिति काफी तनावपूर्ण थी, लिहाजा रीना वर्मा का वीजा कैंसिल कर दिया गया था। वहीं, उन्होंने पिछले साल सोशल मीडिया पर अपने पैतृक घर जाने की इच्छा जाहिर की थी। जिसके बाद पाकिस्तान के रहने वाले एक नागरिक सज्जाद हैदर ने सोशल मीडिया पर उनसे संपर्क किया और रावलपिंडी में उनके घर की तस्वीरें भेजीं। हाल ही में, रीना वर्मा ने एक बार फिर से पाकिस्तानी वीजा के लिए आवेदन किया था, जिसे फिर से अस्वीकार कर दिया गया था। जिसके बाद उन्होंने पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हीना रब्बानी खार को ट्वीटर पर टैग करते हुए उनसे पाकिस्तान जाने की ख्वाहिश जताई और वीजा स्वीकार करने का अनुरोध किया। जिसके बाद फिर हिना रब्बानी ने उनके लिए वीजा की व्यवस्था कर दी।

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