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मौसम की वजह से साल 2018 में 10,000 से ज्‍यादा मौतें, भारत पर भी पड़ा सबसे ज्‍यादा असर

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जेनेवा। यूनाइटेड नेशंस (यूएन) ने कहा है साल 2018 में दुनिया ने मौसम की सबसे ज्‍यादा मार झेली। वहीं मौसम की वजह से प्रभावित होने वाले देशों में भारत का नंबर दूसरा रहा। यूएन के ऑफिस फॉर डिजास्‍टर रिस्‍क रिडक्‍शन (यूएनआईएसडीआर) की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौसम की वजह से प्राकृतिक हालातों में होने वाले परिवर्तनों की वजह से दुनिया के 61.7 मिलियन लोगों पर खासा असर पड़ा। यह रिपोर्ट क्‍लाइमेट चेंज पर एक बड़ी रिपोर्ट मानी जा रही है और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आज दुनिया ने सबक नहीं लिया तो फिर आगे परिस्थितियां काफी बिगड़ सकती हैं।

सुनामी और भूकंप से दहली दुनिया

सुनामी और भूकंप से दहली दुनिया

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष भूकंप और सुनामी जैसी खतरनाक प्राकृतिक आपदाओं में 10,373 लोगों की मौत हुई है। वहीं अगर बात भारत की करें तो भारत में साल 2018 में सबसे ज्‍यादा मौतें हुईं। देश में 1388 लोगों की मौत की वजह मौसम में सीमा से बाहर होने वाले परिवर्तन रहे। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एपिडेमियोलॉजी ऑफ डिजास्‍टर (क्रेड) की ओर 281 ऐसे परिवर्तन दर्ज किए गए जिनकी वजह से मौसम था। गुरुवार को यूएन की एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में यह जानकारियां दी गई हैं।

दुनिया में कहीं सूखा तो कहीं बाढ़

दुनिया में कहीं सूखा तो कहीं बाढ़

यूएन की विशेष प्रतिनिधि मामी मिजुटोरी ने बताया है कि दुनिया का कोई भी हिस्‍सा पिछले वर्ष मौसम की मार से नहीं बचा है। उन्‍होंने बताया कि बाढ़, सूखा, तूफान और जंगलों में लगी आग से 57.3 मिलियन लोग प्रभावित हुए। उन्‍होंने इस बात की तरफ ध्‍यान दिलाया कि अगर हमें आपदाओं की वजह से होने वाले नुकसान को कम करना है तो फिर हमें इसके खतरे को कम करने के तरीके को बेहतर करना होगा।भारत के 23.9 मिलियन लोगों पर मौसम की मार पड़ी तो वहीं फिलीपींस के 6.5 मिलियन लोग और चीन के 6.5 मिलियन लोग इसकी वजह से प्रभावित हुए।

लगातार गर्म हो रही है धरती

लगातार गर्म हो रही है धरती

जो देश सबसे ज्‍यादा प्रभावित हुए उनमें सबसे पहला नंबर इंडोनेशिया का है जहां पर 4,535 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा ग्‍वाटेमाला में 427, जापान में 419 और चीन में 341 लोगों के मृत्‍यु की वजह मौसम बना। यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्‍लोबल वॉर्मिंग बढ़ती जा रही है और तापमान 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड या फिर दो डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ गया है। मामी ने बताया कि यूएन क्‍लाइमेट चेंज पर तेजी से सक्रिय है और ऐसे तरीकों को अपना रहा है जिनके बाद शहरों पर आपदा का खतरा कम हो सके। इन उपायों के तहत धरती की सही प्रयोग, मजबूत योजना तैयार करना, कोड्स तैयार करना, इको-सिस्‍टम को सुरक्षित करने वाले उपायों को अपनाना, गरीबी दूर करना और साथ ही समुद्र के बढ़ते स्‍तर को कम करने के भी उपाय शामिल हैं।

सुधार की गुंजाइश

सुधार की गुंजाइश

साल 2000 से 2017 तक मौसम की वजह से 77,144 मौतें हुई थीं। इस दौरान साल 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी, साल 2008 में आया तूफान नरगिस और साल 2010 में हैती में आया भूकंप जैसी खतरनाक आपदाएं शामिल हैं। साल 2018 में कोई बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना दुनिया ने नहीं किया लेकिन इसके बाद भी प्रकृति की वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। लेकिन बेहतर मानकों और रिस्‍क मैनेजमेंट की वजह से इसमें सुधार आने की उम्‍मीद है।

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English summary
61 million people affected by extreme weather events in 2018 and India too is most affected, UN has said in its report.
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