जाग उठे 48000 साल पुराने वायरस, साइबेरिया की बर्फ से निकाले गए खतरनाक मेगावायरस
Siberian permafrost, वैज्ञानिकों ने बर्फ में हजारों साल से दबे वायरस को पुनर्जीवित किया है, जो हिम युग के बाद से साइबेरियाई पर्माफ्रॉस्ट में बंद थे। हाल ही में साइंटिस्ट्स ने हजारों वर्षों से साइबेरियाई पर्माफ्रॉस्ट में जमे हुए सात प्रकार के वायरस को पुनर्जीवित किया गया है। जिन्हे लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। रूसी सुदूर पूर्व में एकत्र किए गए नमूनों से पांच अलग-अलग क्लैड से संबंधित 13 वायरस की पहचान की। इनमें से एक मेगावायरस खतरनाक बताया जा रहा है।

खतरे से पहले अगाह हो जाएगी दुनिया
वैज्ञानिकों की इस खोज को लेकर थोड़ा डर का भी माहौल है, लेकिन साइंटिस्टों का कहना है कि, जब हम पर्माफ्रॉस्ट और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों पर विचार करते हैं तो इस तरह के खतरों को लेना जरूरी है। ताकि बर्फ पिछलने के बाद भविष्य में सामने आए वायरसों से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाई जाए सके। हजारों वर्षों से साइबेरियाई पर्माफ्रॉस्ट में जमे इन वायरसों में सबसे युवा 27000 वर्षों से जमे हुए थे, जबकि सबसे पुराना 48500 वर्षों तक बर्फ पर था।

48,500 साल पुराना वायरस पुनर्जीवित
पर्माफ्रॉस्ट नमूने से एक पुनर्जीवित वायरस, जो लगभग 48,500 साल पुराना था। वहीं मैमथ (विलुप्त जीव) पॉटी के 27000 साल पुराने नमूने और बड़ी मात्रा में मैमथ ऊन से भरे पर्माफ्रॉस्ट के एक टुकड़े से तीन नए वायरस को भी पुनर्जीवित किया गया है। वैज्ञानिकों ने इनका नाम पिथोवायरस मैमथ, पेंडोरा वायरस मैमथ और मेगा वायरस मैमथ रखा है।

भेडिया के पेट से मिला खतरनाक वायरस
इसके अलावा एक साइबेरियाई भेड़िया के जमे हुए पेट से दो और नए वायरस अलग किए गए। जिनका नाम पैकमैनवायरस ल्यूपस और पेंडोरावायरस ल्यूपस रखा गया है।भेड़िया के पेट से मिले इन वायरसों की जांच की गई तो पता चला कि ये मिट्टी और पानी में मौजूद सिंगल सेल वाले अमीबा को संक्रमित करने में सक्षम हैं। वहीं सही वातावरण में येबड़े स्तर की महामारी या संक्रमण फैला सकते हैं।

बना एक नया रिकॉर्ड
यह रिसर्च फ्रांस की एक्स-मार्सील यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की है। जिन्होंने पहले 2014 में साइबेरियाई पर्माफ्रॉस्ट में पाए गए 30,000 साल पुराने वायरस को पुनर्जीवित किया था। लेकिन इस बार वैज्ञानिक इस रिकॉर्ड को तोड़ने में सफल रहे । वे इस बार 48500 साल पुराने वायरस को पुर्नजीवित करने में सफल रहे। साइंसटिस्ट्स ने इसे लेकर एक रिसर्च पेपर लिखा है। जिसका रिव्यू होना बाकी है।












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