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सद्दाम हुसैन की मौत के 10 वर्ष पूरे, क्‍या है उनके बिना इराक का हाल

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बगदाद। 30 दिसंबर 2006 को इराक के साथ ही दुनिया में एक ऐसी घटना घटी जिसने एक नया इतिहास लिखा। घटना थी इराक के पांचवें राष्‍ट्रपति सद्दाम हुसैन को फांसी पर लटकाने की। आज सद्दाम को दुनिया से गए हुए10 वर्ष पूरे हो गए हैं और आज तक यह तारीख अमेरिका को सताती है।

वर्ष 2006 में जॉर्ज डब्‍लूय बुश अमेरिका के राष्‍ट्रपति थे और जिस समय सद्दाम को फांसी पर लटकाया जा रहा था उन्‍हें इस बात का अहसास हो रहा था कि अमेरिका जो चाहता था वह हासिल नहीं कर सका है।

तब तक 3,000 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी थी। इस वर्ष जब अमेरिका में राष्‍ट्रपति चुनाव हुए तो फिर से सद्दाम हुसैन का जिन्‍न बोतल से निकला।

ट्रंप को याद आते हैं सद्दाम

ट्रंप को याद आते हैं सद्दाम

पिछले वर्ष नए राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि अगर आज सद्दाम हुसैन जिंदा होते तो दुनिया की तस्‍वीर अलग होती। इस वर्ष फिर ट्रंप ने कहा, 'सद्दाम भले ही अच्‍छा आदमी नहीं था लेकिन उसने हमेशा आतंकियों को नियंत्रित किया। आज उसके जाने के बाद इराक जैसे आतंकियों का ट्रेनिंग कैंप बन गया है।'

कभी ली थी सद्दाम की मदद

कभी ली थी सद्दाम की मदद

अमेरिका कभी सद्दाम हुसैन का विरोधी नहीं था बल्कि एक समय में सद्दाम हुसैन अमेरिका के साथी हुआ करते थे। वर्ष 1980 में सद्दाम को अमेरिकी शहर डेट्रॉयट की चाबी उस समय सौंपी जब उन्‍होंने एक चर्च के लिए अनुदान दिया। अमेरिका ने एक बार इराक के पड़ोसी ईरान के लिए सद्दाम से संपर्क किया था।

इरान पर किया हमला

इरान पर किया हमला

इसके बाद अमेरिका के साथ मिलकर इराक ने सितंबर 1980 में इरान पर हमला किया लेकिन जल्‍द ही वह रक्षात्‍मक हो गया। इराक-इरान वॉर अगस्‍त 1988 में खत्‍म हुआ और इस युद्ध में एक मिलियन से भी ज्‍यादा लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद 1.2 ट्रिलियन का नुकसान हुआ।

2003 में इराक पर हमला

2003 में इराक पर हमला

2003 में जब अमेरिकी सेनाएं इराक में दाखिल हुईं तो उन्‍होंने दावा किया सद्दाम हुसैन के पास बड़े पैमाने पर तबाही फैलाने वाले हथियार हैं। साथ ही वह अल-कायदा के उन आतंकियों से मिले हुए हैं जिन्‍होंने अमेरिका पर 9/11 जैसा आतंकी हमला किया। हालांकि राष्‍ट्रपति जॉज बुश के दोनों ही दावे सही नहीं थे।

दिसंबर 2003 में गिरफ्तार सद्दाम

दिसंबर 2003 में गिरफ्तार सद्दाम

दिसंबर 2003 में अमेरिकी सेनाओं ने सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार किया और उन्‍हें पांच नवंबर 2006 को इराक के शहर दुजैल में 149 शिर्ते मुसलमानों की हत्‍या के लिए दोषी ठहराया गया। छह दिसंबर को इद-उल-अजहा के मौके पर उन्‍हें फांसी दे दी गई।

इराक में शुरू हिंसा का दौर

इराक में शुरू हिंसा का दौर

सद्दाम हुसैन की मौत के बाद से इराक में हिंसा का दौर शुरू हो गया। 14 दिसंबर 2011 को राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के आदेश के बाद इराक से अमेरिकी सेना की आखिरी टुकड़ी वापस लौट गई। वर्ष 2013 तक इराक में अल कायदा का शासन रहा तो वर्ष 2014 से यहां पर आईएसआईएस का आतंक जारी है।

अलकायदा के बाद आईएसआईएस

अलकायदा के बाद आईएसआईएस

जून 2014 में आईएसआईएस ने इराक के शहर मोसुल पर कब्‍जा कर लिया। जिन 30,000 इराकी सैनिकों को अमेरिका ने ट्रेनिंग दी और उन्‍हें उपकरण मुहैया कराए थे वे सभी अपने हथियार छोड़कर चले गए। आज फिर से इराक में 5,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं।

कभी सुसाइड अटैक्‍स का आंकड़ा था जीरो

कभी सुसाइड अटैक्‍स का आंकड़ा था जीरो

वर्ष 2003 में जब अमेरिका ने ईराक में दखल नहीं किया था तो ईराक में सुसाइड अटैक्‍स का आंकड़ा न के बराबर था या फिर था ही नहीं। अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2003 के बाद से अब तक ईराक में 1,892 सुसाइड अटैक्‍स हुए हैं।

क्रिश्चियन भी थे इराक में

क्रिश्चियन भी थे इराक में

2003 में र्इराक में छिड़े युद्ध से पहले वहां पर करीब 1.5 मिलियन आबादी क्रिश्चियन धर्म को मानने वाले लोगों की थी। युद्ध छिड़ने के बाद वहां से एक मिलियन क्रिश्चियन सीरिया चले गए। लेकिन सीरिया में भी आईएसआईएस के आने के बाद से हालात खराब हो गए हैं।

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English summary
On 30th December 2006 Iraq's fifth President Saddam Hussein was executed. After his death one can easily notice the chaos in Iraq.
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