यूपी के मुस्लिम परिवार में जन्मीं जोहरा सहगल कैसे बनीं विश्व ख्याती प्राप्त अभिनेत्री, जानिए सबकुछ
यूपी के मुस्लिम परिवार में जन्मीं जोहरा सहगल कैसे बनीं विश्व ख्याती प्राप्त अभिनेत्री, जानिए सबकुछ
नई दिल्ली: जोहरा सहगल (Zohra Sehgal) भारतीय सिनेमा जगत में एक ऐसा नाम, जिसे शायद ही कोई कला प्रेमी नहीं जानता होगा। जोहरा सहगल को भारत की पहली महिला अभिनेत्री और नर्तकी माना जाता है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली थी। Google ने आज 29 सितंबर के दिन जोहरा सहगल की याद में Doodle बनाया है। जोहरा सहगल की 'नीचा नगर' फिल्म को आज ही के दिन 29 सितंबर 1946 को कान फिल्म फेस्टिवल में रिलीज किया गया था। इस फिल्म के कान फिल्म फेस्टिव के सर्वोच्च सम्मान Palme d'Or prize से सम्मानित किया गया था। गूगल ने इसी को याद करते हुए जोहरा सहगल के लिए डूडल बनाया है। आइए जानें जोहरा सहगर की जिंदगी के बारे में...।

यूपी के रामपुर में जोहरा जन्म, डांस की पढ़ाई जर्मनी से
जोहरा सहगल का जन्म 27 अप्रैल, 1912 को उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक पारंपरिक मुस्लिम परिवार में हुआ था। जोहरा सहगल की मां का निधन उस वक्त हुआ जब जोहार काफी छोटी थी। जोहरा ने अपनी पढ़ाई क्वीन मेरी कॉलेज, लाहौर से की है। 1930 में जोहरा यूरोप चली गईं।
जोहरा ने यूरोप जाने के बाद जर्मनी के ड्रेसडेन में मैरी विगमैन के बैले स्कूल में दाखिला लिया। ऐसा करने वाली जोहरा सहगल पहली भारतीय बनीं। मैरी विगमैन के बैले स्कूल में जोहरा ने तीन सालों के लिए मॉडर्न डांस की पढ़ाई की।

उदय शंकर के साथ बतौर डांसर शुरू किया काम
तीन साल तक डांस की पढ़ाई करने के बाद जोहरा सहगल ने अपना करियर 1935 में उदय शंकर के साथ एक डांसर के रूप में शुरू किया। 1935 से 1940 के बीच जोहरा ने पूरे जापान, मिस्र, यूरोप और अमेरिका में डांस प्रदर्शन किया।
भारत आने के बाद जोहरा उदय शंकर के एकेडमी में डांस सिखाने लगीं, जहां वह अपने होने वाले पति कामेश्वर सहगल से मिलीं। कुछ सालों बाद जोहरा ने कामेश्वर सहगल से शादी की और लाहौर शिफ्ट हो गईं।
उन्होंने अपने पति कामेश्वर सहगल के साथ लाहौर में जोरेश नृत्य संस्थान खोला। वह 1960 में नाट्य अकादमी - दिल्ली नाट्य संघ के निदेशक भी थीं और 1974 में दिल्ली में राष्ट्रीय लोक नृत्य कलाकारों की टुकड़ी की स्थापना भी की।

बतौर अभिनेत्री पृथ्वी थिएटर से जुड़ीं जोहरा
बंटवारे के बाद जोहरा बॉम्बे शिफ्ट हो गईं, जहां उनकी बहन उज़रा बट पहले से पृथ्वी थिएटर के साथ काम कर रहीं थी। जोहरा सहगल भी 1945 में एक अभिनेत्री के रूप में पृथ्वी थिएटर से जुड़ीं। 1945 से 1959 तक जोहरा भारत के सभी प्रमुख शहरों का पृथ्वी थिएटर की अभिनेत्री के तौर पर दौरा किया। उन्हें 400 रुपये मासिक वेतन मिलता था।
इसी समय, जोहरा सहगल थिएटर ग्रुप इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) में भी शामिल हो गईं थीं। उन्होंने कई नाटकों में अभिनय किया, जिसमें ख्वाजा अहमद अब्बास द्वारा निर्देशित, आईपीटीए के पहले निर्माण, धरती के लाल (1946) में अपनी फिल्म की शुरुआत की। उन्होंने चेतन आनंद के नीचा नगर में भी अभिनय किया, जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की और कान फिल्म समारोह में Palme d'Or prize से सम्मानित किया गया था।

हॉलीवुड में भी जोहरा ने किया काम
जोहरा सहगल ने कई हिंदी फिल्मों के लिए कोरियोग्राफी भी की, जिनमें गुरु दत्त की बाजी (1951) और राज कपूर की फिल्म आवारा में ड्रीम सीक्वेंस शामिल हैं। 1962 में सहगल के लंदन चले जाने के बाद, उन्होंने डॉक्टर हू और 1984 की मिनिसरीज द ज्वेल इन द क्राउन जैसी ब्रिटिश टेलीविजन क्लासिक्स में दिखाई दीं। उन्होंने 'बेंड इट लाइक बेकहम' में भी अहम भूमिका निभाई।
1990 में जोहरा सहगल भारत लौट आईं। कई फिल्मों, नाटकों और टीवी कार्यक्रमों में अभिनय करने के अलावा, उन्होंने कविता प्रदर्शन करना शुरू किया। उनका पहला प्रदर्शन 1983 में उनके भाई रविशंकर द्वारा आयोजित उदय शंकर के स्मारक पर था। उसके बाद, उन्हें कई निमंत्रण मिले, और उन्होंने 'एन इवनिंग विद जोहरा' के लिए पाकिस्तान में भी शो किए।

जोहारा के नाम दर्ज कई खिताब
जोहरा सहगल ने दिल से, हम दिल दे चुके सनम, वीर जारा, सांवरिया, चीनी कम जैसी कई हिंदी फिल्मों में अभिनय किया। उनके जीवन जीने के तरीके ने उनके सह-अभिनेताओं अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रणबीर कपूर और सलमान खान को भी प्रभावित किया।
जोहरा को पद्म श्री, पद्म विभूषण और कालिदास सम्मान जैसे देश के कई बड़े अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 2014 में 10 जुलाई को जोहरा ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अपने अंतिम समय में जोहरा दिल्ली में थीं।












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