NRC में नाम दर्ज कराने के लिए माता-पिता के दस्तावेजों की कोई जरूरत नहीं

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच कुछ अफवाहें भी फैल रही हैं, जैसे अपनी नागरिकता साबित करने के लिए 1971 से पहले के दस्तावेज दिखाने होंगे या फिर अपने माता-पिता से जुड़े दस्तावेज दिखाने होंगे। जबकि ये मजह अफवाहें हैं। जिन्हें दूर करने के लिए सरकारी पक्ष ने कई तथ्यों को सामने रखा है।

एनआरसी के लिए क्या जरूरी?

एनआरसी के लिए क्या जरूरी?

लोगों के बीच जो भ्रांति फैलाई गई हैं वो ये हैं कि जब कभी एनआरसी लागू होगा, तो अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए अपने माता-पिता के जन्म का विवरण उपलब्ध कराना पड़ेगा। जबकि ये पूरी तरह से गलत है। सरकार ने इस मामले में सफाई दी है कि आपको अपने जन्म का विवरण जैसे जन्म की तारीख, माह, वर्ष और स्थान के बारे में जानकारी देना ही पर्याप्त होगा। अगर आपके पास अपने जन्म का विवरण उपलब्ध नहीं है तो आपको अपने माता-पिता के बारे में यही विवरण उपलब्ध कराना होगा। लेकिन कोई भी दस्तावेज माता-पिता के द्वारा ही प्रस्तुत करने की अनिवार्यता बिल्कुल नहीं होगी।

ये दस्तावेज भी काफी

ये दस्तावेज भी काफी

जन्म की तारीख और जन्मस्थान से संबंधित कोई भी दस्तावेज जमाकर नागरिकता साबित की जा सकती है। हालांकि अभी तक ऐसे स्वीकार्य दस्तावेजों को लेकर भी निर्णय होना बाकी है। इसके लिए वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, बीमा के पेपर, जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र, जमीन या घर के कागजात या फिर सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी प्रकार के अन्य दस्तावेजों को शामिल करने की संभावना है। इन दस्तावेजों की सूची ज्यादा लंबी होने की संभावना है ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को अनावश्यक रूप से परेशानी न उठाना पड़े।

ये है दूसरी अफवाह

ये है दूसरी अफवाह

एक अन्य अफवाह ये है कि अगर एनआरसी लागू होता है तो 1971 से पहले की वंशावली को साबित करना होगा। जबकि ये भी गलत है। 1971 के पहले की वंशावली के लिए आपको किसी प्रकार के पहचान पत्र या माता-पिता / पूर्वजों के जन्म प्रमाण पत्र जैसे किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है। यह केवल असम एनआरसी के लिए मान्य था, वो भी 'असम समझौता' और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के आधार पर। देश के बाकी हिस्सों के लिए The Citizenship (Registration of Citizens and Issue of National Identity Cards) Rules, 2003 के तहत NRC की प्रक्रिया पूरी तरह से अलग है।

धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं

धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं

सरकारी पक्ष की ओर से ये तथ्य गुरुवार को उस वक्त जारी किए जब उसपर मुस्लिम विरोधी सरकार होने के आरोप लग रहे थे। नागरिकता कानून के विरोध में देश में अभी भी प्रदर्शन हो रहे हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि एनआरसी लागू होने के बाद मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव किया जाएगा। जो कि पूरी तरह से झूठ है। एनआरसी किसी धर्म के बारे में बिल्कुल भी नहीं है। जब एनआरसी लागू किया जाएगा, वह न तो धर्म के आधार पर लागू किया जाएगा और न ही उसे धर्म के आधार पर लागू किया जा सकता है। किसी को भी सिर्फ इस आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता कि वह किसी विशेष धर्म को मानने वाला है।

गवाह लाने की इजाजत

गवाह लाने की इजाजत

अगर कोई शख्स पढ़ा-लिखा नहीं है और उसके पास संबंधित दस्तावेज नहीं हैं तो इस मामले में अधिकारी उस व्यक्ति को गवाह लाने की इजाजत देंगे। साथ ही अन्य सबूतों और Community Verification आदि की भी अनुमति देंगे। एक उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। किसी भी भारतीय नागरिक को अनुचित परेशानी में नहीं डाला जाएगा। किसी के साथ भी किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

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