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यूपी में ब्राह्मणों के पास हथियारों के लाइसेंस को लेकर गफलत में क्यों पड़ गई योगी सरकार

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नई दिल्ली- उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भाजपा के ही एक विधायक के सवालों के चक्कर में बुरी तरह गफलत में पड़ी हुई है। भाजपा विधायक ने राज्य में ब्राह्मण की सुरक्षा से जुड़ा एक सवाल का जवाब विधानसभा के जरिए राज्य के मुख्यमंत्री से मांगा तो उसको लेकर सरकार असमंजस में नजर आ रही है। पहले तो शासन की ओर से जिलाधिकारियों को एक अटपटा सा निर्देश जारी कर दिया गया, लेकिन बाद में सरकार ने उससे कदम पीछे खींच लिए। लगता है कि विपक्ष ने जिस तरह से ब्राह्मण राजनीति को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश शुरू की है, उसने प्रदेश सरकार को बहुत ही फूंक-फूंक कर फैसले लेने को मजबूर कर दिया है।

    UP Brahmin Politics: CM Yogi ने शस्त्र लाइसेंस की मांगी जानकारी, बाद में खींचे कदम | वनइंडिया हिंदी
    बीजेपी विधायक का सवाल, असमंजस में योगी सरकार

    बीजेपी विधायक का सवाल, असमंजस में योगी सरकार

    इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक यूपी विधानसभा में भाजपा के एक विधायक ने राज्य सरकार से कथित रूप से प्रदेश में ब्राह्मणों की 'हत्याएं', उनकी उनकी असुरक्षा और हथियारों के लाइसेंस के आंकड़ों को लेकर एक सवाल किया था, जिसके जबाव देने के चक्कर में योगी सरकार खुद में ही उलझ गई। दावे के मुताबिक इस सवाल का जवाब खोजने के लिए राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को एक असामान्य सी चिट्ठी लिखकर कहा कि वे ब्राह्मणों के आवेदनों और उन्हें मिले हथियारों के लाइसेंस का पूरा ब्योरा भेजें। यह चिट्ठी 18 अगस्त को उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के अंडर सेक्रेटरी प्रकाश चंद्र अग्रवाल के हस्ताक्षर से जिलों को भेजी गई थी और उनसे 21 अगस्त तक पूरी जानकारी मांगी गई थी। इस चिट्टी पर अग्रवाल ने तो कुछ भी कहने से मना कर दिया, लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह कहकर कि अब इस ब्योरे की मांग नहीं की जा रही है, सरकार के कदम पीछे खींच लेने के संकेत दिए हैं। हालांकि, जानकारी के मुताबिक एक जिले से यह डाटा भेज भी दिया गया है।

    ब्राह्मणों की सुरक्षा को लेकर पूछे थे सवाल

    ब्राह्मणों की सुरक्षा को लेकर पूछे थे सवाल

    उस चिट्ठी में इस बात का जिक्र है कि सुलतानपुर के लंभुआ से भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी ने 16 अगस्त को यूपी विधानसभा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी प्रदीप दुबे को विधानसभा के नियमों के तहत प्रश्न पूछने के लिए एक नोट भेजा था। द्विवेदी की चिट्ठी में यूपी के गृहमंत्री (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) से कुछ जानकारी मांगी गई थी, मसलन- पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में कितने ब्राह्मणों की हत्याएं हुई हैं, कितने हत्यारों की गिरफ्तारी हुई है, कितनों को सजा मिली है, ब्राह्मणों को सुरक्षा देने के लिए सरकार की क्या योजनाएं हैं, क्या सरकार ब्राह्मणों को प्राथमिकता के तौर पर हथियारों के लाइसेंस देगी या कितने ब्राह्मणों ने हथियारों के लाइसेंस के लिए आवेदन दिए हैं और उनमें से कितनों को लाइसेंस जारी हुए हैं।

    अब कोई नहीं बोलने को है तैयार

    अब कोई नहीं बोलने को है तैयार

    भाजपा विधायक की इसी मांग के आधार में सरकार ने जिलाधिकारियों से ये सूचना मांगी थी- "कितने ब्राह्मणों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए अप्लाई किया और कितनों को लाइसेंस जारी हुआ?.....संबंध में बिंदुवार आख्या एवं अनुपूरक सामग्री शासन को 21.08.2020 तक ई-मेल पर उपलब्ध कराएं।" जब इस मसले पर विधानसभा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी प्रदीप दुबे से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, 'हमने सरकार से ऐसी कोई जानकारी नहीं मांगी थी और ना ही ऐसा कोई प्रश्न स्वीकार किया गया था।' जब द्विवेदी से संपर्क किया गया तो उन्होंने यह कहकर कुछ कहने से इनकार कर दिया कि, 'मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है और मैं संपर्क में नहीं हूं। '

    यूपी में ब्राह्मण राजनीति की होड़

    यूपी में ब्राह्मण राजनीति की होड़

    गौरतलब है कि पिछले महीने 10 जुलाई को कानपुर में गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने और उससे पहले उसके 5 साथियों के एनकाउंटर के बाद यूपी में ब्राह्मणों को लेकर खूब राजनीति हो रही है। क्योंकि, मारे गए सभी अपराधी ब्राह्मण थे। ये एनकाउंटर 3 जुलाई को कानपुर के ही बिकरु गांव में एक डीएसपी समेत 8 पुलिस वालों की हुई जघन्य हत्या के बाद हुए थे। इस नरसंहार का आरोप विकास दुबे और उसकी गैंग पर है। लेकिन, यूपी में करीब 10 फीसदी ब्राह्मण मतदाताओं की वजह से ये मामला तब से खूब तूल पकड़ रहा है। बसपा की मायावती और सपा के अखिलेश यादव से लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह तक इसे ब्राह्मणों को टारगेट किए जाने का ऐंगल देकर खूब हो-हल्ला कर रहे हैं। मायावती सत्ता में आने पर भगवान परशुराम के नाम पर अस्पताल बनाने का वादा कर रही हैं तो अखिलेश यादव उनकी 108 फीट ऊंची प्रतिमा बनाने का भरोसा दे रहे हैं। उधर आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी भाजपा के राज में यूपी के ब्राह्मण खुद को प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। इसको लेकर उनके खिलाफ यूपी के कई जिलों में लोगों के बीच दुश्मनी पैदा करने और शांति भंग करने के आरोप में केस दर्ज किए गए हैं।

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    English summary
    Yogi government get confused over the license of arms with Brahmins in UP
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