आदित्यनाथ: हिंदुत्व के मुद्दे रहे सांसद योगी की पहली पसंद

संसद की चर्चाओं में योगी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे. गो हत्या, आईएस, धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दे कई बार उठाए.

योगी आदित्यनाथ
Yogi Adityanath
योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर 19 मार्च को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने फ़ेसबुक पर लिखा था, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई विरोधी और सांप्रदायिक लोग उन्हें उपद्रवी और हंगामा खड़ा करने वाले शख़्स के रूप में पेश कर रहे हैं. ऐसे लोगों को संसद में हुई बहस को देखना चाहिए. यहां उन्हें पता चलेगा कि योगी सुशासन के विभिन्न मुद्दों पर अनुभवी की तरह सोचते हैं.''

संसद में योगी आदित्यनाथ के पिछले आठ सालों के प्रदर्शन को लेकर 'फैक्टचेकर' ने एक विश्लेषण किया है. इसमें पीआरएस लेजिस्लेटिव के साथ लोकसभा अर्काइव के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है.

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योगी आदित्यनाथ
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चार मुख्य निष्कर्ष

  • हालांकि 44 साल के नेता ने संसद में कई मुद्दों को उठाया. इन मुद्दों में नदियों के प्रदूषण, दिमाग़ी बुखार जैसे सवाल भी शामिल रहे हैं. इसके अलावा पिछले तीन सालों में उनका मुख्य रूप से ध्यान हिन्दू, गोहत्या पर केंद्रित रहा है.

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  • 16वीं लोकसभा में योगी आदित्यानाथ का 18 फ़ीसदी डिेबेट हिन्दुओं पर रहा. यह उनकी 15वीं लोकस के कार्यकाल से सात फ़ीसदी ज़्यादा है. योगी ने इसमें गोहत्या, यूनिफॉर्म सिविल कोड और हिन्दू तीर्थयात्रियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को शामिल किया.
  • योगी ने शत्रु संपत्ति विधेयक का भी मुद्दा उठाया जिसे अब लागू किया जा चुका है. संसद में उन्होंने इस्लामिक स्टेट से जुड़ी चिंताओं का भी ज़िक्र किया है. योगी ने संसद में देश की आंतरिक सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया था.

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गाय
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  • साइंस से ग्रैजुएट आदित्यनाथ ने 16वीं लोकसभा में सबसे ज़्यादा 57 सवाल स्वास्थ्य मंत्रालय से पूछे. इनमें 11 सवाल मेडिकल निकायों में भ्रष्टाचार से जुड़े थे. 6 सवाल देश की जनसांख्यकीय स्थिति बदलने की आशंका को लेकर आबादी नियंत्रण के उपायों से जुड़े थे.
  • पिछले 8 सालों में आदित्यनाथ ने 52 सवाल गृह मंत्रालय से पूछे. इनमें से 34 फ़ीसदी सवाल इस्लामिक स्टेट के डर, इंडियन मुजाहिदीन के अतिवाद और ईसाई अलगाववादियों को लेकर देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े पूछे गए.
योगी आदित्यनाथ
Yogi Adityanath
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संसद में हाज़िरी

15वीं लोकसभा (जून 2009 से फ़रवरी 2014): संसद में आदित्यनाथ की मौजूदगी 72 फ़ीसदी है. यह योगी के राज्य उत्तर प्रदेश के अन्या सांसदों के मुक़ाबले थोड़ा कम है. इन सांसदों की मौजूदगी 79 फ़ीसदी रही थी. राष्ट्रीय स्तर पर सांसदों की उपस्थिति 76 फ़ीसदी रही है.

हालांकि योगी औसत सांसदों के मुक़ाबले ज़्यादा बहसों में शामिल रहे और ज़्यादा सवाल भी पूछे. आदित्यनाथ इस दौरान 82 बहसों में शामिल हुए जबकि औसत सांसदों में यह संख्या 38 ही है.

8.5 फ़ीसदी डिबेट रेल बजट पर रहीं. 11 फ़ीसदी बहस उन्होंने हिन्दुओं से जुड़े मुद्दों को लेकर की. उन्होंने इन मुद्दों में तीर्थयात्रियों के लिए अमरनाथ श्राइन बोर्ड को फिर से गठित करने, नेपाल से मानसरोवर यात्रा पर लगे प्रतिबंध को हटाने और रामायण में जिस मिथिलांचल इलाक़े का ज़िक्र है उसके विकसित करने को शामिल किया.

योगी आदित्यनाथ
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सांसद कार्यकाल के दौरान आदित्यनाथ पर धमकी, दंगे, अलग-अलग समुदायों के बीच शत्रुता, एक धार्मिक स्थल को गंदा करने, जम्मू-कश्मीर के मुस्लिम प्रभुत्व वाले किश्तवार ज़िले और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हिंसा भड़काने के आरोप लगे.

आदित्यनाथ ने संसद में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने और इंडिया का नाम हिन्दुस्तान रखने का बिल भी पेश किया था.

योगी आदित्यनाथ
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आदित्यनाथ द्वारा पेश किए गए निजी मेंबर बिल

  • संविधान संशोधन बिल, 2014 (अनुच्छेद एक में संशोधन): इसका उद्देश्य देश का नाम बदलना था. प्राइवेट मेंबर बिल्स एंड रिजॉल्युशन की 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक देश का नाम इंडिया से कि भारत करने का प्रस्ताव है.
  • गोहत्या प्रतिबंध बिल, 2014: इस बिल को 16वीं लोकसभा में फिर से पेश किया गया. यह 2009 में 15वीं लोकसभा में आदित्यनाथ के बिल का ही प्रतिरूप था. दोनों प्रारूपों में उन्होंने गाय, बैल और बछड़ों की हत्या का वैज्ञानिक आधार पर प्रतिबंधित करने की मांग की थी. हालांकि उन्होंने प्रतिबंध को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी थी.
  • संविधान संशोधन बिल, 2014 (अनुच्छेद 44 को ख़त्म करना): भारतीय नागरिकों के लिए समान नागिरक संहिता बनाने की मांग की गई. इसका असर देश के विभिन्न धार्मिक समुदायों पर पड़ेगा.
  • संविधान संशोधन बिल, 2015 (नए अनुच्छेद 25A को शामिल करना): भारतीय संविधान में नए अनुच्छेद को शामिल करने का प्रस्ताव है ताकि जबरन धर्मांतरण को प्रतिबंधित किया जा सके.
  • हाई कोर्ट इलाहाबाद ( एक स्थाई बेंच की गोरखपुर में स्थापना), बिल 2015: इस बिल में इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक स्थायी बेंच गोरखपुर में बनाने की मांग की गई है.
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