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Year Ender 2018: किसकी रणनीति हुई नाकाम, कौन बना चुनावी समर का नया 'चाणक्य'?

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नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनावों से पहले साल 2018 को राजनीतिक लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। 2018 की शुरूआत के साथ ही सियासी गलियारे में ये चर्चा आम थी कि इस साल की राजनीतिक घटनाएं काफी हद तक 2019 लोकसभा चुनाव की स्क्रिप्ट लिखने में मददगार साबित होंगी। गुजरता साल कई बड़ी राजनीतिक घटनाओं का गवाह बना। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए तो कई लोकसभा सीटों पर उपचुनावों की गूंज भी सुनाई दी। अधिकांश लोकसभा सीटों पर उपचुनाव के दौरान विपक्षी दलों ने बीजेपी को मात देकर आगामी लोकसभा चुनावों से पहले बड़ी चुनौती पेश की। वहीं, साल के आखिर में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी के हाथों से हिंदी हार्ट लैंड के तीन राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जाते रहे। इस साल कई ऐसे राजनेता रहे जो अक्सर सुर्खियों में रहे, वे अपनी प्रभावी रणनीति और बयानों के जरिए विपक्षी दलों की मुश्किलें बढ़ाते रहे, तो कई मौकों पर उनको बयानों के कारण सियासत भी गरमाई।

year ender 2018: top 10 political leaders of 2018 who came in limelight

इस चुनावी साल में बीजेपी दक्षिण के राज्य कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर आई, लेकिन सरकार बनाने का मौका मिलने के बाद पार्टी सदन में बहुमत साबित नहीं कर सकी और कांग्रेस-जेडीएस ने गठबंधन कर सरकार बना लिया। दरअसल, इस चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस को 122 सीटों से 78 सीटों पर तो ला दिया लेकिन कर्नाटक के एक कांग्रेस विधायक डीके शिवकुमार ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री येदुरप्पा की हर चाल को नाकाम कर भाजपा को दूसरी बार 'रणनीतिक मात' दी।

1. डीके शिवकुमार

1. डीके शिवकुमार

कर्नाटक के पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के लिए सबसे बड़े अस्त्र साबित हुए डीके शिवकुमार ने पार्टी के सभी 78 विधायकों को किसी प्रकार की संभावित खरीद-फरोख्त से दूर रखने में बड़ी भुमिका निभाई। इन सभी विधायकों को बचाकर रखना बेहद जरूरी था वर्ना कब इनकी 'अंतरात्‍मा' जाग जाती और कांग्रेस का खेल बिगड़ जाता। इसलिए कांग्रेस ने इसकी जिम्‍मदारी डीके शिवकुमार के हाथ में सौंप दी। डीके शिवकुमार ने इस जिम्‍मेदारी को बखूबी निभाया, वे 'संकटमोचक' के रूप में उभरकर सामने आए और कांग्रेस की सरकार बनाने में मदद की। निर्दलीय विधायकों से बातचीत करके उन्हें अपने पाले में ले आए। कांग्रेस के 78 विधायकों को इस बार भी इन्हीं के ईगलटन रिसॉर्ट में रोका गया था जहां गुजरात में राज्यसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस के 44 विधायकों को रोका गया था। शिवकुमार ने इसके अलावा लोकसभा उपचुनावों में कांग्रेस को बेल्लारी की प्रतिष्ठित सीट पर बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

2. नरेंद्र मोदी

2. नरेंद्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी लोकप्रियता बरकरार रखने में इस साल भी कामयाब रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में लगातार हस्तक्षेप करने वाले पीएम मोदी विश्व के लोकप्रिय नेताओं में शुमार हैं। देश की राजनीति उनके इर्द-गिर्द ही घूमती दिखाई देती है। ये उनकी लोकप्रियता ही है कि बीजेपी विधानसभा चुनावों से लेकर हर चुनाव में उनका जिक्र प्रमुखता से करती है। आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच विपक्षी दल पीएम मोदी के खिलाफ एक ऐसा नेता खड़ा करने की कोशिश में हैं जो उनकी लोकप्रियता को चुनौती दे सके और रणनीतिक रूप से भी वो राजनेता पीएम मोदी के लिए मुश्किलें पैदा कर सके। आगामी लोकसभा की चुनावी जंग भी काफी हद तक मोदी बनाम अन्य के रूप में बदलती दिखाई दे रही है। हालांकि साल के आखिरी कुछ महीनों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील में घोटाले का आरोप लगाते हुए उनपर जमकर निशाना साधा है।

3. राहुल गांधी

3. राहुल गांधी

पिछले साल दिसंबर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालने वाले राहुल गांधी की राजनीतिक रणभूमि साल 2018 रही है। राहुल गांधी पूरे साल सत्ताधारी मोदी सरकार पर हमलावर रहे। पीएम मोदी पर उन्होंने सबसे बड़ा हमला बोलते हुए 'चौकीदार चोर है' कहा जिसको लेकर देश की सियासत गरमाई रही। किसानों के आंदोलन से लेकर छात्रों आंदोलन तक में वे दिखाई दिए हैं। राहुल शिवभक्त के रूप में भी सामने आए और उन्होंने कई मंदिरों में जाकर दर्शन-पूजन किया और बीजेपी की हिंदुत्व की राजनीति को एक सोची-समझी रणनीति के तहत जवाब देने की कोशिश की। साल के आखिरी महीने में, पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने बीजेपी से तीन राज्यों की सत्ता छीन ली। इन राज्यों में जीत से कांग्रेस ही नहीं राहुल गांधी का कद भी बढ़ा है। हालांकि अभी भी लोकसभा चुनावों से पहले महागठबंधन तैयार करने और पीएम पद के उम्मीदवार को लेकर राहुल गांधी के सामने चुनौती है।

4. अमित शाह

4. अमित शाह

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह को बीजेपी का चाणक्य भी कहा जाता है। उनके कार्यकाल में बीजेपी देश के तकरीबन 18 राज्यों की सत्ता में हिस्सेदार रही है। अमित शाह की सबसे बड़ी उपलब्धि पूर्वोत्तर के राज्यों में कमल खिलाना कही जा सकती है, क्योंकि इन राज्यों में कभी कांग्रेस का दबदबा था लेकिन अब कांग्रेस के पास पूर्वोत्तर में एक भी राज्य नहीं बचा है। सरकार बनाने के लिए 'जोड़-तोड़' की राजनीति में माहिर माने जाने वाले शाह के लिए हालांकि पिछले 6 महीने अच्छे नहीं कहे जा सकते हैं। तीन राज्यों में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा तो कई सहयोगियों ने भी पार्टी का साथ भी छो़ड़ा। जम्मू-कश्मीर में पीडीपी, आंध्र प्रदेश में टीडीपी और बिहार में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी ने साथ छोड़ा। वहीं, अमित शाह ने संकेत दिए हैं कि इनकी भरपाई देश के अन्य राज्यों में की जाएगी। उनकी नजर अब तमिलनाडू, ओडिशा और पं. बंगाल पर है।

5. योगी आदित्यनाथ

5. योगी आदित्यनाथ

साल की शुरुआत में गोरखपुर की लोकसभा सीट पर उपचुनाव में मिली हार बीजेपी के लिए ही नहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए भी किसी व्यक्तिगत झटके से कम नहीं थी। वहीं फूलपुर और कैराना में भी पार्टी को हार का सामना पड़ा तो निशाने पर सीएम योगी आए। लेकिन साल 2018 में योगी आदित्यनाथ शहरों के नाम बदलने को लेकर काफी चर्चा में रहे। फैजाबाद, मुगलसराय और इलाहाबाद का नाम बदलने के कारण वे विपक्षी दलों के निशाने पर रहे। विधानसभा चुनावों के दौरान कई राज्यों में योगी आदित्यनाथ बीजेपी के स्टार प्रचारक की भूमिका में भी दिखाई दिए। इसी दौरान राजस्थान में भगवान हुनुमान की जाति को लेकर बयान देकर वे विवादों में घिर गए। इन विवादों के अलावा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया जिसकी जमकर तारीफ हुई। वहीं, प्रयागराज में होने जा रहे महाकुंभ को भी योगी आदित्यनाथ ने खास तवज्जो देकर सुर्खियां बटोरी हैं।

6. कमलनाथ

6. कमलनाथ

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस की कमान संभालने वाले कमलनाथ सूबे के मुख्यमंत्री बने। मध्य प्रदेश में कांग्रेस 15 सालों के बाद सत्ता में वापसी करने में सफल रही तो इसके पीछे कमलनाथ की भूमिका भी अहम रही। कमलनाथ मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से ही 9 बार लोकसभा सदस्य के रूप में चुनकर आए हैं। हालांकि, राज्य का मुख्यमंत्री बनते ही वे विवादों में घिर गए जब उन्होंने मध्य प्रदेश में स्थानीय लोगों को नौकरी नहीं मिलने के लिए बाहरी लोगों को खासकर यूपी-बिहार के लोगों को जिम्मेदार ठहरा दिया। कमलनाथ ने कहा था कि सिर्फ उन उद्योग धंधों और कंपनियों को इंसेंटिव मिलेगा जो 70 फीसदी स्थानीय लोगों को रोजगार देंगे।

7- मायावती

7- मायावती

बसपा प्रमुख मायावती ने लोकसभा चुनाव 2014 और यूपी विधानसभा चुनाव 2017 की हार को भुलाते हुए सूबे में अपनी प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाने का फैसला किया। गोरखपुर और फूलपुर में बसपा ने सपा के उम्मीदवार को समर्थन दिया और इस चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद पार्टी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जेडीएस के सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ा और एक सीटकर कांग्रेस के साथ गठबंधन में परदे के पीछे सूत्रधार की भूमिका निभाई। हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद के बाद मायावती ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के साथ ना जाकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया, पर जब कांग्रेस बहुमत से दूर दिखाई दे रही थी तो मायावती ने आगे बढ़कर दो राज्यों मध्य प्रदेश-राजस्थान में बिना किसी शर्त के समर्थन देने का फैसला किया। लेकिन मायावती ने साल के आखिर में सबसे बड़ा दांव चला जब सपा के साथ मिलकर यूपी में लोकसभा चुनाव लड़ने का संकेत दिया जिसमें कांग्रेस को इस गठबंधन से दूर रखने की खबर प्रमुख रही।

8. शिवराज सिंह चौहान

8. शिवराज सिंह चौहान

लगभग 13 सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान हालांकि इस विधानसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके, लेकिन उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। 'मामा' के नाम से लोकप्रिय शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उनके पास बहुमत के लिए जरूरी संख्या नहीं है, इसलिए वे सरकार बनाने का दावा नहीं करेंगे। जोड़-तोड़ की राजनीति से खुद को दूर रखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने अपनी इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। इसके अलावा, 13 साल तक शिवराज सिंह चौहान जिस बंगले में मुख्यमंत्री की हैसियत से रहते थे, उसे भी उन्होंने खाली कर दिया। सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्विटर अकांउट का बायो 'कॉमन मैनऑफ मध्य प्रदेश' अपडेट कर लिया। बंगला खाली करने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने ट्रेन में भी सफर किया जहां ट्रेन में मौजूद लोग सेल्फी खिंचवाते नजर आए।

9. उद्धव ठाकरे

9. उद्धव ठाकरे

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पूरे साल सुर्खियों में रहे और लगातार बीजेपी पर हमलावर रहे। पालघर उपचुनाव में शिवसेना-बीजेपी के बीच दूरियां बढ़ीं तो अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान भी उन्होंने कर दिया। वहीं, मोदी सरकार के खिलाफ जब अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, तो शिवसेना ने सदन से वॉक आउट कर दिया। यही नहीं, उद्धव ठाकरे सपरिवार रामलला के दर्शन करने अयोध्या भी पहुंचे। राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए मंदिर निर्माण की तारीख बताने को लेकर दबाव भी बनाया। साल के आखिर में भी शिवसेना के तेवर नरम नहीं हुए। उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी पर हमला बोला और राफेल डील को लेकर 'चौकीदार चोर है' बयान देकर सियासत तेज कर दी।

10. ममता बनर्जी

10. ममता बनर्जी

पं. बंगाल में हुए पंचायत चुनावों के दौरान टीएमसी ने बड़ी जीत दर्ज तो इन चुनावों के दौरान हिंसा के आरोप ममता बनर्जी की पार्टी पर लगे। इन चुनावों के दौरान राज्य के कई इलाकों में टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हिंसक घटनाओं को अंजाम देने का आरोप लगा। कई बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्याएं कर की गईं जिसका आरोप टीएमसी पर लगाते हुए भाजपा ने ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला। जबकि सूबे में रथ यात्रा को लेकर बीजेपी और ममता सरकार आमने-सामने आई। वहीं, ममता बनर्जी पूरे साल बीजेपी के खिलाफ हमलावर रहीं और विपक्षी दलों के साथ मिलकर बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ गठबंधन बनाने के लिए अलग-अलग दलों के नेताओं के साथ दिखाई दीं जिसमें, कर्नाटक में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मंच साझा करना प्रमुख रहा। हालांकि साल के अंत में बीजेपी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन तैयार करने को लेकर केसीआर के साथ ममता बनर्जी की मुलाकात ने बदलते समीकरण की तरफ भी इशारा किया है।

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English summary
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