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Year Ender 2018: केरल बाढ़ से लेकर दिल्ली प्रदूषण तक, इन प्राकृतिक आपदाओं की आगोश में रहा देश

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नई दिल्ली। साल 2018 में भारत में ऐसी कई प्राकृतिक आपदाओं ने कहर बरपाया जिनमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हजारों लोगों को बेघर होना पड़ा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 में देश के अलग-अलग हिस्सों में आए चक्रवाती तूफान, प्रदूषण, बाढ़, भूस्खलन और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से 1740 लोगों की मौत हो गई है। इन प्राकृतिक आपदाओं में हजारों लोग बेघर हो गए जबकि कईयों की जिंदगियां तबाह हो गई। ऐसे में आज हम आपको साल 2018 में आए प्राकृतिक आपदाओं के बारे में बताएंगे जिसकी वजह से आम लोगों की जिंदगियां प्रभावित हुई और लोगों काफी नुकसान भी उठान पड़ा।

बाढ़ और भूस्खलन ने ली 477 लोगों की जान

बाढ़ और भूस्खलन ने ली 477 लोगों की जान

हमारी इस सूची में सबसे पहला नाम केरल का जहां पर इस साल अगस्त महीने में मानसून के दौरान अत्यधिक बारिश की वजह से राज्य के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। पिछले कुछ दशकों में राज्य में पहले ऐसी स्थिति कभी देखने को नहीं मिली। मानसून के दौरान सामान्य बारिश होती और मौसम साफ हो जाता था लेकिन इस बार राज्य के 80 फीसदी इलकों में पानी भर गया। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से राज्य में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 477 लोगों की मौत हुई जबकि 2,80,679 लोगों को विस्थापित होना पड़ा था। केरल की इस आपदा को साल का सबसे बड़ा प्राकृतिक आपदा कहा गया। हालांकि अब स्थिति धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही लेकिन राज्य के लोगों ने जो परेशानी झेली वैसा उनके साथ पहले कभी नहीं हुआ। बारिश इतनी ज्यादा हुई की राज्य के इतिहास में पहली बार 42 में से 35 बांधों के फाटक खोल दिए गए थे। यहां तक 26 साल में पहली बार इदुक्की बाध के सभी पांच गेट को खोलना पड़ा था।

चक्रवाती तूफान तितली ने बरपाया कहर

चक्रवाती तूफान तितली ने बरपाया कहर

इस साल अक्टूबर महीने में चक्रवाती तूफान तितली की मार भी कुछ राज्यों को झेलनी पड़ी। चक्रवाती तूफान तितली ने 11 अक्टूबर को ओडिशा और आंध्र प्रदेश को टच किया। बंगाल की खाड़ी पर बने दबाव के कारण आए चक्रवाती तूफान 'तितली' ने बेहद खतरनाक रूप ले लिया था। चक्रवाती तूफान 'तितली' ओडिशा के गोपालपुर तट से टकराया था, जिसकी रफ्तार काफी 126 किमी प्रति घंटे से भी तेज थी। इस तुफान में 12 लोगों की मौत हुई संपत्ति को भी काफी नुकसान सहना पड़ा। यहीं नहीं इस तूफान की वजह से कई हजार पेड़ों को भी नुकसान हुआ जो कि तेज हवा की वजह से उखड़कर गिर गए।

तमिलनाडु में गाजा का कहर

तमिलनाडु में गाजा का कहर

इस साल अक्टूबर-नवंबर महीने में आए चक्रवाती तूफान गाजा ने भी तमिलनाडु में खूब कहर बरपाया। इस चक्रवाती तूफान में 45 से अधिक लोगों की मौत हुई। इस दौरान बड़े पैमाने पर बर्बादी भी हुई है। प्रदेश में 30 हजार से ज्यादा बिजली के खंभे और एक लाख से ज्यादा पेड़ों के उखड़ने की खबर भी रही। तूफान के अंदेशे को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने 82 हजार लोगों को 471 राहत केंद्रों में सुरक्षित पहुंचा दिया था। फिर भी चक्रवात से संबंधित घटनाओं में 20 पुरुषों, 11 महिलाओं और 2 बच्चों की मौत हो गई।

फेथाई ने बरपाया कहर

फेथाई ने बरपाया कहर

साल के अंत में 15 दिसंबर को उष्णकटिबंधीय चक्रवात फेथाई चक्रवात की मार भी झेलनी पड़ी। उष्णकटिबंधीय चक्रवात PHETHAI ने बंगाल की दक्षिणी खाड़ी से बने इस तूफान में हवा की स्पीड 83 किलो मीटर प्रति घंट था। बंगाल की खाड़ी से उठा ये तूफान 17 दिसंबर को पूर्वी आंध्र प्रदेश के कटरेनिकोना शहर पहुंचा। तूफान की वजह से वहां भूस्खलन की घटना भी देखने को मिली। भूस्खलन की वजह से पूर्वी गोदावरी जिले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। आंध्र प्रदेश के CM एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि पूर्वी गोदावरी जिले में 17 मंडल तूफान से प्रभावित हुए हैं। इन मंडलों में 5,602 किसान प्रभावित हो चुके हैं। जिले में 37 घरों को नुकसान पहुंचा है।

जब चक्रवाती तूफान वरदा ने मचाया कहर

जब चक्रवाती तूफान वरदा ने मचाया कहर

बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान 'वरदा' ने भी आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में कहर बरपाया था। खासकर इन राज्यों के तटीय इलाकों में तूफान का असर ज्यादा देखने को मिला। मौसम विभाग के मुताबिक इसका केंद्र गोपालपुर से 1050 किलोमीटर दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी में रहा। इस तूफान की वजह से 10 लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल हो गए थे। आंध्र प्रदेश में भी तेज हवाओं से कई जगह कारें और टैंकर पलट गईं, पोल गिर गए। इस चक्रवात से निपटने के लिए एनडीआरएफ और नौसेना की टीमें मुस्तैद थीं. आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय इलाकों पर हाई अलर्ट जारी किया गया था।

भूकंप के चपेट में पूर्वोत्तर भारत

भूकंप के चपेट में पूर्वोत्तर भारत

12 सितंबर, बुधवार का दिन भी पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों खासकर बिहार, पश्चिम बंगाल में सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता 5.5 थी। भूकंप का केंद्र असम का कोकराझार बताया गया है। भूकंप आने के बाद कई क्षेत्रों में हलचल मच गई। लोग अपने-अपने घरों से बाहर सुरक्षित स्थानों पर आ गए। हालांकि किसी के जान-माल के खतरे की कोई खबर नहीं मिली। इससे पहले म्यांमार-भारत (अरुणाचल प्रदेश) सीमा क्षेत्र म आज भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, रिक्टर स्केल पर यह तीव्रता 5.5 की मापी गई थी। हालांकि इस भूकंप में कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई।

भूस्खलन में चली गई 17 लोगों की जान

भूस्खलन में चली गई 17 लोगों की जान

इस साल पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश को भी भारी तबाही का सामना करना पड़ा है। राज्य में सबसे ज्यादा तबाही भूस्खलन से हुई है। 22 अप्रैल को राज्य के तवांग जिले में हुए भूस्खलन में कम से कम 17 लोगों की मौत हुई थी। जबकि कई लोग घायल भी हुए थे। यह घटना उस समय हुई जब सभी श्रमिक शिविर पर गिर गया। उन्होंने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब श्रमिक गहरी नींद में सो रहे थे। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोगों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया था।

उत्‍तराखंड के टिहरी में बादल फटने से भूस्खलन, 3 की मौत

उत्‍तराखंड के टिहरी में बादल फटने से भूस्खलन, 3 की मौत

अक्सर प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में रहने वाला राज्य उत्तराखंड के टिहरी में बादल फटने और भूस्खलन होने से 3 लोगों की मौत हो गई। यह घटना टिहरी के घनसाली के कोट गांव में हुआ था। इसके अलावा कोट गांव में बादल भी फटे थे जिसकी वजह से तबाही मची थी। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में भी इस साल भूस्खलन की घटना देखने को मिली थी। सितंबर महीने में जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुई भूस्खलन की घटना में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई।

प्रदूषण ने जीना किया हराम

प्रदूषण ने जीना किया हराम

देश की राजधानी दिल्ली के लिए भी यह साल काफी खतरनाक साबित हुआ। खासकर प्रदूषण की वजह से। दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में जाने की वजह से लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई। एक समय तो ऐसा आया जब दिल्ली-एनसीआर के ज्यादातर हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) गंभीर स्तर पर बना रहा। पिछले कुछ सालों से दिल्ली-एनसीआर में सर्दी के मौसम में धुंध और भीषण वायु प्रदूषण की समस्या अब आम हो चुकी है। इस साल राजधानी में जहरीली हवा का जो स्तर साल के कुछ हफ्तों में देखने को मिला वो काफी खतरनाक रहा। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने मार्च और मई 2018 के दौरान 24 घंटे के औसत स्तर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पीएम 2.5 स्तर का वायु प्रदूषण दर्ज किया है। एनसीआर के क्षेत्रों में 13 जून, 2018 को एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू 999 दर्ज किया गया था। मार्च और मई 2018 के बीच दिल्ली को एक दिन के लिए भी अच्छी गुणवत्ता वाली हवा नसीब नहीं हुई। पीएम 2.5 से इंसानों के लिए गंभीर खतरा है। ये महीन कण फेफड़ों में गहराई तक चले जाते हैं, जिससे दिल का दौरा, स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर और सांस संबंधी रोग हो सकते हैं।

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English summary
Year Ender 2018: Dangerous Natural Calamities in india
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