World Turtle Day: कछुए की 25 देशी प्रजातियों के 'विलुप्त' होने का खतरा, जानें क्या है वजह?
World Turtle Day:देश में कछुओं की अनेकों प्रजातियां हैं। इनमें से अधिकांश आज संकट के दौर से गुजर रहे हैं। क्योंकि, इनका जमकर अवैध कारोबार चल रहा है।

23 मई को दुनिया 'विश्व कछुआ दिवस' मनाती है, लेकिन देश में कछुओं की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि इसकी 29 देशी प्रजातियों में से 25 पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। इनके विलुप्त होने के खतरे को देखते हुए इन 25 देशी प्रजातियों को 'रेड जोन' में डाल दिया गया है। इन देशी कछुओं का धड़ल्ले से गैर-कानूनी कारोबार चल रहा है।

25 देशी प्रजातियों के कछुओं पर संकट
ट्रैफिक इंडिया की ओर से देश में कछुओं की देशी प्रजाति को लेकर जो आंकड़े उपलब्ध करवाए गए हैं, वह बहुत ही चिंताजनक हैं। यह यूनाइटेड किंगडम स्थित वाइल्डाइफ ट्रेड मॉनिटरिंग नेटवर्क ऑफ द इंटरनेशनल यूनियन फॉर कनजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) से जुड़ी संस्था है।

कुछ राज्य बन चुके हैं कछुआ तस्करी के केंद्र
कछुओं की 29 में से 25 देशी प्रजातियों पर यह संकट इनके अवैध शिकार और गैर-कानूनी कारोबार की वजह से आया है। इसके मुताबिक कुछओं की कुछ लुप्तप्राय प्रजातियों की मुख्य रूप उत्तर प्रदेश और पश्चिम बगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों के माध्यम से तस्करी की जा रही है। यह वे राज्य हैं, जिनकी सीमाएं नेपाल, बांग्लादेश और उत्तरपूर्वी इलाकों से मिलती हैं।

'कछुओं से जुड़े कुछ तथ्य बहुत विचलित करने वाले हैं'
कछुओं की देशी प्रजाति की तस्करी का केंद्र सिर्फ कुछ सीमावर्ती राज्य ही नहीं बन रहे हैं, बल्कि मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भी इसके लिए कुख्यात माने जाने लगे हैं। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रैफिक इंडिया के कोऑर्डिनेटर मर्विन फर्नांडीस ने कहा है,
'23 मई को हम विश्व कछुओ दिवस मनाते है, हम कुछ विचलित करने वाले तथ्य देख रहे हैं। आईयूसीएन ने 29 में से 25 प्रजातियों- दो टॉर्टोइस और बाकी ताजे पानी के टर्टल को भारत में रेड लिस्ट में डाल दिया है। कई अन्य प्रजातियों को भारतीय वन्यजीव संरक्षण कानून के शेड्यूल I में रख दिया है। शीर्ष पर लाल मुकुट धारी कछुआ को गंभीर खतरे वाली श्रेणी में रखा गया है '

10 साल में एक लाख 10 हजार से ज्यादा कछुओं की तस्करी
फर्नांडीस ने जो आंकड़े दिए हैं, उसके मुताबिक सितंबर 2009 से 2019 के बीच देश के 19 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होकर कम से कम 1,11,310 कुछओं का अवैध कारोबार हुआ है। और हर साल इस काले धंधे में 11,000 से ज्यादा लोगों का नेटवर्क काम कर सकता है।

यूपी-बंगाल से सबसे अधिक बरामदगी
उनका का कहना है कि जितनी भी बरामदगी हुई है, उसमें 60% से अधिक अकेले उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से हुए हैं। जो 14 देशी प्रजातियां इस कारोबार का हिस्सा पाई गई हैं, उनमें इंडियन स्टार टॉर्टोइस 49% हैं। इसके बाद इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल का नंबर है, अवैध कारोबार में इनका हिस्सा 26% है। वहीं इंडियन फ्लैपशेल टर्टल 15% और स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल 9% गलत लोगों के हाथों में पड़ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के 17 जिलों से रिकॉर्ड बरामदगी
अमेरिका के टर्टल सर्वाइवल अलायंस की प्रोजेक्ट बायोलॉजिस्ट श्रीपर्णा दत्ता के मुताबिक, '9,000 से ज्यादा ताजे पानी के कछुए अगस्त 2020 से लेकर फरवरी, 2021 के बीच उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल से बरामद हुए हैं। सबसे रिकॉर्ड बरामदगी यूपी के 17 जिलों से की गई हैं। यूपी के इटावा, मैनपुरी, आगरा, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अमेठी, उन्नाव, कानपुर, गोंडा, बहराइच और पीलीभीत इसके प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।'

दत्ता ने जानकारी दी है कि गंगा और महानदी बेसिन के आसपास की रेलवे और सड़कें तस्करों के लिए पसंदीदा रास्ते हैं। 'वे कछुओं का इस्तेमाल मीट, परंपरागत दवाई बनाने, काले जादू के लिए और पालतू बनाकर रखने के लिए करते हैं।' (कुछ तस्वीरें प्रतीकात्मक)












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