विश्व साक्षारता दिवस: यही हालात रहे तो भारत को लक्ष्य हासिल करने में लगेंगे 45 साल

नई दिल्ली। आज सितंबर महीने की 8 तारीख है। आज के दिन दुनिया विश्व साक्षारता दिवस के रूप में मनाती है।

Literacy Day

इस बार दुनिया 50वां साक्षरता दिवस मना रही है। यह दिवस पहली बार 1966 में मनाया गया था जब यूनेस्को ने 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया था।

इस बार साक्षरता दिवस पर पेरिस में 8-9 सितंबर को कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है।

यूनेस्को ने विश्व समुदाय में व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक रूप से साक्षारता को एक औजार के तौर पर प्रोत्साहित करने के लिए इसकी घोषणा की थी।

बात भारत की करें तो हालात फिलहाल ये हैं कि हम अपने पड़ोसी मुल्क नेपाल से भी पीछे हैं।

तो लक्ष्य हासिल करने में लग जाएंगे 45 साल

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2011 की जनगणना के अनुसार भारत की साक्षरता दर 74 फीसदी है। यूनेस्को के अनुसार भारत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा अनपढ़ों का मुल्क है।

बीते साल राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) की ओर से जारी किए गए आंकड़ो के मुताबिक देश के शहरी क्षेत्रों में साक्षरता दर जहां 86 फीसदी थी वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 71 फीसदी तक ही सीमित रहा।

अगर हमारी साक्षरता दर में विकास इसी दर से रहा तो हमें वैश्विवक लक्ष्य को पाने में कम से कम 45 साल लगेंगे। साल 2011 में संपन्न हुई जनगणना के मुताबिक देश में साक्षरता दर 9.2 फीसदी की दर से बढ़ी है।

यूनेस्को के अनुसार दुनिया भर में करीब 78 करोड़ लोग अशिक्षित हैं।

इन 78 करोड़ लोगों का 75 फीसदी केवल इन 10 देशों में है जिनमें भारत, चीन, बांग्लादेश, नाइजीरिया, पाकिस्तान, इथियोपिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और कांगो शामिल है।

हालांकि इन 10 मुल्कों में से कुछ ऐसे भी हैं जिनकी साक्षरता दर बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। इसमें नेपाल, इथोपिया और बांग्लादेश शामिल है।

वो देश जहां है 100 फीसदी लोग साक्षर

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आंकड़ो के अनुसार 1990 में नेपाल की साक्षरता दर 33 फीसदी थी जो 2015 में बढ़कर 66 फीसदी हो गई है। इसी तरह बांग्लादेश की साक्षारता 1990 में जो 35.3 फीसदी थी वो 2015 में बढ़कर 61 फीसदी हो चुकी है।

बात इथोपिया की करें तो यहां भी 1990 में साक्षरता दर 27 फीसदी थी लेकिन 2015 में बढ़कर यह आंकड़ा 49.1 फीसदी हो चुकी है। 1990 में भारत में साक्षरता दर 48.2 फीसदी थी।

हालांकि कुछ ऐसे देश भी हैं जहां साक्षरता दर 100 फीसदी है लेकिन इन्हें आप उंगलियों पर गिन सकते हैं। इसमें एंडोरा, फिनलैंड, लग्जमबर्ग, ग्रीनलैंड और नार्वे शामिल है।

भारत का यह हाल क्यों?

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यहां यह सवाल जरूर उठता है कि जो देश 1990 से लेकर अब तक किन्हीं न किन्हीं कारणों से अस्थिरता का शिकार थे उनकी साक्षरता दर भारत से कैसे बढ़ गई या फिर उनकी दर में वृद्धि इतनी तेजी से कैसे हुई तो इस सवाल का जवाब जान लीजिए।

भारत में साक्षरता दर कम होने की सबसे बड़ी वजह है महिलाओं का कम साक्षर होना।

मौजूदा वक्त में भारत में पुरुषों की साक्षरता दर जहां 81 फीसदी है वहीं महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 65 फीसदी है। हालांकि महिलाओं की साक्षरता की दशा दिशा में बीते कुछ समय में काफी सुधार हुआ है लेकिन अब भी अंतर बहुच ज्यादा है।

बता दें कि सन् 1990 में 61.6 फीसदी पुरुष शिक्षित थे तो महिलाएं सिर्फ 33.7 फीसदी। सन् 2000 में 74 फीसदी पुरुष शिक्षित थे तो वहीं 47.8 फीसदी महिलाएं।

2011 की जनगणना के अनुसार भारत में केरल 93.91 फीसदी दर के साथ सबसे ज्यादा साक्षर राज्य है, इसके बाद लक्ष्यद्वीप (92.28 फीसदी), मिजोरम (91.58 फीसदी), त्रिपुरा (87.75 फीसदी ) और गोवा (87.40 फीसदी ) हैं।

बिहार और तेलंगाना दो ऐसे राज्य हैं जिनकी साक्षरता दर सबसे कम है। बिहार में यह दर दहां 63.82 फीसद है वहीं तेलंगाना 66.50 फीसदी साक्षर है।

पड़ोसियों से कितने करीब हैं हम

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भारत भले ही विकसित देशों की सूची में देखें तो साक्षरता दर में बहुत पीछे है लेकिन विकासशील देशों की लिस्ट में उसकी स्थिति बेहतर है।

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में जहां 79 फीसदी पुरुष 61 फीसदी महिला और 71 फीसदी युवा साक्षर हैं वहीं भारत में पुरुष 88 फीसदी, महिला 74 फीसदी और युवा पीढ़ी के साक्षर होने का प्रतिशत 81 फीसदी है।

बात नेपाल की करें तो यह मुल्क भारत से बराबरी जरूर कर रहा है। यहां पुरुष 88 फीसदी,महिलाएं 78 और युवा पीढ़ी 83 फीसदी साक्षर है।

भूटान भी भारत से कहीं ज्यादा पीछे नहीं है। यहां 80 फीसदी पुरुष, 68 फीसदी महिलाए और 74 फीसदी युवा साक्षर हैं।

बांग्लादेश के हालांकि हालत बहुत अच्छे नहीं है फिर भी वो भारतत से बहुत ज्यादा पीछे नही है। यहां पुरुषों की साक्षरता दर 75 फीसदी,महिलाओं की 78 फीसदी और युवाओं की 77 फीसदी साक्षरता दर है।

बता दें कि यूनेस्को की ग्लोबाल एजुकेशन मॉनिटरिंग (जीईएम) रिपोर्ट के अनुसार भारत 2050 में प्राइमरी शिक्षा, 2060 में माध्यमिक शिक्षा और 2085 में उच्च माध्यमिक शिक्षा का वैश्विक लक्ष्य हासिल करने में कामयाब होगा।

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