• search

शादी के चार सालों तक पत्‍नी से जबरदस्‍ती करता रहा 'ओरल सेक्‍स', महिला पहुंची सुप्रीम कोर्ट

By Ankur Kumar Srivastava
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    नई दिल्‍ली। आईपीसी की धारा 377 को लेकर पूरे देश में चर्चा शुरू है क्‍योंकि मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने इसके प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किए जाने से जुड़ी याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। एक दिन बाद ही इससे जुड़ा एक मामला सामने आ गया है। एक महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया है कि शादी के चार सालों के दौरान उसके पति ने उसके साथ जबरदस्ती 'अप्राकृतिक' मौखिक (ओरल) सेक्स किया। महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एनवी रामना और एमएम शांतनागौदर ने आरोपी पति को नोटिस जारी किया है।

    महिला की इस याचिका ने 377 के प्रावधानों को अपराध न माने जाने में होगी उलझन

    महिला की इस याचिका ने 377 के प्रावधानों को अपराध न माने जाने में होगी उलझन

    महिला की ओर से वकील अपर्णा भट्ट ने दलील दी कि पत्नी पर ओरल सेक्स के लिए दबाव बनाना धारा 377 के तहत अपराध है और प्रकृतिक भी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने मंगलवार को सेक्शन 377 से जुड़ीं याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान बेंच के सदस्य जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सहमति से ओरल सेक्स और ऐनल सेक्स को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता और न ही इसे अप्राकृतिक माना जा सकता है लेकिन महिला की याचिका 377 के प्रावधानों को अपराध न माने जाने के मुद्दे को और उलझाने का काम कर रही है।

    पति अपनी इच्छाओं के खिलाफ मौखिक सेक्स करने को मजबूर करता था

    पति अपनी इच्छाओं के खिलाफ मौखिक सेक्स करने को मजबूर करता था

    पीड़ित महिला ने बताया कि उसकी शादी 2014 में हुई थी, जबकि उसकी सगाई साल 2002 में ही हो गई थी, जब वह महज 15 साल की थी। महिला ने शिकायत की है कि उसका डॉक्टर पति अक्सर उसे अपनी इच्छाओं के खिलाफ मौखिक सेक्स करने को मजबूर करता था। महिला ने अपने पति के खिलाफ बलात्कार और अप्राकृतिक सेक्स करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराया था। तब, गुजरात हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि धारा-375 के तहत वैवाहिक बलात्कार का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही कोर्ट ने धारा-377 के तहत भी महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया था।

    क्‍या है आईपीसी की धारा 377

    क्‍या है आईपीसी की धारा 377

    भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में समलैंगिकता को अपराध बताया गया है। आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक जो कोई भी किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ प्रकृति की व्यवस्था के खिलाफ सेक्स करता है तो इस अपराध के लिए उसे 10 वर्ष की सजा या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा। उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है और यह गैर जमानती है।

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    At a time when the Supreme Court has reserved its verdict on pleas for decriminalisation of Section 377 of IPC, a woman has moved the SC seeking fastening of the stringent provision against her husband for forcing her to perform "unnatural" oral sex during their four years of marriage.

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more