किन तर्कों के सहारे आरोपों के 'स्विमिंग पूल में तैरेंगे' एमजे अक़बर?
'मुझे तैरना तक नहीं आता और मुझ पर स्विमिंग पूल में पार्टी करने के आरोप लग रहे हैं.'
#MeToo अभियान के तहत अपने साथ हुए उत्पीड़न की कहानियां जब महिलाओं ने साझा की तो इसकी आंच केंद्रीय मंत्री मोबाशर जावेद यानी एमजे अक़बर तक भी पहुंची.
नाइजीरिया से भारत लौटे अक़बर ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए बयान जारी किया. इसके कुछ ही घंटों में अक़बर ने आरोप लगाने वाली महिला प्रिया रमानी पर मानहानि का मुक़दमा भी कर दिया.
#MeToo अभियान में अब तक सोशल मीडिया के निशाने पर रहे एमजे अक़बर ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर और कोर्ट में किए मुक़दमे में अपना पक्ष रखा है.
इनमें अक़बर की सफ़ाई भी शामिल है और वो तर्क भी, जिनके आधार पर अक़बर महिलाओं के आरोपों के झूठे होने का दावा कर रहे हैं.
1.छवि धूमिल
मुकदमा: एमजे अकबर के वकीलों ने प्रिया रमानी की तरफ़ से अक़बर को लेकर किए ट्वीट्स का ज़िक्र किया है. इन ट्वीट्स के आधार पर जिन मीडिया संस्थानों ने ख़बरें की थीं, उन ख़बरों को अक़बर के वकीलों की तरफ से मानहानि के सबूत के तौर पर पेश किया गया. कहा गया- ट्विटस और लेखों की वजह से अक़बर की साख को नुकसान हुआ है.
अक़बर का बयान: विदेश दौरे में होने के चलते मैं देर से जवाब दे पा रहा हूं. कुछ तबकों में बिना सबूत आरोप लगाना आम बात हो गई है. मुझ पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं.
प्रिया रमानी: मैं अपने ख़िलाफ़ दायर किए मानहानि केस को लड़ने के लिए तैयार हूँ. सच और सिर्फ़ सच ही मेरा बचाव है.
https://twitter.com/priyaramani/status/1051817717467045890
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2. अक़बर के 'दरबार' में कौन-कौन गवाह?
मुक़दमा: एमजे अक़बर की तरफ़ से छह गवाहों के नाम कोर्ट में दिए गए हैं. ये छह लोग अक़बर की तरफ़ से गवाही देंगे. इनमें संपादक जॉयिता बसु और वीनू संदाल का नाम शामिल है.
अक़बर का बयान: आरोप लगाने वाली शुतापा पॉल ने कहा, ''मैंने कभी उन्हें हाथ नहीं लगाया. शुमा राहा कहती हैं, ''मैं ये स्पष्ट कर दूं कि उन्होंने असल में कभी कुछ नहीं किया.'' एक दूसरी महिला अंजू भारती दावा करती हैं, ''अक़बर स्विमिंग पूल में पार्टी कर रहे थे.'' मैं तो तैरना भी नहीं जानता. मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हुए एक आरोप गजाला वहाब ने लगाया है. गजाला दावा करती हैं कि 21 साल पहले उनका उत्पीड़न हुआ. ये मेरे सार्वजनिक जीवन में आने से 16 साल पहले की बात है, तब मैं मीडिया में था. मैंने गजाला के साथ सिर्फ़ एशियन एज में काम किया. तब मैं प्लाईवुड और ग्लास के छोटे चैंबर में बैठता था. बाक़ी लोगों से मेरे चैंबर की दूरी सिर्फ़ दो फुट थी. इस बात पर यक़ीन नहीं किया जाता कि बाक़ी लोगों को इस बारे में पता न चले. ये आरोप निराधार हैं.
प्रिया रमानी: औरतों के इरादों पर शक करने की बजाय हमें ये कोशिश करनी होगी कि कैसे वर्क प्लेस को अपनी आने वाली पीढ़ी के पुरुष और औरतों के लिए बेहतर जगह बनाएं.
जिन अंजू भारती ने एमजे अक़बर पर पूल में पार्टी करते हुए 'फन' करने की बात कही थी, इस ख़बर को लिखे जाने तक वो ट्विटर से डिएक्टिवेटड हैं. शुतापा पॉल की ओर से अक़बर के बयान और मुक़दमा करने के बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि उनके 10 अक्टूबर को किए गए ट्वीटस अब भी मौजूद हैं.
https://twitter.com/ShutapaPaul/status/1049976493713973249
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3. देर से शिकायत और 'एजेंडा'
मुक़दमा: अक़बर की ओर से कहा गया- एक ख़ास एजेंडे के तहत झूठ बोलकर मुझे फँसाने की कोशिश हुई.
अक़बर का बयान: गजाला ने कहा कि उन्होंने पेपर के लिए फीचर लिखने वाली वीनू संदाल से शिकायत की थी. इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में संदाल ने गजाला के पक्ष को ख़ारिज किया. संदाल ने कहा कि उन्होंने 20 साल में मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं सुना. यहां इस बात का ज़िक्र करना ज़रूरी है कि इन कथित घटनाओं के बाद भी प्रिया और संदाल ने मेरे साथ काम करना जारी रखा. इससे ये साफ़ है कि वो किसी भी तरह से कथित घटना के बाद असहज नहीं थीं. वो सालों तक क्यों चुप रहीं, ये प्रिया की इस बात से साफ़ है कि 'मैं कुछ नहीं किया.' आम चुनावों से पहले ये तूफ़ान अचानक कैसे आया? क्या कोई एजेंडा है? आप खुद समझदार हैं.
प्रिया रमानी: औरतें अब क्यों बोल रही हैं, मुझे इस बात में चालाकी नज़र आ रही है. तब जबकि हम जानते हैं कि यौन उत्पीड़न की पीड़िता को क्या क्या झेलना पड़ता है. मुझे इस बात से बेहद निराशा हुई है कि एमजे अक़बर ने कई महिलाओं के आरोपों को राजनीतिक साजिश बताकर ख़ारिज कर दिया.
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4. महिलाओं के आरोपों पर अक़बर का जवाब
मुक़दमा: वकीलों का कहना है कि आरोप लगाने वाली प्रिया रमानी ने खुद माना है कि 20 साल पुराने इस मामले में अक़बर ने उनके साथ कुछ नहीं किया था. प्रिया ने अक़बर पर आरोप लगाने वाले लेख से पहले कभी कहीं किसी अथॉरिटी के पास शिकायत नहीं की. अक़बर के ख़िलाफ़ जिस कथित घटना को लेकर आरोप लगाए गए हैं, वो सिर्फ़ इस लेख पर आधारित हैं. ये लेख प्रिया की कल्पनाओं पर आधारित है.
अक़बर का बयान: प्रिया रमानी ने एक साल पहले एक मैगजीन के लेख से इस अभियान की शुरुआत की थी. वो जानती थीं कि ये झूठी कहानी है, इसलिए उन्होंने 2017 में मेरा नाम उस लेख में नहीं लिखा था. हाल ही में जब उनसे पूछा गया कि मेरा नाम क्यों नहीं लिया था? एक ट्वीट के जवाब में वो कहती हैं, ''मैंने उनका नाम नहीं लिया क्योंकि उन्होंने कुछ नहीं 'किया' था.'' अगर मैंने कुछ नहीं किया था तो कहानी क्या है? ये कोई कहानी है ही नहीं.
प्रिया रमानी: जब ये घटनाएँ हुईं थीं, तब आरोप लगाने वाली तमाम महिलाएं अक़बर के साथ एक ही दफ्तर में काम करती थीं.
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5. परिवार, दोस्त और समाज
मुक़दमा: एमजे अक़बर की ओर से ये कहा गया कि झूठे आरोप लगाकर राजनीतिक बिरादरी, मीडिया, दोस्तों, परिवार और समाज में उनकी छवि को नुकसान हुआ है. इन आरोपों के बाद अक़बर को दोस्तों, परिवार, राजनीति और मीडिया से काफी फ़ोन किए गए. इन फ़ोन कॉल्स में झूठे आरोपों को लेकर सवाल किए गए. इन आरोपों से अक़बर की छवि को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नहीं हो सकती.
अक़बर का बयान: मैं अब भारत लौट आया हूं. मेरे वकील इन बेबुनियाद आरोपों की जांच करेंगे और लीगल एक्शन लेंगे.
https://twitter.com/mjakbar/status/1051452381983068161
प्रिया रमानी: जिन औरतों ने अक़बर के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है, उन्होंने अपनी निजी और प्रोफेशनल ज़िंदगी में बड़ा जोख़िम उठाया है.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, एमजे अक़बर की ओर से दायर मानहानि केस की सुनवाई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में 18 अक्टूबर को हो सकती है.












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