• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

अयोध्या विवाद में पुनर्विचार याचिका से कुछ बदलेगा?

By सर्वप्रिया सांगवान

सुप्रीम कोर्ट
Getty Images
सुप्रीम कोर्ट

अयोध्या ज़मीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने नौ नवंबर को सर्वसम्मति से फ़ैसला दिया था. फ़ैसले में विवादित ज़मीन हिंदू पक्ष को दी गई, सरकार से मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने के लिए कहा गया और मुसलमान पक्ष को अयोध्या में किसी और जगह 5 एकड़ ज़मीन देने का आदेश दिया गया.

इस फ़ैसले के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डालने का फ़ैसला किया है.

बोर्ड के सचिव ज़फ़रयाब जिलानी के मुताबिक़ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में कई बिंदुओं पर विरोधाभास लगता है और उनके अनुसार कई बिंदुओं पर ये फ़ैसला समझ से परे है.

हालांकि मुख्य पक्षकार इक़बाल अंसारी फ़िलहाल बोर्ड के इस फ़ैसले से दूरी बनाए हुए हैं.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
Getty Images
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

तो अब जानते हैं कि इस मामले में आगे क्या होने की गुंजाइश है. इसके लिए हमने बात की सुप्रीम कोर्ट के वकील और 'अयोध्याज़ राम टेम्पल इन कोर्ट्स' किताब के लेखक विराग गुप्ता से.

विराग के मुताबिक़ संविधान के अनुच्छेद 141 के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला देश में सभी पर लागू होता है. लेकिन संविधान के अनुच्छेद 137 में ये प्रावधान है कि अगर किसी फ़ैसले में कोई स्पष्ट और प्रकट ग़लती हो तो उसके ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका दायर की जा सकती है.

कौन डाल सकता है रिव्यू पिटीशन?

वैसे लोग सवाल ये उठा रहे हैं कि इस मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तो मुख्य पक्षकार नहीं थे, तो अब वो पुनर्विचार याचिका कैसे डाल सकते हैं.

इसका जवाब ये है कि सामान्य तौर पर जो लोग मुख्य मामले में पक्षकार होते हैं, वे लोग ही पुनर्विचार याचिका दायर करते हैं. लेकिन सबरीमाला मामले में 50 से ज्यादा पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थी, जिनमें नए पक्षकार शामिल थे.

सबरीमला
Getty Images
सबरीमला

आर्टिकल 377 मामले में भी पुनर्विचार याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट ने 'रिट' पीटिशन पर भी विचार किया यानी नई याचिकाओं पर. तो अगर ये नई परंपरा शुरू हुई है तो अयोध्या मामले में भी रिव्यू पीटिशन के साथ नई याचिका दायर किए जाने पर रोक नहीं है.

दूसरी बात ये है कि अयोध्या मामला मुस्लिम और हिंदू पक्षों के बीच एक सिविल विवाद था इसलिए इस फैसले से प्रभावित कोई भी व्यक्ति पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है. इस याचिका को स्वीकार या अस्वीकार करना सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच का विशेषाधिकार है.

क्या याचिका दाख़िल हो ही जाएगी?

ये भी ध्यान रखा जाए कि पुनर्विचार याचिका मुख्य फैसले के ख़िलाफ़ अपील नहीं है, बल्कि ग़लतियों को ठीक करने की एक क़ानूनी प्रक्रिया है.

इसका मतलब इस मामले पर पहले इस बात पर सुनवाई होगी कि कोर्ट को ये याचिका स्वीकार करनी है या नहीं. इसके लिए मुस्लिम पक्ष को कोई ठोस वजह देनी होगी, कोई नया तर्क या क़ानून कोर्ट के सामने रखना होगा. वो क्या होगा, अभी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ये स्पष्ट नहीं किया लेकिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को ही रखे जाने की बात कही है.

अगर कोर्ट याचिका को स्वीकार कर लेता है तो उसके बाद सुनवाई होगी कि क्या फ़ैसले में कोई बदलाव होगा या पहले वाला ही जारी रहेगा. यानी ये इतना आसान नहीं होने वाला है.

जस्टिस बोबडे और जस्टिस रंजन गोगोई
Getty Images
जस्टिस बोबडे और जस्टिस रंजन गोगोई

कौन करेगा सुनवाई?

क़ानून के मुताबिक़ तो जिन जजों ने फैसला दिया है, उन्हें ही पुनर्विचार याचिका सुननी चाहिए. लेकिन पूर्व चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई अब रिटायर हो गए हैं, इसलिए पुनर्विचार याचिका पर नए चीफ़ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे की अध्यक्षता में पांच जजों की नई बेंच सुनवाई करेगी जिसमें चार पुराने जज और एक नए जज को शामिल किया जाएगा. नए जज के चयन पर फैसला जस्टिस बोबडे ही लेंगे.

एक व्यक्ति एक ही पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है लेकिन अन्य लोगों के दायर करने पर कोई रोक नहीं है. सामान्य तौर पर पुनर्विचार याचिका पर बंद कमरे में ही विचार होता है, लेकिन पक्षकार इस पर ओपन कोर्ट में सुनवाई की मांग कर सकते हैं.

संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत 'सुप्रीम कोर्ट नियम 2013' बनाए गए हैं जिसके मुताबिक़ फ़ैसला आने के बाद एक महीने के अंदर पुनर्विचार याचिका दायर की जा सकती है.

ये फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था यानी सभी 5 जजों की सहमति से, इसलिए पुनर्विचार याचिका के बाद फ़ैसले में बदलाव आसान नहीं होगा.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Will the reconsideration petition in Ayodhya dispute change anything?
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X