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क्या दुनिया के देशों का खजाना खाली कर देगा कोरोना संकट?

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कोरोना संकट

कोरोना वैक्सीन: ऑक्सफोर्ड ही नहीं, ये 6 वैक्सीन भी पहुंच चुकी हैं थर्ड फेज के ट्रायल में

कोरोना की विनाशलीला सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह महामारी मानव जीवन पर सबसे बड़ा संकट है। अभी तक दुनिया के 186 देश इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। इन 186 देशों में करीब 3 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं । करूब 12 हजार लोगों की जान जा चुकी है। (श्रोत- वर्ल्डओमीटर वेबसाइट) ये आंकड़ा गुरुवार का है जो लगातार बढ़ रहा है। मौत का तांडव कब खत्म होगा, ये कोई नहीं जानता। फिलहाल इस बीमारी का कोई कारगर इलाज नहीं है। इस बीमारी से निबटने के लिए दुनिया भर के देश पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। कोरोना जैसे अदृश्य दुश्मन से कब तक लड़ना होगा, कितना पैसा खर्च करना होगा ये बिल्कुल नहीं मालूम। इससे यह आशंका जतायी जा रही है कि ये बीमारी कहीं दुनिया को कंगाल न बना दे। कई देशों का खजाना कहीं खाली न हो जाए। चीन, इटली, जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, ब्रिटेन, स्वीडन, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने कोरोना से निबटने के लिए 74 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनायी है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद खर्च होने वाली यह दूसरी सबसे बड़ी धनराशि है। इतना ही नहीं लॉकडाउन के चलते प्रभावित देशों में जनजीवन ठप हो गया है। आर्थिक ढांचा भी चरमरा गया है।

कोरोना कंगाल न बने दे दुनिया को

कोरोना कंगाल न बने दे दुनिया को

दूसरे विश्व युद्ध में दुनिया के 70 देश परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। ये लड़ाई छह साल तक चली थी। 75 साल पहले इस युद्ध में एक अनुमान के मुताबिक करीब 2 लाख 25 हजार अरब रुपये खर्च हुए थे। छह साल के दौरान अनुमानत: पांच करोड़ लोग मारे गये थे। यह मानव जनित तबाही थी जब कि करोना एक भयंकर बीमारी के रूप में प्रगट हुई है। 186 देशों में कोरोना के फैलने से इंसान की जिंदगी खतरे में पड़ गयी है। कब किस देश में यह महामारी विकराल रूप धारण कर ले कोई नहीं जानता। जब चीन इस महामारी से जूझ रहा था तब कोई नहीं जानता था कि एक दिन पूरी दुनिया में इसका संक्रमण फैल जाएगा। कारोबार के जरिये चीन के बुहान से कोरोना इटली पहुंचा। इरान में चीन के एक सोलर प्रोजेक्ट के वजह से यह यह बीमारी फैली। कोरोना वायरस के कारण इंसान को इंसान से ही खतरा उत्पन्न हो गया है। इटली में कोरोना ने एक दिन में 400 से अधिक लोगों की जिंदगी छीन ली। इटली में एक दिन की मौत का यह आंकड़ा दूसरे विश्वयुद्ध से भी अधिक है। वर्ल्ड वार के समय इटली में रोजना औसतन 207 लोगों की मौत हुई थी।

इटली में मौत का सन्नाटा

इटली में मौत का सन्नाटा

कोरोना की वजह से इटली में मौत का सन्नाटा है। यहां गुरुवार तक 4 हजार 32 लोगों की जान चुकी है। सबसे अधिक मौत इटली में ही हुई है। दूसरे स्थान पर चीन है जहां मौत का आंकड़ा 3 हजार 255 रहा। तीसरे स्थान पर इरान है जहां एक हजार पांच सौ छप्पन लोग जान गांवा चुके हैं। स्पेन में अभी तक एक हजार तीन सौ छब्बीस लोगों की मौत हुई है। चूंकि यह बीमारी चीन से ही पूरी दुनिया में फैली है इसलिए उसके मौत के आंकड़ों को विश्वसनीय नहीं माना जा रहा है। माना जा रहा है चीन विश्व विरादरी में अपनी इज्जत बचाने के लिए जानबूझ कर मौत के आंकड़े को काम दिखा रहा है। वैसे चीन में कोरोना संक्रमितों की संख्या अभी भी इटली से अधिक है। इटली में 12 मार्च से ही ल़ॉकडाउन है जो 25 मार्च तक प्रस्तावित है। लेकिन यह समय सीमा परिस्थितियों को देख कर बढ़ायी भी जा सकती है। इटली में लॉकडाउन इतना सख्त है कि बेजह घर से बाहर निकलने पर दंड या जेल की सजा हो जाती है। चीन ने क्वारंटाइन के जरिये ही इस जानलेवा बीमारी पर एक हद ताक काबू पाया था। चीन के हूबे प्रांत की राजधानी बुहान से ही कोरोना फैला था। तब चीन ने पूरे राज्य की करीब पांच करोड़ की आबादी के घर से बाहर निकलने या किसी से मिलने पर कठोर प्रतिबंध लगा दिया था। चीन में तो मौत का तांडव रुक गया लेकिन अब पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है।

निराशा में आशा की किरण

निराशा में आशा की किरण

वर्ल्डओमीटर वेबसाइट के मुताबिक दुनिया भर में अभी तक कोरोना संक्रिमत 93 हजार 535 लोगों को बचाया जा चुका है। यानी इस बीमारी से बचने की संभावना बनी हुई है। भारत में भी ग्यारह लोगों को इस बीमारी से बचाया गया है। अमेरिका में एंटी कोरोना टीका तैयार करने के लिए वैज्ञानिक शोध शुरू हो चुका है। हॉलैंड, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन में भी इस बीमारी की दवा के लिए रिसर्च जारी है। लेकिन अभी सब कुछ प्रारंभिक अवस्था में है। अभी जो कुछ हो रहा है वह भविष्य के लिए तैयारियां हैं। मौजूदा समय में कोरोना जिस तेजी से फैल रहा है उसके देख कर सेल्फ आइसोलेशन को ही बेहतर उपाय माना जा रहा है। भारत में पिछले तीन दिनों से कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 6 मार्च को भारत में संक्रमितों की संख्या केवल 31 थी जो 21 मार्च को 285 के पार पहुंच गयी। चूंकि यह छुआछूत की बीमारी है इसलिए अलग- थलग रहना बेहद जरूरी है।

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए केवल लॉकडाउन काफी नहीं- WHO

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English summary
Will the coronavirus crisis empty the treasury of the countries of the world?
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