तो क्या अब रामनवमी हर साल 10 जनवरी को मनायी जायेगी?

नई दिल्ली। भगवान राम के जन्म को लेकर अलग-अलग पुराणों में अलग-अलग बातें लिखी हुईं हैं लेकिन हमारे देश भारत में चैत्र मास की नवमी को भगवान राम का जन्मदिन मनाया जाता है, जिसे कि हम रामनवमी कहते हैं।

लेकिन दिल्ली में आयोजित ललित कला अकादमी में लगी शोध प्रदर्शनी के हिसाब से तो भगवान राम का जन्मदिन 10 जनवरी निकल कर सामने आया है जिसे अगर सच माना जाये तो भगवान राम चैत्र यानी मार्च में नहीं बल्कि जनवरी में जन्में थे।

आईये जानते हैं शोध की मुख्य बातों को...

  • इस शोधानुसार 5114 ईसा पूर्व 10 जनवरी को दिन के 12.05 पर भगवान राम का जन्म हुआ था।
  • इस प्रदर्शनी के अनुसार 13 अक्टूबर 3,139 ईसा पूर्व को महाभारत का युद्ध शुरू हुआ था।
  • हनुमानजी अशोक वाटिका में सीताजी से 12 सितम्बर 5076 ईसा पूर्व मिले थे।
  • प्रदर्शनी का आयोजन 'कल्चरल कांटिन्यूटी फ्रॉम ऋग्वेद टू रोबोटिक्स' नाम से किया गया है।
  • प्रदर्शनी में हड़प्पा सभ्यता से लेकर वैदिक और उत्तर वैदिक काल की चीजें पोस्टर के जरिये दिखाये गये हैं।

रामनवमी से जुड़ी कुछ खास बातों को जानिए स्लाइडों के जरिये...

रावण का संहार

रावण का संहार

रामनवमी, भगवान राम के जन्म दिवस के रूप में सम्पूर्ण भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि असुरों के राजा रावण का संहार करने के लिए भगवान विष्णु ने त्रेता युग में राम के रूप में विष्णु का सातवां अवतार लिया था।

बाल्मीकि रामायण

बाल्मीकि रामायण

बाल्मीकि रामायण के मुताबिक, राम का जन्म चैत्र मास की नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में अयोध्या के राजा दशरथ की पहली पत्नी कौशल्या के गर्भ से हुआ था। तब से यह दिन समस्त भारत में रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।

कनक भवन

कनक भवन

अयोध्या के प्रसिद्ध कनक भवन मंदिर में भगवान राम के जन्म को भव्य तरीके से मनाए जाने का रिवाज है। उनके जन्म के प्रतीक के रूप में विभिन्न मंदिरों में बधाई गीत और रामचरित मानस के बालकांड की चौपाइयों का पाठ किया जाता है।

किन्नरों को सम्मान

किन्नरों को सम्मान

किन्नरों के समूह भी भगवान राम के आगमन को महसूस करते हुए सोहर गाते हैं और नृत्य करते हैं। ऐसी मान्यता है कि किन्नरों को बच्चों के जन्म पर गाने का अधिकार भगवान राम के जन्म के बाद ही मिला था इसलिए जिस घर में बच्चे जन्म लेते हैं वहां किन्नरों का आना शुभ माना जाता है।

सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक दोनों महत्व

सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक दोनों महत्व

इस अवसर पर पूजा के अलावा व्रत का भी विधान है जिसका सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक दोनों महत्व है। आमतौर पर घरों एवं मंदिरों में रामदरबार का आयोजन कर उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस व्रत से श्रद्धालु भक्ति के साथ मुक्ति भी प्राप्त करते हैं।

चारों ओर गणपति बप्पा मोरया.. की धूम, देखें तस्वीरें..

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