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पहलवानों की नाराजगी नहीं, ये है WFI की नई बॉडी को सस्पेंड करने का सबसे कारण!

Wrestling Federation of India News: केंद्रीय खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की नवनिर्वाचित कार्यकारी समिति (EC) को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को महासंघ के संचालन को चलाने के लिए एक समिति बनाने का निर्देश दिया है।

आम जनता को ऐसा लगा कि WFI की नई बॉडी को सस्पेंड करने का फैसला कुश्ती में ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की एकमात्र महिला साक्षी मलिक और पहलवान बजरंग पुनिया की नाराजगी की वजह से लिया गया है। लेकिन अब इसकी असली वजह सामने आई है।

Wrestling Federation of India

असल में WFI की नवनिर्वाचित कार्यकारी समिति को सस्पेंड करने का खेल मंत्रालय का फैसला साक्षी मलिक द्वारा चुनाव परिणामों के कारण खेल से संन्यास लेने की घोषणा और बजरंग पुनिया द्वारा अपना पद्म श्री पुरस्कार लौटाने के कुछ दिनों बाद आया था। जिससे लोगों को लगा कि यही इसे निलंबित करने का सबसे बड़ा कारण है।

खेल मंत्रालय ने बताया क्यों किया सस्पेंड?

लेकिन ये पूरा मामला तब ट्रिगर तब हुआ जब WFI के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह ने 21 दिसंबर की शाम को उत्तर प्रदेश के गोंडा में - बृजभूषण शरण सिंह के निर्वाचन क्षेत्र कैसरगंज से 50 किमी से भी कम दूरी पर अंडर -15 और अंडर -20 के नेशनल खेल की घोषणा की। संजय सिंह ने ये फैसला ठीक उसी दिन लिया जिस दिन वो अनीता श्योराण को 40-7 के अंतर से हराकर डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बने थे।

खेल मंत्रालय ने कहा कि अध्यक्ष बनने के कुछ घंटे बाद ही इतना बड़ा फैसला लेना "जल्दबाजी" है। मंत्रालय ने कहा कि नेशनल के संभावित प्रतिभागियों को सूचित नहीं किया गया था और यह घोषणा स्वयं डब्ल्यूएफआई के संविधान का उल्लंघन थी।

मंत्रालय ने कहा, ''WFI के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह ने 21.12.2023 को, जिस दिन उन्हें अध्यक्ष चुना गया था, घोषणा की कि कुश्ती के लिए अंडर-15 और अंडर-20 नेशनल प्रतियोगिताएं नंदिनी नगर, गोंडा (यूपी) में होंगी। यह घोषणा जल्दबाजी में की गई है। नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले पहलवानों को सूचना दिए बिना और डब्ल्यूएफआई के संविधान के प्रावधानों का पालन किए बिना ये फैसला किया गया था। जो नियमों का उल्लंघन है।''

खेल मंत्रालय ने पाया कई नियमों का हुआ उल्लंघन

मंत्रालय ने अपने ईसी द्वारा डब्ल्यूएफआई के स्वयं के संविधान के कई उल्लंघनों को भी नोटिस किया है। बैठक में डब्ल्यूएफआई के महासचिव प्रेम चंद लोचब की अनुपस्थिति के बिना नेशनल प्रतियोगिता का फैसला लिया गया था। लोचब 15 सदस्यीय ईसी में दो सदस्यों में से एक हैं जो विरोध करने वाले पहलवानों के खेमे से थे। दूसरे वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवेंदर कादियान हैं।

लोचब ने शुक्रवार को संजय सिंह को पत्र लिखकर नेशनल प्रतियोगिताओं को स्थगित करने को भी कहा था कि क्योंकि ये फैसला उनकी अनुपस्थिति में लिया गया था। उन्होंने कहा था कि, ''मुझे अभी तक उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला है। यह केवल आयोजन स्थल के बारे में नहीं है, यह उचित प्रक्रिया का पालन करने के बारे में है।''

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