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सेक्स को लेकर बच्चों में इतनी हड़बड़ाहट क्यों ?

By Bbc Hindi
फ़ाइल फोटो
Getty Images
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स्कूल के एक बच्चे ने सोशल मीडिया पर ऑनलाइन पोस्ट के ज़रिये अपनी ही टीचर की बेटी को अगवाकर रेप करने की धमकी दी.

मामला दिल्ली से सटे गुड़गांव (गुरुग्राम) के एक निजी स्कूल का है. टीचर की लड़की भी उसी स्कूल में पढ़ती है.

एक दूसरी घटना में उसी स्कूल में पढ़ने वाले एक दूसरे छात्र ने अपने स्कूल की कंप्यूटर लैब में बैठकर स्कूल की दो टीचरों को कैंडललाइट डिनर और सेक्स करने का प्रस्ताव दिया.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों ही बच्चों की उम्र 12-15 साल के बीच है.

लेकिन बढ़ती उम्र के साथ बच्चों में सेक्स के लिए हड़बड़ाहट क्यों?

इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए बीबीसी ने बात की सेक्सोलजिस्ट डॉक्टर प्रवीण त्रिपाठी से.

सांकेतिक तस्वीर
Getty Images
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डॉ. प्रवीण के मुताबिक भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बच्चों के 'सेक्शुअल मेच्योरिटी' की उम्र कम हुई है. सेक्शुअल मेच्योरिटी को प्यूबर्टी भी कहते है. इसका मतलब होता है यौवनावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव.

इसकी वजह बताते हुए डॉ. त्रिपाठी कहते हैं, "बीते दिनों बच्चों के खान-पान की स्थिति में बदलाव आए हैं. बच्चों के खान-पान में सुधार हुआ है. इसकी वजह से लड़कियों में पीरियड्स, ब्रेस्ट डेवलपमेंट और बॉडी डेवलपमेंट बेहतर होता जा रहा है. यही बात लड़कों के संदर्भ में भी है. लड़कों के शरीर में उगने वाले बालों का वक्त भी पहले के मुक़ाबले जल्द हो गया है."

अमरीकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट के शोध के मुताबिक लड़कों में यौवनावस्था की उम्र पिछले रिसर्च के मुकाबले छह महीने से दो साल पहले हो गई है. ये शोध अमरीका में 4100 लड़कों पर किया गया था.

अमरीकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट ने ऐसा ही शोध 2010 में लड़कियों पर किया था. उनके शोध के मुताबिक अमरीका में लड़कियां 7 साल की उम्र में 'सेक्शुअली मेच्योर' हो रही हैं. ये शोध 1200 लड़कियों पर किया गया.

'सेक्शुअल मेच्योरिटी' का उम्र पर असर

क्या सेक्शुअल मेच्योरिटी की घटती उम्र के साथ बच्चों का दिमाग़ उतना परिपक्व हो पाता है कि वो उस अहसास को अपनी उम्र के साथ जोड़ पाएं?

रिसर्च में पाया गया है कि बच्चों के साथ ऐसा नहीं हो पा रहा है.

यही है बच्चों में हड़बड़ाहट की असल वजह.

सेक्शुअल मच्योरिटी की घटती उम्र की दूसरी वजह बताते हुए डॉ त्रिपाठी कहते हैं सेक्स के बारे में अधपकी जानकारी वाली सामग्री का आसानी से उपलब्ध होना.

ये जानकारी इंटरनेट, मीडिया, टीवी और फ़ोन के माध्यम से हर बच्चे के पास आसानी से उपलब्ध है.

लेकिन दिक्कत ये है कि इस तरह की जानकारी अपने आप में अधूरी होती है.

सांकेतिक तस्वीर
Getty Images
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माता-पिता क्या करें ?

डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक पैरेंटिंग की स्टाइल में हमें तब्दीली लाने की ज़रूरत है.

आजकल ज़्यादातर मां-बाप बच्चों को नैनी के भरोसे घर पर छोड़कर चले जाते हैं.

इस वजह से बच्चे क्या पढ़ते हैं, क्या टीवी पर देखते हैं, और उसके बारे में क्या सोचते हैं इसकी जानकारी माता पिता को नहीं होती.

दूसरी बात, जब बच्चे स्कूल जाते हैं तो बड़ी क्लास के बच्चों के सम्पर्क में आते हैं. उनके साथ बातचीत किस विषय पर हो रही है, उस पर भी माता-पिता की निगरानी नहीं होती. उसकी वजह से ये सभी दिक्कत होती हैं.

सांकेतिक तस्वीर
Getty Images
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इसलिए, अभिभावकों को चाहिए कि किसी भी तरह का इंटरनेट और टीवी का इस्तेमाल माता-पिता के गाइडेंस में ही किया जाए.

मसलन बच्चा रो रहा हो, आपसे नाराज़ हो, बात न कर रहा हो तो आप तुरंत अपना फ़ोन न पकड़ा दें.

डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक ऐसा नहीं होना चाहिए.

गलत जानकारी, अधूरी जानकारी, गलत सोर्स से जानकारी इन तीनों बातों पर हमें ध्यान देने की ज़रूरत है.

सांकेतिक तस्वीर
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सवालों का जवाब दें

किशोरावस्था में सेक्शुअल फीलिंग आना स्वाभाविक है.

इसे रोका नहीं जा सकता और न ही रोकना चाहिए. लेकिन उसे सही तरीके से चैनलाइज़ करना ज़रूरी है.

सेक्सोलॉजिस्ट डॉ प्रकाश कोठारी कहते हैं कि बच्चे को ये बताना चाहिए कि सेक्शुअल फीलिंग को शेयर करने का सही तरीका क्या है.

अगर बच्चा आपके पास आए और पूछे कि रेप क्या है? अक्सर मां-बाप बच्चे के सवाल को ख़ारिज कर देते हैं और उसे जवाब नहीं देते, दरअसल ग़लती यही है.

...तो इस वजह से 'एडल्ट' चीज़ें देखने को मजबूर हैं बच्चे

डॉक्टर कोठारी के मुताबिक ऐसे सवाल जब बच्चे करें तो हमें बच्चे को बिठाकर उसे समझाने की ज़रूरत है कि रेप वो स्थिति है जिसमें लड़की की मर्जी के बिना उससे यौन संबंध स्थापित किया जाता है. ये ग़लत बात होती है. और ऐसा करने पर जेल भी हो सकती है. ऐसा करने वाले ग़लत लोग होते हैं. आपकी भी ज़िंदगी ख़राब हो जाती है. अगर इतने विस्तार से और गंभीरता से आप इस बात को नहीं समझाते तो बच्चे स्कूल में अपने सीनियर्स से और यू-ट्यूब से इस बारे में गलत और आधी-अधूरी जानकारी जुटा लेते हैं.

दरअसल, बच्चे को ये बताना होता है कि क्या सही है क्या गलत है.

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सांकेतिक तस्वीर
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सेक्स के बारे में बच्चों को बताएं

डॉ कोठारी कहते हैं, हर उम्र के बच्चे को समझाने के लिए अलग तरीका होता है.

उनके मुताबिक, "11- 12 साल के बच्चे को सेक्स बताना हो तो आप उसे समझा सकते हैं ये बच्चे पैदा करने का तरीका है."

8-10 साल के बच्चों को समझाना हो तो आप उसे "फिजिकल मेनेफेस्टेशन ऑफ लव कह" कर समझा सकते हैं.

डॉ त्रिपाठी कहते हैं, "अगर स्कूल का छात्र टीचर को सेक्स और कैंडल लाइट के लिए ईमेल में ऑफ़र भेजता है तो ज़रूरत है कि टीचर उसे बुलाकर इस बारे में बात करे."

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बहुत मुमकिन है कि छात्र को पता ही न हो कि टीचर को सेक्स के लिए ऑफ़र देने में कोई बुराई नहीं है.

सबसे पहले छात्र को ये बताना ज़रूरी है कि ऐसा करना ग़लत है. ऐसा करने पर हम सेक्स को बुरा कहकर लेबल कर सकते हैं.

उसके बाद भी न मानें तो सज़ा का तरीका इस्तेमाल किया जा सकता है.

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English summary
Why so much murmurment in children about sex

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