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राहुल गांधी 'भारत जोड़ो' में आगे, लेकिन 'कांग्रेस जोड़ो' में पीछे क्यों?

राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं. इस बीच अशोक गहलोत और शशि थरूर के नाम सामने आ रहे हैं.

By BBC News हिन्दी
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राहुल
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राहुल

कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर गतिविधियाँ तेज़ हो गईं हैं और इस बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि वो राहुल गांधी को एक बार फिर मनाने की कोशिश करेंगे कि वो कांग्रेस अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी संभाल लें.

2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उसके बाद से सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के रूप में काम कर रही हैं और अब अक्तूबर में नए अध्यक्ष का चुनाव होने वाला है.

अशोक गहलोत ने बुधवार को दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाक़ात की. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गहलोत ने कहा कि वो कोच्चि जाकर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होंगे और एक बार फिर राहुल गांधी से अनुरोध करेंगे कि वो कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएँ.

राहुल गांधी ने 2019 में जब पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया था तो उन्होंने कहा था कि ना तो वो अध्यक्ष बनेंगे और ना ही गांधी परिवार का कोई सदस्य अध्यक्ष बनेगा.

https://twitter.com/ashokgehlot51/status/1572530926734942211

अशोक गहलोत के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी कहा है कि वो राहुल गांधी से अनुरोध करेंगे कि वो पार्टी की ज़िम्मेदारी संभाल लें.

कई वरिष्ठ नेताओं के अलावा क़रीब दर्जन भर राज्यों में कांग्रेस पार्टी ने प्रस्ताव पास कर राहुल गांधी से कहा है कि वो कांग्रेस के अध्यक्ष बन जाएँ.

शशि थरूर बनाम अशोक गहलोत: कांग्रेस अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों के बारे में जानिए

तो क्या राहुल गांधी अपनी बात पर क़ायम रहेंगे?


वरिष्ठ पत्रकार और कांग्रेस को लंबे समय तक कवर करने वाली वरिष्ठ पत्रकार स्मिता गुप्ता कहती हैं कि कुछ दिनों पहले राहुल गांधी का एक बयान आया था जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि राहुल गांधी जिस तरह से कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनने की बात पहले कह रहे थे, उस बयान से ऐसा नहीं लगता है कि वो अपनी बात पर उतनी ही सख़्ती से अब भी क़ायम हैं.

हालाँकि कांग्रेस पर बारीक नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रशीद क़िदवई कहते हैं कि इस बात की बहुत ही कम संभावना है कि राहुल गांधी अपना फ़ैसला बदलें और कांग्रेस अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी दोबारा संभालें.

अशोक गहलोत
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अशोक गहलोत

अगर ऐसा है तो अगला सवाल यह भी पैदा होता है कि एक तरफ़ राहुल गांधी जब कन्याकुमारी से कश्मीर तक की भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं तो फिर कांग्रेस अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी संभालने से क्यों बच रहे हैं?

रशीद क़िदवई इसका जवाब देते हुए कहते हैं, "राहुल गांधी कांग्रेस और देश के नेता तो बनना चाहते हैं लेकिन वो कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं बनना चाहते हैं. इसकी वजह यह है कि जब कभी भारत के मतदाता नरेंद्र मोदी के विकल्प के तौर पर किसी को देखेंगे तो वो कांग्रेस अध्यक्ष के बजाए देश के एक नेता को देखना चाहेंगे और इसीलिए राहुल गांधी देश के एक नेता के तौर पर अपनी छवि बनाना चाहते हैं ना कि कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर."

अपनी बातों को आगे बढ़ाते हुए रशीद क़िदवई कहते हैं कि जवाहर लाल नेहरू पहली बार 1929 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे. रशीद क़िदवाई के मुताबिक़ 1929 से लेकर 1964 तक (जब नेहरू की मौत हुई) नेहरू कांग्रेस के और देश के सर्वमान्य नेता बने रहे, लेकिन इस दौरान वो कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष केवल छह बार रहे.

भारत जोड़ो यात्रा: राहुल गांधी क्या पूरे रास्ते पैदल चलेंगे?

रशीद क़िदवई का मानना है कि राहुल गांधी भी कुछ इसी तरह की सोच रखते हैं, इसलिए राहुल गांधी अध्यक्ष बनें या नहीं बनें वो कांग्रेस के सर्वमान्य नेता बने रहेंगे.

हालांकि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर स्मिता गुप्ता की राय बहुत अलग है. वो कहती हैं कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का मक़सद बीजेपी को कोई चुनौती देना नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं के बीच अपनी साख को मज़बूत करना है.

स्मिता के अनुसार ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, केसीआर समेत विपक्ष के कई बड़े नेता राहुल गांधी को अभी भी विपक्ष का सबसे प्रमुख चेहरा मानने के लिए तैयार नहीं हैं और इस यात्रा के ज़रिए राहुल गांधी ख़ुद को विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा स्थापित करना चाहते हैं.


आज़ादी के बाद कांग्रेस अध्यक्षों की सूची


  • 1948- 1949: पट्टाभि सीतारमैया
  • 1950- पुरुषोत्तम दास टंडन
  • 1951-1954: जवाहरलाल नेहरू
  • 1955-1959- यूएन ढेबर
  • 1959- इंदिरा गांधी
  • 1960-1963 नीलम संजीव रेड्डी
  • 1964-1965 के कामराज
  • 1968-69 एस निजलिंगप्पा
  • 1970-71- जगजीवन राम
  • 1972-74- शंकर दयाल शर्मा
  • 1975-77- देवकांत बरुआ
  • 1978-83- इंदिरा गांधी
  • 1985-91- राजीव गांधी
  • 1992-94- पीवी नरसिम्हा राव
  • 1996-98- सीताराम केसरी
  • 1998-2017- सोनिया गांधी
  • 2017-2019- राहुल गांधी
  • 2019- सोनिया गांधी (अंतरिम अध्यक्ष)

हार का ठीकरा गांधी परिवार पर ही क्यों?


कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव की तरफ़ लौटते हैं तो राहुल गांधी की इससे दूर रहने की एक और वजह रशीद क़िदवई बताते हैं.

रशीद क़िदवई के अनुसार आज जो लोग कांग्रेस में जी-23 गुट के नाम से जाने जाते हैं, उनमें से ज़्यादातर वही लोग हैं जिन्होंने या तो नरसिम्हा राव की सरकार (1991-96) या फिर मनमोहन सिंह की सरकार (2004-14) में सत्ता का सुख भोगा, जबकि 1989 के बाद से गांधी परिवार का कोई सदस्य ना तो प्रधानमंत्री बना और ना ही मंत्री.

रशीद क़िदवई का मानना है कि बावजूद इसके आम चुनाव (2014 और 2019) और दर्जनों विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए सीधे तौर पर गांधी परिवार और ख़ासकर राहुल गांधी को निशाना बनाया जाता है.

रशीद किदवई कहते हैं, "यूपी में अजय कुमार लल्लू, पंजाब में सिद्धू और उत्तराखंड में हरीश रावत ख़ुद अपनी सीट हार गए लेकिन हार के लिए इनमें से किसी नेता को कोई ज़िम्मेदार नहीं ठहराता है. राहुल गांधी भी इस बात को समझते हैं और वो चाहते हैं कि अब हार की ज़िम्मेदारी भी पार्टी के दूसरे नेता लें."

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी इस समय केरल में हैं.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को कहा कि राहुल गांधी 23 सितंबर को दिल्ली आएँगे, लेकिन वो अपनी माँ सोनिया गांधी से मिलने जाएँगे और चुनाव के लिए नामांकन से इसका कोई लेना देना नहीं है.

कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 24 से 30 सितंबर के बीच दिल्ली स्थित पार्टी के मुख्यालय में नामांकन भरा जाएगा और इस दौरान राहुल गांधी यात्रा में शामिल रहेंगे. कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 17 अक्तूबर को वोटिंग होगी और 19 अक्तूबर को वोटों की गिनती होगी.

एक तरह से जयराम रमेश ने यह कहकर इस बात की पुष्टि कर दी है कि राहुल गांधी अब अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी नहीं लेंगे. इस बीच अध्यक्ष को लेकर गहमागहमी तेज़ हो गई है और फ़िलहाल दो नाम सबसे आगे हैं.

एक हैं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और दूसरे हैं केरल से लोकसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर.


राजनीति में राहुल गांधी का सफ़र


  • 2004: अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ने के साथ राजनीति में एंट्री. चुनाव में विजयी रहे.
  • 2007: राहुल गांधी को कांग्रेस का महासचिव बनाया गया. उन्हें यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई का प्रभारी भी बनाया गया.
  • 2009: राहुल गांधी ने एक बार फिर अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की.
  • 2014: अमेठी से राहुल गांधी ने फिर चुनाव लड़ा और इस बार उन्होंने बीजेपी की स्मृति इरानी को हराया.
  • 2017: राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने और कांग्रेस ने उनके नेतृत्व में लोकसभा चुनाव लड़ा.
  • 2019: राहुल गांधी ने इस बार अमेठी के साथ-साथ केरल में वायनाड से चुनाव लड़ा.
  • 2019: राहुल गांधी अमेठी में स्मृति इरानी से हार गए, लेकिन वायनाड से चुनाव जीत गए.
  • 2019: लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ा.

इतनी लंबी पदयात्राएं आख़िर लोग कैसे कर लेते हैं?

शशि थरूर.
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शशि थरूर.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शशि थरूर से अपनी संभावित चुनावी लड़ाई के बारे में अशोक गहलोत ने बुधवार को कहा कि चुनाव होना चाहिए, यह पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के लिए बहुत ज़रूरी है.

https://twitter.com/PTI_News/status/1572534882148175872

हालांकि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एनडीटीवी से बातचीत में कह दिया कि "आप मुझे इस रेस से बाहर क्यों रख रहे हैं?"

https://twitter.com/PTI_News/status/1572491678648537089

गांधी परिवार के बिना चुनाव?

बरसों बाद कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव ऐसा हो सकता है, जिसमें नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं होगा.

1991 और 1996 के बीच भी गांधी परिवार का कोई सदस्य इसमें शामिल नहीं था, लेकिन उस समय सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति में नहीं आईं थी. सक्रिय राजनीति में शामिल होते ही 1998 में सोनिया गांधी सीताराम केसरी को हटाकर कांग्रेस अध्यक्ष बन गईं थीं.

साल 2000 में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव हुआ और सोनिया गांधी को चुनौती देने के लिए सामने आए जितेंद्र प्रसाद. लेकिन उन्‍हें बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा. चुनाव में पड़े 7,542 वोटों में से उन्‍हें महज़ 94 वोट मिले थे.

सोनिया गांधी 2017 तक अध्यक्ष रहीं, फिर राहुल गांधी ने यह ज़िम्मेदारी संभाली. 2019 में राहुल के इस्तीफ़े के बाद से सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष की हैसियत से पार्टी की कमान संभाल रही हैं.

https://twitter.com/PTI_News/status/1572491091584372737

राहुल गांधी ने 2019 में अपनी इस्तीफ़े में तीसरी बात कही थी कि वो चाहते हैं कि गांधी परिवार का कोई सदस्य कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को किसी भी तरह प्रभावित नहीं करे.

सोमवार को शशि थरूर और बुधवार को अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मुलाक़ात की. किसी ने आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहा कि सोनिया गांधी ने बातचीत के दौरान क्या कहा, लेकिन मीडिया में सूत्रों के हवाले से यही ख़बर चल रही है कि सोनिया गांधी ने कहा है कि वो चुनाव में किसी का भी पक्ष नहीं लेंगी.

सोनिया गांधी
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सोनिया गांधी

लेकिन क्या यह संभव है?


रशीद क़िदवई के अनुसार ऐसा लगता है कि राहुल गांधी ने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी को इस बात के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया है कि इस बार कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में गांधी परिवार का हर सदस्य इससे पूरी तरह अलग रहेगा और वो दूर रहकर सबकुछ देखेगा.

रशीद क़िदवई के अनुसार पहले सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से गांधी परिवार के किसी सदस्य के प्रति वफ़ादारी जताते हुए प्रस्ताव पारित होता था, लेकिन इस बार एक-एक दो-दो करके प्रस्ताव पारित हो रहे हैं और यह सब कुछ पहले से तय हुआ नहीं लग रहा है.

स्मिता गुप्ता कहती हैं कि सोनिया गांधी ने शशि थरूर से मुलाक़ात के दौरान सचमुच में क्या कहा यह बताना मुश्किल है. उनके अनुसार सोनिया गांधी ने शशि थरूर के चुनाव लड़ने के फ़ैसले का स्वागत किया या उन्होंने चुनाव में पूरी तरह तटस्थ रहने का फ़ैसला किया है इन दोनों स्थितियों में बहुत फ़र्क़ है.

स्मिता गुप्ता के अनुसार गांधी परिवार चाहे जितनी भी दूरी बनाने की कोशिश करे, लेकिन अगर अशोक गहलोत चुनाव लड़ते हैं तो यही संदेश जाएगा कि वो गांधी परिवार के उम्मीदवार हैं.

स्मिता गुप्ता कहती हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में केवल सांसद और विधायक मतदाता नहीं होते हैं बल्कि हज़ारों डेलिगेट्स होते हैं और उनमें से अधिकतर की वफ़ादारी गांधी परिवार के साथ है.

वो कहती हैं, "इस चुनाव में अशोक गहलोत की स्थिति बेहतर लग रही है और अगर वो चुनाव जीत जाते हैं तो फिर राहुल गांधी ही पीछे से पार्टी चलाएंगे."

लेकिन रशीद क़िदवाई कहते हैं कि यह चुनाव ऐतिहासिक होगा और 17 अक्तूबर के बाद कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति उससे बहुत ही अलग होगी जो आज है.

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English summary
Why Rahul Gandhi ahead in 'Bharat Jodo', but behind in 'Congress Jodo'?
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