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अमित शाह से मिलने वाले जूनियर एनटीआर को लोग क्यों बता रहे हैं तेलंगाना का भावी सीएम - सोशल

अमित शाह ने कल तेलुगू सुपरस्टार जूनियर एनटीआर से मुलाक़ात की. इस मुलाक़ात के बाद से ही भारत में यह टॉप-ट्विटर ट्रेंड बना हुआ है.

By BBC News हिन्दी
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अमित शाह ने रविवार को तेलुगू सुपरस्टार जूनियर एनटीआर से मुलाक़ात की जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा है.

भारत में यह टॉप-ट्विटर ट्रेंड बना हुआ है. #AmitShahWithNTR हैशटैग से अभी तक 219 हज़ार ट्वीट हो चुके हैं.

https://twitter.com/AmitShah/status/1561409563781664768

ख़ुद अमित शाह ने सात घंटे पहले इस मुलाक़ात की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं. जूनियर एनटीआर के साथ तस्वीरें शेयर करते हुए अमित शाह के ट्विटर हैंडल से लिखा गया है, "तेलुगू सिनेमा के रत्न और बेहद प्रतिभासाली अभिनेता जूनियर के साथ हैदराबाद में एक बहुत अच्छी मुलाक़ात रही."

आरआरआर के भीमा यानी जूनियर एनटीआर ने भी अमित शाह के साथ मुलाक़ात की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है, "आपसे (अमित शाह) मिलना बहुत सुखद रहा और एक अच्छी बातचीत हुई. आपके विनम्र शब्दों के लिए शुक्रिया."

https://twitter.com/tarak9999/status/1561432978047520768

क्या तेलगांना चुनावों के मद्देनज़र हुई ये मुलाक़ात

जूनियर एनटीआर से अमित शाह की मुलाक़ात को लोग कई नज़रिए से देख रहे हैं. जिनमें से एक वजह तो बेशक तौर पर उनकी फ़िल्म आरआरआर से जुड़ी हुई है, जिसमें उन्होंने आदिवासी नेता भीम का किरदार निभाया था.

बीजेपी के शेड्यूल ट्राइब मोर्चा ने इस तथ्य को रेखांकित करते हुए ट्वीट भी किया है.

बीजेपी के एसटी मोर्चा ने इस मुलाक़ात की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सुपरस्टार जूनियर एनटीआर से मुलाक़ात की. जिन्होंने अपनी आख़िरी रिलीज़ हुई फ़िल्म आरआरआर में महान आदिवासी नेता कोमरम भीम का किरदार निभाया था.

https://twitter.com/BJPSTMORCHA/status/1561413841832927233

इसके अलावा एक वजह राजनीतिक भी बताई जा रही है.

दरअसल, उत्तर भारत में बीजेपी की लोकप्रियता अपने चरम पर है और अब बीजेपी इसे दक्षिण भारत में भी कायम करने की कोशिश कर रही है. बीजेपी अब दक्षिण भारत में भी वही लोकप्रियता हासिल करने के लिए ज़ोर लगा रही है. इसी क्रम में बीजेपी का सारा ध्यान फिलहाल 'ऑपरेशन-तेलंगाना' पर है.

राज्य में साल 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में लोग जूनियर एनटीआर के साथ अमित शाह की बैठक को लेकर राजनीतिक कयास भी लग रहे हैं.

https://twitter.com/devanshu_mani/status/1561425686350692352

डॉ. उज्जवल कुमार ने ट्वीट किया है, "केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तेलंगाना से बीजेपी के सीएम पद के उम्मीदवार से मुलाक़ात की."

https://twitter.com/DrUjjwalBangla/status/1561467819987836928

राहुल तिवारी नाम के यूज़र ने ट्वीट किया है, "अच्छा इस नीति के तहत फ़तह करने की कोशिश कर रहे हों. नहीं कर पाओगे. कतई नहीं कर पाओगे."

https://twitter.com/rahultji/status/1561420590333845504

अनिल शाह ने जूनियर एनटीआर को तेलंगाना का भावी मुख्यमंत्री ही बता दिया है.

https://twitter.com/AnilSha93752289/status/1561422844835561474

नदीम अहमद ने ट्वीट किया है, "पहले सनी देओल को पार्टी में लिया, अब जूनियर एनटीआर को पार्टी में लेंगे. जैसा कि सभी जानते हैं कि देओल परिवार को राजनीति में रुचि नहीं है लेकिन वे मोदी-शाह के दबाव में राजनीति में आए हैं. वही हाल अब एनटीआर का भी है."

https://twitter.com/nadimahmed684/status/1561420546306215936

एक अन्य यूज़र ने ट्वीट किया है, "अमित शाह उनकी ख़्याति को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं."

https://twitter.com/VinciJ6/status/1561414341357965312

जूनियर एनटीआर की राजनीतिक पृष्ठभूमि

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका विस्तार से उल्लेख किया है.

दरअसल, जूनियर एनटीआर तेलुगू देशम पार्टी के संस्थापक एनटी रामा राव के पोते हैं.

जूनियर एनटीआर जिन्होंने साल 2009 के आम चुनावों में टीडीपी के लिए प्रचार किया था, वो फिलहाल राजनीति से दूर हैं. 2009 के बाद से उन्हें कभी भी किसी राजनीति कार्यक्रम में नहीं देखा गया. ना ही उन्हें टीडीपी की किसी बैठक में देखा गया और ना ही टीडीपी के किसी नेता के साथ.

हालांकि उनके पिता नंदामुरी हरिकृष्णा टीडीपी से राज्यसभा सांसद (2008-2013) थे. उनके चाचा भी आंध्र प्रदेश से लोकसभा सांसद हैं.

https://www.youtube.com/watch?v=DjdY1umjjtk

मुलाक़ात के बहाने बॉलीवुड पर भी निशाना

एक ओर जहां कुछ लोग अमित शाह और जूनियर एनटीआर की मुलाक़ात को राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं वहीं कुछ लोग इसे चर्चित बॉलीवुड बनाम दक्षिण भारतीय सिनेमा की तर्ज़ पर भी रखकर कमेंट कर रहे हैं.

दरअसल, बीते कुछ समय से लगातार बॉलीवुड फ़िल्मों की तुलना साउथ के सिनेमा से की जा रही है. बॉलीवुड की फ़िल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं और साउथ की फ़िल्में उत्तर भारत में भी कमाल कर रही हैं, इसलिए ये तुलना और व्यापक हो रखी है.

एक ट्विटर यूज़र ने अमित शाह और जूनियर एनटीआर की मुलाक़ात की फ़ोटो पर कमेंट करते हुए लिखा है, "बॉस ऑफ़ पॉलिटिक्स मीट्स बॉस ऑफ़ बॉक्स ऑफ़िस."

https://twitter.com/TheJournalistIN/status/1561415381356384256

एक यूज़र ने लिखा है कि क्या अमित शाह ने भी #BoycottBollywood गैंग ज्वाइन कर लिया है?

https://twitter.com/PathiThadhagath/status/1561422181497638912

राजेश साहू नाम के यूज़र ने लिखा है, "दक्षिण भारतीय सिनेमा का क्रेज़ बढ़ता ही जा रहा है. वहीं दूसरी ओर आज अमित साह ने जूनियर एनटीआर से मुलाक़ात की है. यह बॉलीवुड के लिए एक चेतावनी है."

https://twitter.com/askrajeshsahu/status/1561423143939387392

ट्विटर पर लोग जूनियर एनटीआर को सबसे बड़ा मास-हीरो बता रहे हैं.

https://twitter.com/JuniorLohia/status/1561424261675646976

आरआरआर के किरदार ने दी बड़ी पहचान

एसएस राजमौली की फ़िल्म RRR इस साल रिलीज़ हुई फ़िल्मों में से एक सबसे सफल फ़िल्म है. सिनेमाघरों में झंडे गाड़ने के बाद फ़िल्म ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म नेटफ़्लिक्स पर भी टॉप-10 लिस्ट में हैं.

फ़िल्म में दो मुख्य किरदार हैं, जिनमें से एक रामचरण तेजा ने निभाया है और दूसरा जूनियर एनटीआर ने.

जूनियर एनटीआर ने तेलंगाना के कुमारम भीम का किरदार निभाया है और रामचरण ने 'मनयम के नायक' और आंध्र प्रदेश के रहने वाले अल्लुरी सीतारामा राजू का.

कुमारम भीम
BBC
कुमारम भीम

कौन थे कुमारम भीम

कुमारम भीम, 22 अक्टूबर 1902 को संकेपल्ली गांव के एक गोंड आदिवासी परिवार में पैदा हुए थे. उनके पिता का नाम कुमारम चिमना था.

18वीं और 19वीं सदी में आदिवासियों को नई तरह की मुसीबत का सामना करना पड़ रहा था. जंगलों के संरक्षण के क़ानून के नाम पर आदिवासियों की ज़मीनें और खेत उनसे छीने जा रहे थे.

उस वक़्त हैदराबाद रियासत में निज़ाम की हुकूमत कुछ इस तरह थी कि एक तरफ़ तो निज़ाम के रज़ाकार जनता का शोषण करते थे, और दूसरी तरफ़ लोगों को अंग्रेज़ों के दमन का भी शिकार होना पड़ता था.

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ऐसी मुश्किलों का सामना करने वाले गोंड आदिवासियों में कुमारम भीम का परिवार भी शामिल था. जब भीम 15 बरस के थे, तो संकेपल्ली गांव में वन अधिकारियों और कारोबारियों की वजह से उनके परिवार को बहुत परेशानियां उठानी पड़ीं.

अल्लम राजैया और साहू ने अपनी क़िताब 'कोमुरम भीम' में लिखा है कि, "जब भीम के पिता गुज़र गए तो उनका परिवार शूद्रपुर चला गया और वहां उन्होंने खेती शुरू की. फ़सल तैयार हो गई, तो सादिक़ नाम के एक व्यक्ति ने उस ज़मीन पर अपना दावा किया जिस पर भीम का परिवार खेती कर रहा था. उसने दावा किया कि उसके पास ज़मीन के काग़ज़ात हैं. तब भीम ने सादिक़ के सिर पर वार किया. उसके बाद वहां हंगामा मच गया और भीम भागकर असम चले गए. वो वहां के चाय बाग़ान में मज़दूरी करने लगे. वहीं पर भीम ने पढ़ना-लिखना सीखा और राजनीति और बग़ावत के बारे में पढ़ा."

भीम ने असम के मज़दूरों की बग़ावत में भी शिरकत की. उन्हें असम पुलिस ने भी हिरासत में लिया था. मगर भीम, असम पुलिस को चकमा देकर भाग निकले और आसिफ़ाबाद के क़रीब कंकनघाट जा पहुंचे. वहां वो लच्छू पटेल की शागिर्दी में काम करने लगे. बाद में भीम ने सोम बाई से शादी कर ली.

कुमारम भीम की पत्नी सोम बाई
BBC
कुमारम भीम की पत्नी सोम बाई

जंगल के अधिकारों के लिए संघर्ष

इधर भीम के चाचाओं ने अन्य आदिवासियों के साथ मिलकर बाबेझारी के पास बारह गांवों के जंगल साफ़ किए और वहां खेती करने लगे. इसके बाद उन पर ज़ुल्म शुरू हो गए, पुलिस ने उनके गांवों को तहस-नहस कर दिया.

तब इन बारह गांवों की तरफ़ से प्रशासन से बात करने के लिए भीम को नेता चुना गया. भीम और बाक़ी आदिवासियों को रोज़-रोज़ सरकारी अधिकारियों के ज़ुल्म का शिकार होना पड़ता था. वो अपनी ही बोई हुई फ़सल नहीं काट पाते थे. उनका कहना था कि जंगलों पर उनके हक़ छीने जा रहे थे.

इन सबसे खीझकर भीम ने इन बारह गांवों के आदिवासियों को एकजुट करने का आंदोलन छेड़ दिया. सबसे अहम बात ये है कि भीम का कहना था कि जंगलों, वहां की ज़मीनों और नदियों के पानी पर आदिवासियों का हक़ होना चाहिए.

कुमारम भीम
BBC Sport
कुमारम भीम

इसके लिए भीम ने, 'जल, जंगल और ज़मीन' का नारा दिया. आदिवासियों ने भीम के नेतृत्व में इन संसाधनों पर अपना हक़ हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया.

भीम ने नारा दिया- 'मावा नाते मावा राज', यानी 'हमारी ज़मीन पर हमारी सरकार'.

आरआरआर
Getty Images
आरआरआर

आरआरआर के फ़र्स्ट लुक पर बीजेपी ने जताया था एतराज़

फ़िल्म के रिलीज़ से पहले बीजेपी ने उसके फ़र्स्ट लुक को लेकर आपत्ति जताई थी. बीजेपी ने भीम के किरदार के री-प्रेज़ेटेंशन को लेकर आपत्ति जताई थी और थिएटर जलाने तक की धमकियां भी दी थीं.

तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष बंदी संजय ने जनजातियों की भावना को आहत करने का आरोप लगाया था.

फ़िल्म के कुछ दृश्यों में भीम के किरदार को मुसलमान दिखाया गया है, जो एक खास किस्म की टोपी पहनता है. इसी को लेकर तेलंगाना बीजेपी ने रोष ज़ाहिर किया था.

ऑस्कर
Getty Images
ऑस्कर

ऑस्कर के लिए भेजे जाने को लेकर भी चर्चा में है आरआरआर

सोशल मीडिया पर लोग इस पर बहस करते नज़र आते हैं कि दक्षिण की फ़िल्में देश भर में अच्छी कमाई कर रही हैं जबकि बॉलीवुड की फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर औंधे मुंह गिर रही हैं.

अब इस बहस में फ़िल्म निर्माता अनुराग कश्यप के 'लोगों के पास पैसे नहीं हैं' वाले बयान और 'ऑस्कर' वाले बयान ने चर्चा को एक अलग दिशा दे दी है.

उन्होंने 'बॉलीवुड नाउ' को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "आपको क्या मालूम है कि साउथ की कितनी फ़िल्में नहीं चल रही हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोगों के पास पैसे नहीं हैं ख़र्च करने के लिए.''

वहीं, गलाटा प्लस को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने ऑस्कर पर भी बात की. उन्होंने इस इंटरव्यू में 'द कश्मीर फ़ाइल्स' के बारे में जो कहा उस पर फ़िल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री की प्रतिक्रिया भी आई है.

अनुराग कश्यप ने गलाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में ऑस्कर में फ़िल्म भेजे जाने के बारे में कहा, ''पश्चिम में लोग आरआरआर को अलग तरह से देखते हैं और उन्हें यह फ़िल्म काफी पसंद आई. अगर आरआरआर को चुना जाता है तो 99 प्रतिशत इस बात की संभावना है कि इसका चयन अकेडमी अवॉर्ड के लिए हो."

उन्होंने कहा, ''आरआरआर ने हॉलीवुड की दुनिया में ऐसा प्रभाव पैदा किया है कि अगर हम आरआरआर का चयन करते हैं तो भारत को अंतिम पांच फ़िल्मों में नामांकन में जगह मिल सकती है. हालांकि, मुझे नहीं पता कि किसका चयन होगा, कहीं 'कश्मीर फ़ाइल्स' को न चुन लें.''

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English summary
Why people are telling Jr NTR the future CM of Telangana
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