मोदी-शाह की जोड़ी ने ओम बिड़ला को ही क्यों चुना लोकसभा का स्पीकर?

नई दिल्ली- ओम बिड़ला को लोकसभा स्पीकर का उम्मीदवार चुने जाने को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल ये हो रहा है कि संसद का इतना कम अनुभव रहने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष एवं गृहमंत्री अमित शाह ने उनके नाम पर मुहर क्यों लगाई है। दरअसल, इसके पीछे ओम बिड़ला का बहुत सारा योगदान है, जो उन्होंने संगठन और समाजसेवा के क्षेत्र में दिया है।

हैरान कर देने वाला रहा अगले स्पीकर का नाम

हैरान कर देने वाला रहा अगले स्पीकर का नाम

ओम बिड़ला राजस्थान के कोटा-बूंदी से सिर्फ दो बार यानी 2014 और 2019 में चुनकर लोकसभा पहुंचे हैं। इसलिए लोकसभा स्पीकर के तौर पर उनका नाम सामने आने पर कई लोगों को हैरान होना स्वाभाविक रहा। क्योंकि, आमतौर पर अबतक लोकसभा के वरिष्ठतम सांसदों को ही यह जिम्मेदारी मिलती रही है। 16वीं लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन भी 8 बार सांसद रह चुकी हैं। लेकिन, 17वीं लोकसभा में स्पीकर के लिए नामांकन दाखिल करने वाले ओम बिड़ला का अनुभव बाकी स्पीकरों के मुकाबले थोड़ा कम लग रहा है। उनका बुधवार (19 जून, 2019) को औपचारिक तौर पर लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।

मोदी-शाह ने इसलिए किया बिड़ला पर भरोसा

मोदी-शाह ने इसलिए किया बिड़ला पर भरोसा

लोकसभा में ओम बिड़ला का यह भले ही दूसरा कार्यकाल हो, लेकिन राजनीति में उनका सफर बेहद लंबा है। उन्होंने महज 17 साल की उम्र में ही राजनीति में कदम रख दिया था। भारतीय जनता युवा मोर्चा में काम करने का उनका अनुभव बहुत ही लंबा है। 2014 में लोकसभा के लिए चुने जाने से पहले उन्होंने 2003 से 2013 तक लगातार तीन बार कोटा साउथ विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया था। बेहद साफ सुथरी छवि वाले बिड़ला राजस्थान का बड़ा वैश्य चेहरा भी माने जाते हैं। राजस्थान में एक बार वे संसदीय सचिव का रोल भी बहुत अच्छे से निभा चुके हैं। उनके ऐसे ही बेदाग राजनीतिक छवि और दशकों के सियासी अनुभव के कारण ही मोदी-शाह की जोड़ी ने उन्हें स्पीकर की जिम्मेदारी सौंपने की फैसला किया है।

बिड़ला की पहचान जननेता की है

बिड़ला की पहचान जननेता की है

सियासत में ओम बिड़ला की पहचान राजनीति के माध्यम से जनसेवा करने वाले की रही है। उन्होंने राजनीति में रहते हुए कई ऐसे काम किए हैं, जिसके कारण वे क्षेत्र में हमेशा लोकप्रिय रहे हैं। गरीब, बुजुर्ग, दिव्यांग और असहाय महिलाओं की मदद करने का उन्होंने कोई मौका नहीं छोड़ा है। अलग-अलग सामाजिक संगठनों के माध्यम से उन्होंने अपने क्षेत्र के दिव्यांगों, कैंसर पीड़ितों और थैलेसेमिया रोगियों की मदद की है। दिव्यांगों को मुफ्त साइकिलें, व्हीलचेयर और कान की मशीनें बंटवाने में भी उन्होंने अहम रोल अदा किया है। प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने कोटा में लगभग एक लाख पेड़ लगाने के लिए 'ग्रीन कोटा वन अभियान' भी लांच किया था।

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