केरल में बार-बार क्यों मच रही प्राकृतिक तबाही?

बंगलुरू। देश का खूबसूरत प्रान्त केरल एक बार फिर खतरें में है। एक साल पहले सदी की सबसे भयावह बाढ़ के बाद हुई तबाही से केरल अभी उबर भी नहीं पाया था कि दोबारा बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया है। लोगों की जान जा चुकी है लगभग 1000 करोड़ की संपत्ति नष्ट हो चुकी है। आखिर केरल में बार बार क्यों मच रही प्राकृतिक तबाही ?क्‍या इसकी वजह केवल बारिश ही है?

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जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई वर्षा में वृद्धि का मुख्य कारण

प्राकृतिक खूबसूरती और सुहाने मौसम के कारण केरल में पर्यटकों का पसंदीदा डेस्टीनेशन है। वहां पर पिछले कुछ वर्षों में पर्यटकों की संख्या में अत्यधिक बढ़ोत्तरी हुई है। केरल में आयी बाढ़ का प्रमुख कारण अधिक बारिश तो है लेकिन भारी बारिश के कई अन्य कारण भी हैं। जिसमें प्रमुख रूप से अंधाधुंध पेड़ों का कटान और अवैध निर्माण कार्य है। अध्ययन में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई वर्षा में वृद्धि के मुख्य कारण है। मालूम हो कि केरल के दो पहाड़ी जिले जो कि पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं इडुक्की और वायनाड में इस बार फिर से बाढ़ आ गई है।

पर्यावरणविद के मुताबिक बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान उन इलाकों को हुआ है जो इकोलॉजिकली सेंसिटिव जोन में आते हैं। यहीं पर सबसे ज्यादा भूस्खलन भी हुआ है। पर्यावरणविद कहते हैं कि बारिश के अलावा बाढ़ का अन्य कारण अवैध निर्माण भी है। जो कि इन जगहों पर धड़ल्ले से चल रहा था। पिछले कुछ समय से इको सेंसिटिव जोन में अवैध निर्माण और अवैध कब्जा हो रहा था। उनके अनुसार केरल मानव निर्मित आपदा एक बार फिर क्षेल रहा है।

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2018 की आपदा से भी नही लिया सबक
2018 में सदी की सबसे बड़ी आपदा झेलने के बाद भी केरल ने सबक न लेते हुए वहां पर्यटकों से हो रही आय बढ़ाने के लिए निर्माण जारी रखा। वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की त्रासदियों में वृद्धि होना तय है। कोई भी बारिश को रोक नहीं सकता है या बाढ़ को नियंत्रित नहीं कर सकता है।लेकिन हम इस तरह के प्रभावों की तीव्रता को कम करने के उपाय कर सकते हैं।

ग्‍लोबल वार्मिंग बन रहा कारण

1900 के बाद से वर्षा के आंकड़ों पर आधारित एक 2014 भारतीय मौसम विज्ञान अध्ययन ने कहा था कि मानसून की बारिश की तीव्रता बढ़ रही थी और इसके लिए कारकों में से एक ग्लोबल वार्मिंग था। 2017 आईआईटी बॉम्बे अध्ययन ने वनों की कटाई को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया। जिस तरह से क्लाइमेट चेंज हो रहा है उसी तरह से हमें भी चेंज होना होगा। इस तरह के अवैध निर्माण पर रोक लगानी होगी।

अवैध निर्माण, मानवीय हस्‍तक्षेप भी है वजह

इन क्षेत्रों में निर्माण न किया जाए इसके लिए साल 2010 में गाडकिल कमेटी बनाई गई थी। केंद्र सरकार ने स्वंय इन पैनल का गठन किया गया था। अवैध निर्माण के चलते इस रिपोर्ट में कहा गया था कि मानवीय हस्तक्षेप के कारण पश्चिमी घाट सिकुड़ रहा है। यह घाट भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर बादलों को तोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। 2010 में इस कमेेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए। लेकिन फिर भी सरकारें इसके उलट काम कर रही हैं। गडगिल समिति रिपोर्ट, पारिस्थितिक रूप से कमजोर पर्वत श्रृंखलाओं की रक्षा करने के उद्देश्य से लागू की गई थी, तो इसका प्रभाव सीमित होना चाहिए।

भूस्खलन का कारण चेकडैम भी

बाढ़ आने का दूसरा कारण है चैकडैम। केरल की सरकार के पास आज भी ऐसी कोई पुख्‍ता जानकारी नहीं है कि राज्य में कितने चैकडैम हैं। राज्य में बारिश और भूस्खलने से लोगों की जान जा रही है। माना जा रहा है कि जिन क्षेत्रों में भूस्खलन हो रहा है उन क्षेत्रों की बात करें तो वह ऐसी जगहें हैं जहां निर्माण की इजाजद न होते हुए भी चैकडैम बनाए गए या फिर इमारतें खड़ी की गईं। पर्यावरणविदों का मानना है कि नियमों का पालन सरकार द्वारा भी नहीं किया जा रहा है। वोटबैंक की राजनीति के चलते जिन जगहों पर निर्माण की इजाजद नहीं है वहां भी ये काम हो रहा है। जिसे सरकार भी नहीं रोक रही।

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