परमाणु हथियार नहीं बिजली बनाने के लिए भारत को चाहिए एनएसजी मेंबरशिप!

नई दिल्‍ली। न्‍यूक्लियर सप्‍लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की सदस्‍यता को लेकर पिछले करीब एक माह से काफी बातें हो रही हैं। लेकिन बड़ा सवाल है कि क्‍या भारत वर्ष 2016 के अंत तक एनएसजी में अपनी जगह बना पाएगा? भारत के लिए परमाणु हथियार के निर्माण से कहीं जरूरी है इसकी बिजली की जरूरतों का पूरा होना और एनएसजी सदस्यता भारत के लिए बिजली संकट का एक बड़ा समाधान साबित हो सकती है।

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क्‍यों जरूरी है एनएसजी की सदस्यता

  • वर्ष 2008 में भारत की अमेरिका के साथ सिविल न्‍यूक्लियर डील हुई थी।
  • इस डील ने ही एनएसजी में भारत के रास्‍ते खोले थे।
  • इसी वर्ष भारत को नॉन-फॉसिल सोर्सेज से बिजली बनाने की एक बार की छूट भी मिली थी।
  • भारत की ऊर्जा की 40 प्रतिशत जरूरतें नॉन फॉसिल सोर्सेज से पूरी होती हैं।
  • एनएसजी में एंट्री के बाद भारत बेस्‍ट टेक्‍नोलॉजी से न्यूक्लियर एनर्जी बना सकेगा।
  • भारत के पास रिएक्टर्स के निर्माण और न्यूक एनर्जी को एनएसजी के बाहर बेचने का भी प्‍लान तैयार है।
  • एनएसजी का हिस्‍सा बनने पर भारत टेक्‍नोलॉजी को डिफेंस, स्‍पेस और न्यूक्लियर सेक्टर के लिए प्रयोग कर सकेगा।
  • एनएसजी की सदस्यता भारत को अपना बिजनेस और बढ़ाने में भी मदद करेगी।
  • भारत की न्यूकिक्‍लयर इंडस्ट्री को अकेले काम करने की जरूरत नहीं होगी।
  • भारतीय कंपनियां अंतराष्ट्रीय मानकों पर जरूरतों को पूरा कर सकेंगी।
  • इसका मतलब होगा कि भारत दुनिया का एक बेहतर बाजार बन सकेगा।

क्‍या इस वर्ष मिलेगी सदस्यता

भारत को पूरी उम्‍मीद है कि इस वर्ष के अंत उसे इस समूह की सदस्यता हासिल हो सकेगी और इसकी वजह से भारत का पुरजोर समर्थन कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कार्यकाल। ओबामा का कार्यकाल जनवरी 2017 में खत्‍म हो रहा है और ओबामा, भारत के लिए उम्‍मीद इसलिए हैं क्‍योंकि उन्‍होंने हमेशा इस मुद्दे पर भारत का समर्थन किया है।

चीन पैदा कर रहा रास्ते में रुकावट

वहीं भारत के लिए एनएसजी सदस्यता की दौर थोड़ी मुश्किल इसलिए नजर आ रही है क्‍योंकि चीन, पाकिस्‍तान की वजह से भारत का विरोध कर रहा है। लाजमी सी बात है कि वह अपने दोस्‍त पाकिस्‍तान को भारत की वजह से नाराज नहीं करना चाहता है।

हालांकि भारत इस मुद्दे पर सीधे हस्‍तक्षेप से बच रहा है और उसने साफ कर दिया है कि एनएसजी सदस्यों के नजरिए पर उसे कुछ नहीं कहना है।

क्यों भारत है जल्‍दी में

भारत का मानना है कि जब तक राष्ट्रपति ओबामा व्‍हाइट हाउस में है तब तक वह अपनी सदस्यता सुनिश्चित करा ले। इसलिए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पूरी दुनिया में भारत की सदस्यता के लिए अपील कर रहे हैं।

भारत इस बात से बिल्कुल अनजान है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप या फिर हिलेरी क्लिंटन राष्ट्रपति बन गए तो फिर उनका नजरिया इस मुद्दे पर क्‍या होगा।

वहीं अधिकारियों का मानना है कि आज नहीं तो कल, भारत को एनएसजी की सदस्यता मिलनी ही है लेकिन कब तक इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

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