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नेपाल क्यों बना रहा है भारत के जनरल को अपनी सेना का मानद अध्यक्ष?

By सलमान रावी

नेपाल क्यों बना रहा है भारत के जनरल को अपनी सेना का मानद अध्यक्ष?

भारत और नेपाल की सेनाओं में दशकों से चली आ रही परंपरा के तहत भारत के थल सेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को नेपाल की सेना के मानद अध्यक्ष की उपाधि प्रदान की जाएगी.

नरवणे इसी हफ़्ते नेपाल के दौरे पर जा रहे हैं और वहां की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी उन्हें इस उपाधि से सम्मानित करेंगी.

इससे पहले साल 2017 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को ये उपाधि दी गई थी.

जनरल रावत को इसी साल जनवरी महीने में 'चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़' (सीडीएस), यानी सभी सेनाओं का प्रमुख बनाया गया है.

जनरल नरवणे का नेपाल का दौरा इस मायने में भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में दरार तो नहीं बल्कि मनमुटाव ज़रूर देखा गया है.

इसकी शुरुआत इस बरस जून के महीने में उस वक़्त हुई थी जब उत्तराखंड में लिपुलेख और धारचूला की 80 किलोमीटर की सड़क का निर्माण भारत ने किया था. नेपाल ने इस पर आपत्ति जताई थी.

नेपाल क्यों बना रहा है भारत के जनरल को अपनी सेना का मानद अध्यक्ष?

फिर, कुछ ही दिनों में नेपाल ने एक नया नक़्शा जारी कर उसे अपनी संसद से अनुमोदित भी करवा लिया था जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा बताते हुए दिखलाया गया था.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इन इलाक़ों को नेपाल का अभिन्न अंग बताते हुए एक नए विवाद को जन्म दिया जो पहले कभी चर्चा में ही नहीं आया था.

भारत और नेपाल की सीमा पर भी तनाव देखने को मिला जब नेपाल की सेना पर गोली चलने का आरोप लगा जिसमें भारतीय नागरिक घायल हुए थे. साथ ही, पहली बार ऐसा भी हुआ कि नेपाल ने भारत से लगी सीमा पर 'बॉर्डर पोस्ट' का निर्माण किया.

इसी तनातनी के दौरान जनरल नरवणे ने भी बयान दिया जिससे नया विवाद पैदा हो गया था.

उन्होंने नेपाल के द्वारा नक़्शा जारी करने को लेकर कहा था कि 'वो ऐसा किसी के इशारे' पर कर रहा है.

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हालांकि नरवणे ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा चीन की तरफ़ ही माना जा रहा था.

पिछले साल नेपाल की सेना के अध्यक्ष पूर्ण चन्द्र थापा को भारत ने भी भारत की सेना के मानद अध्यक्ष की उपाधि दी थी.

भारत और नेपाल बरसों से निभा रहे हैं परंपरा

कर्नल संजय श्रीवास्तव गोरखा रेजिमेंट से सेवानिवृत्त हुए हैं.

बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं कि ये परंपरा काफ़ी पहले से चली आ रही है. सबसे पहले ये उपाधि भारत की सेना के 'कमांडर-इन-चीफ़' रहे जनरल केएम करियप्पा को साल 1950 में दी गई थी.

कर्नल संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि भारत की सेना में भी गोरखा रेजिमेंट है जिसमें नेपाल के नागरिकों की भर्ती ब्रितानी हुकूमत के दौर से ही होती चली आ रही है.

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इतना ही नहीं, वो कहते हैं कि नेपाल की सेना के जूनियर और सीनियर कमीशंड अफ़सरों को भारत में प्रशिक्षित भी किया जाता रहा है.

उदाहरणस्वरूप वो कहते हैं कि नेपाल की सेना के जिस अध्यक्ष को पिछले साल राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भारत की सेना की मानद अध्यक्ष की उपाधि दी थी, वो जनरल पूर्ण चन्द्र थापा भारत के 'नेशनल डिफ़ेन्स कॉलेज' से स्नातक की डिग्री ले चुके हैं.

इसके अलावा भी जनरल थापा ने मद्रास यूनिवर्सिटी से रक्षा और सामरिक मामलों में स्नातकोत्तर की डिग्री भी हासिल की है.

साथ ही, भारत की सेना में नेपाली नागरिकों को दो साल में 4 महीनों की छुट्टी मिलती है जबकि इसी रेजिमेंट में काम करने वाले भारतीय जवान को सिर्फ़ एक महीने की छुट्टी दी जाती है.

सेना के 'आर्मर्ड कोर' से सेवानिवृत्त हुए कर्नल चन्द्र मोहन जगोटा ने बीबीसी को बताया कि गोरखा रेजिमेंट में काम करने वाले सभी अफ़सरों के लिए ये आवश्यक है कि वो 'गोरखाली' यानी नेपाल की भाषा पूरी तरह सीखें.

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इस रेजिमेंट में तैनात हर किसी का निजी हथियार 'खुखरी' होता है.

कर्नल जगोटा कहते हैं कि गोरखा रेजिमेंट भी कई हैं. जैसे पहली गोरखा रेजिमेंट, दूसरी और दसवीं आदि. हर रेजिमेंट की कई बटालियन हैं जिनमें नेपाली नागरिकों की बहाली होती आ रही है और उनकी बहाली में उन्हें छूट भी मिलती है.

उनका कहना था कि जब वो सेना में बतौर अफ़सर बहाल हुए तो उनके साथ प्रशिक्षण लेने वालों में नेपाल की सेना के अधिकारी या 'कैडेट' भी शामिल थे.

चूँकि कर्नल संजय श्रीवास्तव रांची से हैं, वो कहते हैं कि बिहार और झारखण्ड पुलिस में भी नेपाल के नागरिकों को नौकरी मिलने की परंपरा रही है.

बिहार में जिस बटालियन में नेपाल के नागरिक बहाल किए जाते हैं, उसका नाम - 'बिहार मिलिट्री पुलिस' (बीएमपी) है, वहीं झारखण्ड में इसे 'झारखण्ड आर्म्ड पुलिस' या 'जैप' के नाम से जाना जाता रहा है. रांची में 'जैप' के अतिथि गृह का नाम ही 'खुखरी गेस्ट हाउस' है.

नेपाल की सेना ने जनरल नरवणे के दौरे को लेकर बयान भी जारी किया है जिसमें कहा गया है कि वो यानी नरवणे 'आधिकारिक' निमंत्रण पर नेपाल के दौरे पर आ रहे हैं.

नरवणे प्रधानमंत्री केपी ओली से भी मिलेंगे. इसके अलावा वो शिवपुरी स्थित नेपाल के 'आर्मी कमांड एंड स्टाफ़' कॉलेज में प्रशिक्षु अधिकारियों को भी संबोधित करेंगे.

BBC Hindi
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English summary
Why is Nepal making India's General an honorary president of its army?
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