मिल गया नया उपराष्ट्रपति फिर भी चुप हैं जगदीप धनखड़! खामोशी के पीछे क्या है वजह? करीबियों ने अब खोले राज
Jagdeep Dhankhar: देश को 9 सितंबर को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति बने हैं। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है-आखिर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ चुप क्यों हैं? उनके अचानक इस्तीफे को लेकर राजनीति गर्म है और कांग्रेस ने कहा है कि पूरा देश जगदीप धनखड़ को सुनने का इंतजार कर रहा है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे पर देश अब भी उनके बयान का इंतजार कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा-''50 दिन से धनखड़ साहब खामोश हैं। जब उन्होंने किसानों की अनदेखी और सत्ता के अहंकार पर सवाल उठाए थे, तब देश ने उनकी आवाज सुनी थी। अब जब उनका उत्तराधिकारी चुना जा रहा है, तो उनकी चुप्पी और भी हैरान करने वाली है।"

इसी मुद्दे पर सचिन पायलट ने भी चुटकी ली। उन्होंने कहा-"धनखड़ साहब कहां हैं, कोई नहीं जानता। न बयान, न सार्वजनिक उपस्थिति। जिस नेता ने हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी, वही अब अचानक गुम हो जाएं, यह चौंकाने वाला है।" ऐसे में अब उनके करीबियों ने इस रहस्य से जुड़ी कुछ परतें खोलनी शुरू की हैं।
तेजस्वी यादव बोले,'जगदीप धनखड़ वाकई बीमार थे या उन्हें बीमार करा दिया गया, उन्होंने शाम तक सदन बहुत अच्छे से चलाया। अब वे कहां हैं? किसी को पता नहीं, न कोई हेल्थ बुलेटिन जारी हुआ, न ही कुछ जारी हुआ, क्या उन्हें नजरबंद किया गया है ताकि असली वजह सामने न आए।'
🔵 21 जुलाई 2025 की रात: जब जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से सबको झटका लगा (Jagdeep Dhankhar silence Mystery )
21 जुलाई 2025 को संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ था। पूरे दिन उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही चलाई और रात को अचानक इस्तीफे की खबर आई। उन्होंने खराब सेहत को वजह बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह थ्योरी किसी को पूरी तरह नहीं जमी।
दैनिक भास्कर के मुताबिक जगदीप धनखड़ के करीबी बताते हैं कि उन्हें इस्तीफा देने का संदेश 21 जुलाई को ही मिला था। उन्होंने खुद इस्तीफा नहीं दिया, उन्हें अप्रत्यक्ष तौर पर इस्तीफा देने के लिए कहा गया था। जगदीप धनखड़ के सामने दो विकल्प रखे गए थे-खुद इस्तीफा दें या फिर नो कॉन्फिडेंस मोशन का सामना करें। धनखड़ ने पहला रास्ता चुना, क्योंकि दूसरा विकल्प उन्हें "अपमानजनक" लग रहा था।
धनखड़ के करीबी मानते हैं कि अभी उन्होंने चुप रहना चुना है, लेकिन सही वक्त आने पर वे सामने आएंगे। उनका कहना है-"पूरा सच वही बताएंगे। अभी वो फोन पर कुछ नहीं कहते। उनसे मुलाकात होगी तो असली कहानी सामने आएगी।"

🔵 "इस्तीफा जगदीप धनखड़ की मर्जी से नहीं था" - सूत्र
जगदीप धनखड़ के बेहद करीबी सूत्रों ने दावा किया है कि उन्होंने खुद इस्तीफा नहीं दिया था, बल्कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा गया था। यहां तक कि एक दिन पहले तक उन्हें इस बारे में कोई भनक नहीं थी। उपराष्ट्रपति भवन के स्टाफ का कहना है कि इस्तीफे से एक दिन पहले उन्होंने 40 किलो जलेबी मंगवाई थी और पूरे स्टाफ में बंटवाई थी। अगर उन्हें पता होता कि इस्तीफा आने वाला है, तो शायद ऐसा न करते।
🔵 प्रोटोकॉल और नाराजगी की कहानी
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि धनखड़ लगातार अपने पद के मुताबिक प्रोटोकॉल चाहते थे, जो उन्हें सरकार से नहीं मिल रहा था। यहां तक कि एक मीटिंग के दौरान गृह मंत्री के ठहाके पर उन्होंने कड़ा ऐतराज भी जताया था। सूत्रों का कहना है-"इसमें गलत क्या है? उपराष्ट्रपति पद की गरिमा बनाए रखना उनका हक था।"
🔵 संघ और धनखड़ के रिश्ते
खबरें यह भी रहीं कि धनखड़ संघ के साथ नजदीकियां बढ़ाना चाहते थे। उन्होंने संघ के नेताओं से मुलाकात की और कई बार सार्वजनिक मंच से संघ की तारीफ भी की। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, संघ ने उन्हें साफ कहा कि "पब्लिक मंच से तारीफ मत कीजिए, इससे गलत संदेश जाएगा।"

🔵 फिलहाल कहां हैं जगदीप धनखड़? (What Next for Jagdeep Dhankhar)
फिलहाल पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ दिल्ली के छतरपुर में अभय चौटाला के फार्म हाउस में शिफ्ट हो गए हैं। जब तक जगदीप धनखड़ को दिल्ली में टाइप-8 सरकारी बंगला नहीं मिल जाता, तब तक, वो फार्म हाउस में ही रहेंगे। केंद्र सरकार के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में टाइप-8 सरकारी बंगला तैयार करने में 3-4 महीने का वक्त लग जाता है।
जगदीप धनखड़ ने दिल्ली में सरकारी बंगले के लिए अप्लाई कर दिया है। 2 सितंबर को जगदीप धनखड़ अभय चौटाला के फार्म हाउस में शिफ्ट हुए थे। इसके बाद 6 सितंबर को उनसे मिलने के लिए देवीलाल के पौत्र अजय चौटाला पहुंचे थे। इस्तीफे के बाद जगदीप धनखड़ परिवार और योगा कर समय बिता रहे हैं। राजनीति में वो आगे क्या करेंगे, इसको लेकर फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
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