कर्नाटक चुनाव के लिए बीजेपी इसबार पुराने मैसूर क्षेत्र पर क्यों लगा रही है जोर ?
भारतीय जनता पार्टी इस बार कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए उन क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर रही है, जहां वह पहले कांग्रेस और जेडीएस से पिछड़ती रही है। खासकर वोक्कालिका समुदाय के गढ़ में।

कर्नाटक के पुराने मैसूर राज्य वाले इलाके में भाजपा पहले कांग्रेस और जेडीएस के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती थी। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनाव में स्थिति बदली और बीजेपी का हौसला बढ़ गया। इसबार पार्टी इस क्षेत्र पर पूरा फोकस कर रही है। क्योंकि, पार्टी को लगता है कि अगर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज होना है तो इस क्षेत्र में भी अच्छा प्रदर्शन करके दिखाना ही होगा। इस इलाके को वोक्कालिगा समुदाय का गढ़ माना जाता है। अभी कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस के बड़े नेता भी इसी समुदाय से हैं। पिछले 12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में बेंगलुरु-मैसुरू एक्सप्रेसवे का उद्घाटन भी मांड्या से ही किया है, जो कि वोक्कालिगा का दबदबा वाला जिला माना जाता है।

पुराने मैसूर क्षेत्र पर बीजेपी का खास फोकस
कर्नाटक के पुराने मैसूर राज्य वाले क्षेत्र में 2019 के लोकसभा चुनाव को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का कभी भी खास प्रभाव नहीं रहा है। कांग्रेस और जेडीएस इस क्षेत्र में पार्टी पर भारी पड़ती रही हैं। यह वोक्कालिगा समुदाय का गढ़ है। इस समाज में अपनी पैठ जमाने के लिए बीजेपी लंबे समय से संघर्ष करती रही है। यही वजह है कि इसबार पार्टी ने पुराने मैसूर क्षेत्र पर और ज्यादा ध्यान दिया है। पिछले लोकसभा चुनावों ने उसे इसका हौसला भी दे रखा है। यह इलाका पार्टी के लिए इस चुनाव में इस वजह से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर यहां पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया तो सत्ता में वापसी की उसकी उम्मीदें और बढ़ सकती हैं। पुराने मैसूर राज्य वाले क्षेत्र में आज के रामनगर, मांड्या, मैसूरु, चामराजनगर, कोडागु, कोलार, तुमकुर और हासन जिले आते हैं।

वोक्कालिगा समुदाय के गढ़ में हैं 58 सीटें
इस क्षेत्र में बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती ये भी है कि दोनों प्रमुख विपक्षी दलों के सबसे प्रभावी नेता वोक्कालिका समुदाय से ही आते हैं। जेडीएस के नेता और पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार दोनों ही वोक्कालिगा समाज के नेता हैं। इस क्षेत्र में विधानसभा की 58 सीटे हैं। इनमें से 24 पर जेडीएस, 18 पर कांग्रेस का कब्जा है और बीजेपी के पास 15 सीटें हैं। हालांकि, भाजपा को बीएसपी से निष्कासित एमएलए एन महेश का भी समर्थन है, जो चामराजनगर की कोल्लेगल सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली बड़ी जीत
कर्नाटक में बीजेपी चार बार सत्ता में आई है। विधानसभा चुनावों में वह इनमें से हर बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा पार करने से पिछड़ती रही है। दो बार तो उसपर कथित 'ऑपरेशन लोटस' के दम पर विपक्षी विधायकों को अपने खेमे में करके सरकार बनाने के आरोप भी लगे हैं। लेकिन, बीजेपी के लिए उम्मीद की किरण 2019 का लोकसभा चुनाव है, जब पार्टी ने राज्य की 28 में से 25 सीटें जीतकर कांग्रेस और जेडीएस का सफाया कर दिया था।
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भाजपा को इसलिए भी दिख रही है उम्मीद
हालांकि, तब भी हासन लोकसभा क्षेत्र से पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते प्रजवाल रेवन्ना को ही जीत मिली थी। लेकिन, भाजपा के लिए उत्साहित होने वाली बात ये है कि तब उसकी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुमलता अंबरीश ने मांड्या सीट पर जीत दर्ज की थी, जबकि इसे हमेशा से जनता दल (सेक्युलर) का गढ़ माना जाता रहा है। इस सीट पर देवगौड़ा के एक और पोते और एचडी कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी को अभिनेत्री से नेता बनीं अंबरीश के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

मांड्या में ही हुई है पीएम मोदी की सभा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी 12 मार्च को ही मांड्या से कई प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखाई है, जिसमें महत्वाकांक्षी बेंगलुरु-मैसूरु एक्सप्रेसवे भी शामिल है। इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन बेंगलुरु या मैसुरू में भी हो सकता था, लेकिन पीएम मोदी ने मांड्या को चुना तो इसकी सियासी अहमियत समझी जा सकती है। पीएम मोदी के कार्यक्रम से एक दिन पहले ही स्थानीय सांसद ने बीजेपी को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया था।

भाजपा के बढ़ते जोर से कांग्रेस परेशान
वोक्कालिगा समुदाय का गढ़ माने जाने वाले मांड्या जिले में सात एमएलए हैं, जिनमें से 6 जेडीएस के हैं। इसी तरह से रामनगर के चार में तीन और हासन में सात में से 6 सीटों पर उसी का कब्जा है। यही वजह है कि कर्नाटक में इस बार पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने के लिए भाजपा ने वोक्कालिगा प्रभावी क्षेत्र पर बहुत जोर दिया है। कांग्रेस को भी बीजेपी के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा है और इसलिए वह भाजपा पर वोक्कालिगा और मुसलमानों के बीच दुश्मनी पैदा करने की कोशिश के आरोप लगा रही है।












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