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रेप की घटनाओं पर क्यों नहीं खौलता भारत का ख़ून

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    गुजरात पुलिस इस समय ऐसी लड़की के बलात्कारियों की तलाश कर रही है जिसकी अब तक शिनाख़्त नहीं की जा सकी है.

    न पीड़िता का चेहरा पहचाने जाने लायक है, न उसका नाम पता है, न घर मालूम है और न ही फ़ोन नंबर.

    ये घटना सूरत शहर की है जिसे दुनियाभर में डायमंड सिटी के रूप में जाना जाता है. पीड़िता की उम्र नौ से ग्यारह साल के बीच बताई जा रही है.

    बच्ची का क्षत विक्षत शव इसी शहर के एक खेल के मैदान में झाड़ियों में पड़ा हुआ पाया गया था जिसके शरीर पर चोटों के 86 निशान पाए गए हैं.

    शव का पोस्टमॉर्टम करने वाले सर्जन मानते हैं हैं कि ये चोटें "लाश मिलने के एक हफ़्ते से लेकर एक दिन पुरानी लगती हैं"

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    पुलिस को नहीं पता लड़की की पहचान

    पुलिस इस मामले में मानती है कि लड़की को क़ैद करके टॉर्चर किया गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया. बच्ची के शरीर पर फटे हुए कपड़े मिले हैं.

    लेकिन लाश मिलने के 10 दिन बाद भी पुलिस को रेप पीड़िता के बारे में कुछ नहीं पता है.

    पुलिस को इस बच्ची से जुड़ी जानकारी खोए हुए बच्चों की लिस्ट खंगालने के बाद भी नहीं मिली है.

    स्थानीय पुलिस प्रमुख कहते हैं, "लाश बरामद होने की जगह पर किसी तरह के संघर्ष के संकेत नहीं मिले हैं."

    जब रेप कमजोर तबकों को डराने और ताक़त हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगे तब संघर्ष करना बेमानी है.

    रेप और संघर्ष की वजह

    कई लोग मानते हैं कि ऐसा समाज जो ऊंच-नीच से भरा हो, पितृसत्तात्मक और तेजी से दो धड़ों में बंट रहा हो और जिसमें नफ़रत के सहारे वोट जुटाए जा रहे हों तो वहां ये चौंकाने वाली बात नहीं है.

    भारत में लिंगानुपात की बात करें तो यहां प्राकृतिक लिंगानुपात 105 लड़कों पर 100 लड़कियों की जगह 112 लड़कों पर 100 लड़कियां हैं.

    कई लोग मानते हैं कि इसी वजह से महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध बढ़ रहे हैं.

    हरियाणा में सामूहिक बलात्कार से जुड़े सबसे ज़्यादा मामले सामने आते हैं.

    हरियाणा वो प्रदेश है जहां पर सबसे ख़राब लिंगानुपात है लेकिन अब इसमें सुधार आ रहा है.

    जनवरी के महीने में ही हरियाणा में ये मामले सामने आए थे

    • 50 साल के पुरुष को 10 साल की बच्ची के शरीर को क्षत विक्षत करने के मामले में पकड़ा गया
    • 15 साल के लड़के के साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ कथित रूप से रेप करने के मामले में पकड़ा गया
    • 20 साल की महिला का दो लोगों द्वारा रेप किए जाने का मामला
    • 24 साल के पुरुष को एक छात्रा को अगवा करने के मामले में पकड़ा गया
    • एक बच्ची का शव चोटिल और नग्न अवस्था में खेतों में पाया गया

    अहम बात ये है कि ये सिर्फ वो मामले हैं जिनमें शिकायत दर्ज कराई गई.

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    कश्मीर में क्या हुआ?

    जनवरी में ही भारत प्रशासित कश्मीर में यौन कुंठा और धार्मिक कट्टरता का ख़तरनाक मिश्रण एक आठ साल की मुस्लिम बच्ची के रेप और हत्या के रूप में सामने आया है.

    उसे अगवा करने के बाद कथित तौर पर एक हिंदू मंदिर में क़ैद किया गया. इसके बाद उसे जंगल में फेंक दिया गया. ये बच्ची खानाबदोश बकरवाल समुदाय से जुड़ी थी.

    ये घटना इस अल्पसंख्यक मुस्लिम जाति के लिए एक चेतावनी की तरह थी कि वे राज्य के उस हिस्से में हिंदुओं की जमीन पर अपने जानवरों को चराना बंद कर दें जहां सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है.

    कश्मीर सामूहिक बलात्कार मामले में आठ हिंदू लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई है.

    इस मामले में अभियुक्त के समर्थन में रैली निकालने वाले सत्तारूढ़ बीजेपी के दो नेताओं ने अपना इस्तीफा दे दिया है.

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    ट्विटर पर मोदी की प्रतिक्रिया

    जब इन नेताओं के ख़िलाफ़ विऱोध शुरू हुआ तब उन्होंने इस्तीफ़ा दिया. इसके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्विटर पर निंदा करनी पड़ी.

    केरल में सांप्रदायिकता के बढ़ते चलन से प्रभावित एक बैंक मैनेजर ने गर्व से फेसबुक पर लिखा, "अच्छा हुआ कि चरवाहा समुदाय की ये लड़की मार दी गई क्योंकि कल यही लड़की भारत के ख़िलाफ़ मानव बम बनकर आती."

    इसके बाद इस बैंक मैनेजर को नौकरी से निकाल दिया गया है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा है कि "बच्चियों को न्याय मिलेगा."

    कई लोग मानते हैं कि उनकी ओर से आने वाले आश्वासन के मायने कम होते जा रहे हैं. (उनकी ही पार्टी के विधायक-सांसदों पर बलात्कार के मामले दर्ज हैं और रेप अभियुक्तों का समर्थन करते हैं.)

    'लड़कों से ग़लतियां हो जाती हैं'

    साल 2014 में जब एक पत्रकार के गैंगरेप मामले में तीन पुरुषों को गिरफ़्तार किया गया था तब एक क्षेत्रीय पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा था, "लड़कों से गलतियां हो जाती हैं. उन्हें इसके लिए फांसी की सज़ा नहीं होनी चाहिए. हम एंटी-रेप कानूनों में परिवर्तन लाएंगे."

    हर रोज महिलाओं के रेप और हत्याओं की ख़बरें सामने आती हैं.

    भारतीय महिलाओं को इस हक़ीकत से खुद को आत्मसात कराना है कि उन्हें खुद को बचाना है, सही कपड़े पहनने हैं, अकेले बाहर नहीं जाना है या फिर घर पर रहना है.

    अगर ये सब नहीं तो जोख़िम उठाने को तैयार रहना है. इसमें सबसे ज़्यादा भयावह बात ये है कि ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है जिसमें बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है.

    भारत के क्राइम रिकॉर्ड के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के रेप के मामले साल 2012 से 2016 तक डबल हो गए हैं. इसमें से 40 फ़ीसदी मामलों में पीड़िताएं बच्चियां थीं.

    आंकड़ों में इस बढ़त का कारण साल 2012 के निर्भया गैंगरेप केस के बाद आम लोगों में रेप की समझ बढ़ने और पुलिस-मीडिया द्वारा रेप केसों की बेहतर रिपोर्टिंग हो सकती है.

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    निर्भया गैंगरेप केस के बाद

    अगर रेप के बढ़ते आंकड़ों की बात करें तो भारत एक अकेला ऐसा देश नहीं है.

    लेकिन कई लोगों का मानना है कि पितृसत्तात्मकता, सामंतवाद और विषम लिंगानुपात ऐसे मामलों को बढ़ा रहे हैं.

    ऐसे में महिलाओं की तरफ सामाजिक उदासीनता भी एक पहलू है. महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा कभी चुनावी मुद्दे नहीं बनते हैं.

    बलात्कार को कई संस्कृतियों में मान्यता भी प्राप्त है.

    जब गोथ जाति ने 410 एडी में रोम पर हमला किया था तो संत अगस्टाइन ने युद्ध के समय होने वाले बलात्कारों को "प्राचीन और प्रथागत बुराई" बताया था.

    अमरीकी शोधार्थी वेंडी डोंजियर के मुताबिक़, "एक ऐतिहासिक भारतीय संधि ने बलात्कार को एक तरह की शादी जैसा वैधानिक दर्जा दिया और पीड़िताओं को पूर्वव्यापी प्रभाव से कानूनी मंजूरी भी दी."

    समस्या का निदान

    ऐसे में क्या साल 2012 के गैंगरेप कांड के बाद दुनिया भर में पैदा हुए आक्रोश और जनप्रदर्शनों के बाद भी कुछ नहीं बदला है?

    ये कहना मुश्किल है. एक अच्छी ख़बर ये है कि रेप के मामलों में शिकायतें दर्ज होना शुरू हो गई हैं.

    लेकिन बुरी ख़बर ये है कि अभी भी इस न्याय व्यवस्था से कई अभियुक्त लोग रिहा हो जाते हैं.

    कई लोग ये मानने को तैयार नहीं हैं कि यौन शोषण एक ऐसी समस्या है जो भारत को नुकसान पहुंचा रही है.

    और मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी समेत ज़्यादातर पार्टियां इस समस्या का निदान निकालने के लिए तैयार नज़र नहीं आ रही हैं.

    और ये आर्टिकल लिखना बंद करते-करते एक सहयोगी ने मुझे बताया है कि गुजरात के ही राजकोट में एक 9 साल की बच्ची की हत्या का मामला सामने आया है.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Why Indias blood does not eat on rap incidents

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