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अरविंद केजरीवाल को बार-बार थप्पड़ क्यों मारे जाते हैं?

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अरविंद केजरीवाल

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर शनिवार को एक बार फिर हमला हुआ है। केजरीवाल मोती नगर इलाके में रोड शो कर रहे थे तभी एक शख्स अचानक से उनकी गाड़ी के सामने आया और उन्हें थप्पड़ मार दिया था। हालांकि यह पहली बार हुआ हो ऐसा नहीं है। केजरीवाल के साथ ऐसी दुर्घटनायें पहले भी हो चुकी हैं। हालांकि इसके पीछे कोई एक कारण नहीं है। इसे समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे की ओर अन्ना आंदोलन की तरफ जाना होगा। केजरीवाल को समझना होगा। आम जन की उनसे जो उम्मीद थी उसे भी समझना होगा।

कब-कब उनके साथ ऐसी दुर्घटनायें हुयी, इसकी चर्चा बाद में करेंगे।

केजरीवाल का सफर कैसा रहा है

केजरीवाल का सफर कैसा रहा है

वैसे तो अन्ना आंदोलन से आम जन की आवाज़ बने अरविंद केजरीवाल का सफर कम रोमांचक नहीं है। सोशल एक्टिविस्ट रहे केजरीवाल भारत सरकार में रेवेन्यू ऑफिसर रह चुके हैं। RTI के क्षेत्र में इनके योगदान ने इन्हें प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार दिलाया है। एक समय भ्रष्टाचार के विरुद्ध पूरे देश के युवाओं को अपने आंदोलन के जरिये लामबंद करने का करिश्मा और फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री तक का सफर, कम उपलब्धि भरा काम नहीं है।

राजनीतिक पार्टी के गठन से कैसी प्रतिक्रियाएं मिलीं?

राजनीतिक पार्टी के गठन से कैसी प्रतिक्रियाएं मिलीं?

दिल्ली के रामलीला मैदान में उमड़ी भीड़ के सामने जब केजरीवाल ने राजनीति में जाने की घोषणा की थी तब उस समय उपस्थित भीड़ नें तो इस फैसले के समर्थन में अपना हाथ उठाया था लेकिन, बाहर इस फैसले की आलोचना भी कम नहीं हुई थी, और इसकी ठोस वजह भी थी। भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़े हुये अन्ना आंदोलन के समय अरविंद ने खुले मंच से यह कहा था की हम राजनीति करने नहीं आये हैं और न ही हमारा मकसद राजनीति है। हम सरकार को यह बताना चाहते हैं की इस देश में भ्रष्टाचार अब नहीं चलेगा। देश की जनता अब जाग चुकी है। उसी मंच से केजरीवाल ने कहा था कि मैं आजीवन जनता के हित में सड़क पर उतरता रहूँगा और आपको यकीन दिलाता हूँ की मैं राजनीति में कभी नहीं आऊँगा। आप मेरा साथ दीजिये।

लेकिन ऐसा हो न सका। अरविंद बहुत जल्द ही राजनीति में आ गए। वर्तमान राजनीति को 'काजल की कोठरी' कहने वाले अरविंद इसी 'काजल की कोठरी' में आये लेकिन इस बार उनका तर्क अलग था। अबकी उन्होंने यह कहा की सरकार हमारी आपकी सुनती नहीं है इसलिए अब यह जरूरी है की हम लोकतांत्रिक तरीके से गैर जिम्मेदार और भ्रष्ट सरकार को चुनौती दें। और इसके लिए यह आवश्यक है की हम खुद की सरकार बनायें। हम सब मिलकर आप की सरकार बनायें। और अरविंद ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई।

अरविंद कितने सफल रहे?

अरविंद कितने सफल रहे?

अरविंद इसमें भी सफल रहे। अपनी पार्टी के गठन के तुरंत बाद हुये दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सहयोग से अपनी पार्टी की सरकार बना ली और खुद मुख्यमंत्री बने। हालांकि उनका पहला कार्यकाल 28 दिसम्बर 2013 से 14 फ़रवरी 2014 तक की एक छोटी अवधि तक ही रहा। इसी समय की बात है जब अरविंद केजरीवाल पर एक शख्स नें स्याही फेंका था। इस आदमी ने खुद को अन्ना समर्थक बताया था।

केजरीवाल के साथ आखिर विवाद की ऐसी वजह क्या है ?

केजरीवाल के साथ आखिर विवाद की ऐसी वजह क्या है ?

फिर मार्च 2014 में हरियाणा के भिवानी में जब केजरीवाल रोड शो कर रहे थे तो उनकी जीप पर चढ़कर एक युवक ने उनपर हमला किया था। संयोग से यह व्यक्ति भी खुद को अन्ना समर्थक ही बता रहा था। अप्रैल 2014 में एक ऑटो रिक्‍शा ड्राइवर ने दिल्‍ली के सुल्‍तानपुरी इलाके में केजरीवाल को थप्‍पड़ मारा था। बाद में केजरीवाल ऑटो ड्राइवर के घर भी गए जहां उसने केजरीवाल से माफी मांग ली थी।

इन घटनाओं ने एक समझ पैदा की कि आम जन जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध लामबंद हुए थे, उनमें से कुछ तबके ऐसे भी थे जो केजरीवाल के राजनीतिक पार्टी के गठन से सिर्फ असहमत ही नहीं थे बल्कि उन्हें गुस्सा भी था। भावना के स्तर पर उनका समझना था की उनको फिर से धोखा दिया गया है।

2014 के लोकसभा चुनाव में केजरीवाल बनारस से नरेंद्र मोदी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लड़ रहे थे। इस दौरान अरविंद केजरीवाल गुजरात भी गये थे। यहां पर भी केजरीवाल के काफिले पर हमला हुआ था। बनारस में भी इस दौरान केजरीवाल पर अंडे और स्याही फेके गये। केजरीवाल ने इन घटनाओं को विपक्ष की गंदी राजनीति बताया था। फिर 8 अप्रैल 2014 को अरविंद केजरीवाल के दिल्ली में रोड शो के दौरान एक शख्स ने उन्हें थप्पड़ मारने की कोशिश की थी।

जनवरी 2016 में आम आदमी सेना की सदस्‍य भावना अरोड़ा ने केजरीवाल पर स्‍याही फेंकी थी। फरवरी 2016 में पंजाब के लुधियाना में केजरीवाल की कार पर कुछ लोगों हमला किया था।

अप्रैल 2016 में सीएम केजरीवाल पर एक आदमी ने जूता फेंका था। यह आदमी दिल्ली में ऑड-ईवन स्कीम के दौरान सीएनजी स्टिकर की बिक्री में की जा रही धांधली से नाराज था। इसे भ्रष्टाचार से लड़ने के मुद्दे पर बनी आम आदमी की ही सरकार में भ्रष्टाचार होने से उपजे गुस्से के रूप में भी समझा जा सकता है।

नवंबर 2018 में केजरीवाल पर अनिल शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने मिर्च पाउडर फेंका था। हालांकि इसमें अनिल शर्मा ने कहा था की आप के कुछ नेता नें ही उन्हें इसके लिये कहा था। अगर ऐसा ही था तो यह आम आदमी पार्टी में मौजूद भितरघात को भी दिखता है।

थप्पड़ मारे जाने पर केजरीवाल क्या कहते हैं, क्या फिर ऐसा होगा?

थप्पड़ मारे जाने पर केजरीवाल क्या कहते हैं, क्या फिर ऐसा होगा?

खैर जो भी घटनायें हुयी हैं इसे किसी भी हालात में सही नहीं ठहराया जा सकता है। अगर ऐसा राजनीति से प्रेरित होकर किया गया है तो यह समझने की जरूरत है कि लोकतंत्र में एक चुनी हुयी सरकार को पूरा सम्मान देना लोकतंत्र को सम्मान देना है। वैचारिक विरोध हो सकता है। और यह होना भी चाहिए, लेकिन यह विरोध लोकतांत्रिक मूल्यों का ख़्याल करते हुये होना चाहिये। इन्हीं बातों का ख़्याल उन्हें भी रखना चाहिए जो गैरराजनीतिक होकर ऐसा करते हैं।

हालिया घटनाक्रम को केजरीवाल ने अपने ऊपर राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कहा है की पिछले 5 सालों में यह उन पर नौंवा हमला है और उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद पाँचवां। किसी भी मुख्यमंत्री की सुरक्षा में इतनी चूक नहीं होती है। मेरी सुरक्षा में चूक की जिम्मेदार केंद्र की सरकार है क्योंकि इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। ऐसे हमले उनके साहस और उनकी आवाज़ को दबा नहीं सकते हैं।

वैसे सुरक्षा को लेकर केजरीवाल भी उतने चौकस नहीं रहे हैं। लेकिन इस ताजा घटना के बाद उन्होंने सुरक्षा के तमाम इंतजामों को पुलिस अधिकारियों के तरीके से मानने पर सहमत हुये हैं। उम्मीद है की अब केजरीवाल पर ऐसे हमले नहीं होंगे।

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English summary
Why have Arvind Kejriwal been slapped repeatedly
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