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अमित शाह ने जो संसद में कहा, उस पर शक क्यों

By कमलेश
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प्रेस कांफ्रेंस
BBC
प्रेस कांफ्रेंस

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासनों के बाद सीएए, एनपीआर और एनआरसी का विरोध कर रहे संगठनों ने गृह मंत्री से इन आश्वासनों को क़ानूनी जामा पहनाने की मांग की है.

गुरुवार को राज्यसभा में गृह मंत्री ने एक चर्चा के दौरान कहा था कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के लिए किसी व्यक्ति को किसी तरह का कोई दस्तावेज़ देने की ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने कहा था कि दस्तावेज़ न देने पर किसी को डाउटफुल सिटीज़न चिन्हित नहीं किया जाएगा.

अमित शाह कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आजा़द के एक सवाल का उत्तर दे रहे थे जिसमें उन्होंने पूछा था कि एनपीआर के फॉर्म में डाउटफुल सिटीज़न का बिंदु हटाया जा रहा है या नहीं.

शनिवार को सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे दो संगठनों 'हम भारत के लोग' और 'अलायंस अगेंस्ट सीएए-एनआरसी-एनपीआर' ने संयुक्त रूप से एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया और गृह मंत्री के बयान पर 'लिख के दो' अभियान की शुरुआत की.

इस प्रेस वार्ता में स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव, हर्ष मंदर, जमियत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव नियाज़ फ़ारूक़ी, जमात-ए-इस्लामी के अध्यक्ष सदातुल्लाह हुसैन और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष तौक़ीर रज़ा ख़ान शामिल थे.

इन संगठनों की मांग है कि गृह मंत्री ने एनपीआर पर जो आश्वासन दिया है उसे क़ानून में बदलाव करके और पुख्ता करें ताकि लोगों का डर ख़त्म हो सके. ऐसा न होने पर वो एनपीआर के बहिष्कार की अपील को ज़ारी रखेंगे. वो लोगों से एनपीआर के दौरान जानकारी न देने के लिए आग्रह करेंगे.

योगेंद्र यादव ने कहा, ''गृह मंत्री के एनपीआर पर संसद में बोलने के बाद मीडिया में एक बात चल निकली कि अब तो गृह मंत्री ने कह दिया तो आगे कौन-सी मांगें बची हैं. अब क्या मांग रहे हैं. लेकिन, हमारा कहना है कि गृह मंत्री ने जो कहा है उसे क़ानून की शक्ल दें क्योंकि उन्होंने एनपीआर को लेकर जो आश्वासन दिए हैं वो मौजूदा क़ानून से बिल्कुल उलट हैं.''

गृह मंत्री अमित शाह
Getty Images
गृह मंत्री अमित शाह

क्या कहा था गृह मंत्री ने

गृह मंत्री ने राज्यसभा में कहा था, ''एनपीआर के दौरान लोग जितनी जानकारी देना चाहें उतनी देने के लिए आज़ाद हैं. उनके पास जो जानकारी है वो दे दें और जो नहीं है उसे देना ज़रूरी नहीं.''

इसके बाद कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि क़ानून ये कहता है कि जब एनपीआर होगा तो उसमें दस सवाल और पूछे जाएंगे. जो राज्य सरकार का गणनाकार है वो जाकर पूछेगा और उसके बाद डी (डाउटफुल) लगा देगा और बाद में जांच शुरू होगी.

लेकिन, गृह मंत्री ने कपिल सिब्बल से कहा कि वो रिकॉर्ड में कुछ कहना चाहते हैं. उन्होंने कहा, ''इस देश में किसी को एनपीआर की प्रक्रिया से डरने की ज़रूरत नहीं है. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि अगर किसी जानकारी की जगह ख़ाली होगी तो उसमें डी लगा देंगे.''

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने फिर से कहा कि मुझे लगता है, ''गृह मंत्री कह रहे हैं कि डी किसी के सामने नहीं लगेगा.'' इसके जवाब में अमित शाह ने कहा, ''हां, जी''.

एनपीआर और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन
EPA
एनपीआर और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन

लेकिन, योगेंद्र यादव कहते हैं कि एनपीआर के जो नियम बने हैं वो ऐसा नहीं कहते हैं. जहां तक जानकारी देने की छूट की बात है तो नियम कहते हैं कि जानकारी देना अनिवार्य है और अगर नहीं देंगे तो जुर्माना लगेगा. नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और पहचान पत्र जारी करना), नियमावली 2003 के तहत इसका साफ़-साफ़ उल्लेख किया गया है.

एनपीआर देश के नागरिकों का एक रजिस्टर है. इसे नागरिकता क़ानून, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और पहचान पत्र जारी करना), नियमावली 2003 के प्रावधानों के तहत लागू किया जाता है.

योगेंद्र यादव ने ये भी कहा, ''दिसंबर 2003 में भारत सरकार ने नागरिकता क़ानून के नए नियम बनाए थे. ये नियम साफ़तौर पर कहते हैं कि एनपीआर होगा और उसके आधार पर डी यानी डाउटफुल वोटर मार्क किया जाएगा. इसलिए हम इस फ़ैसले पर पहुंचे कि गृह मंत्री को लिखकर इस बात को पुख़्ता करना होगा. लिखकर देने का मतलब ये है कि पहले से मौजूद नियमों को संशोधन करके बदल दें जिससे लोगों का डर ख़त्म हो जाए.''

''सरकार 2003 की धारा 3(5), 4(3), 4(4), 7(2) और 17 में संशोधन कर दे. जो उन्होंने संसद में बोला उसके अनुसार इन धाराओं में संशोधन कर दीजिए और इसके बाद हम एनपीआर के बहिष्कार की अपील वापस ले लेंगे.''

प्रेस कांफ्रेंस
BBC
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क्या कहती हैं धाराएं

धारा 3(5) कहती है कि भारतीय नागरिकता के स्थानीय रजिस्टर (पंजी) में जनसंख्या रजिस्टर से सत्यापन के बाद लोगों के ब्यौरे शामिल होंगे.

धारा 4(3) कहती है कि भारतीय नागरिकता के स्थानीय रजिस्टर की तैयारी के लिए जनसंख्या रजिस्टर में दी गई जानकारी को स्थानीय रजिस्ट्रार द्वारा सत्यापित और जांचा जाएगा.

धारा 4(4) कहती है कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान जिनकी नागरिकता संदिग्ध होती है उनके विवरण को लोकल रजिस्ट्रार जनसंख्या रजिस्टर में आगे जांच के लिए उपयुक्त चिह्न के साथ दर्ज करेगा. सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति या परिवार को सूचित किया जाएगा.

धारा 7(2) कहती है कि किसी परिवार के मुखिया की ये ज़िम्मेदारी होगी कि जनसंख्या रजिस्टर की तैयार के दौरान नाम और सदस्य की संख्या और अन्य ब्यौरे का सही विवरण दे.

धारा 17 कहती है कि धारा 5, 7, 8, 10, 11 और 14 का उल्लंघन करना जुर्माने के साथ दंडात्मक होगा. ये जुर्माना 1000 रुपए तक हो सकता है.

पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह
Getty Images
पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह

प्रेस वार्ता के दौरा सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने कहा, ''एनपीआर को जनगणना से जोड़ा गया है. जनगणना राष्ट्र निर्माण के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. हम उसे सुरक्षित करना चाहते हैं. जनगणना ज़रूर हो लेकिन एनपीआर को उससे अलग किया जाएगा. जनगणना को शांति से पूरा करना चाहिए लेकिन हम एनपीआर के लिए लोगों को बहिष्कार करने के लिए कहेंगे.''

लेकिन, क्या इस बहिष्कार से जनगणना की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी क्योंकि दोनों प्रक्रियाएं एकसाथ चलने वाली हैं. इसके जवाब में योगेंद्र यादव का कहना था कि जनगणना बहुत ही अहम प्रक्रिया है इसलिए हम भी यही चाहते हैं कुछ भी ऐसा नहीं होना चाहिए जिसका जनगणना पर ग़लत असल पड़े. हम चाहते हैं कि जनगणना में हर तरह से सहयोग करें. जनगणना और एनपीआर को अलग-अलग करना चाहिए.

प्रेस वार्ता में मौजूद नियाज़ फ़ारूक़ी ने क़ानून में बदलाव और एनपीआर के बहिष्कार की मांग से सहमति जताई. उन्होंने कहा, ''एनपीआर से पूरा देश प्रभावित होगा. कई मुस्लिम संगठन इकट्ठा हुए हैं क्योंकि मुसलमानों में ये डर फैलाया गया कि अगर वो एनपीआर में हिस्सा नहीं लेंगे तो बड़ा नुक़सान हो जाएगा. हम लोग इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अगर मुसलमान एनपीआर में हिस्सा लेंगे तो उससे बड़ा नुक़सान हो जाएगा. हम सब लोगों तक इस संदेश को पहुंचाना चाहते हैं. एनपीआर में हिस्सा ना लेकर यक़ीनी तौर पर लोगों का फ़ायदा होगा.''

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कैसे होगा बहिष्कार

योगेंद्र यादव ने बताया कि सबसे पहले सभी संगठन एनपीआर और एनआरसी का विरोध करने वाली राज्य सरकारों से अनुरोध करेंगे कि प्रस्ताव पास करने के अलावा वो केवल जनगणना को लेकर ही नोटिफिकेशन जारी करें. अगर एनपीआर को रोकना है तो सिर्फ़ प्रस्ताव पास करना ही काफ़ी नहीं होगा.

उन्होंने बताया कि दूसरे तरीक़े के तहत तमाम संगठनों की तरफ़ से एनपीआर के बारे में कम से कम 100 जगहों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण प्राप्त लोग आगे गांव-मोहल्लों तक जाकर लोगों को समझाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि कोई विरोध हिंसात्मक रूप न ले.

जहां एनआरसी और एनपीआर को विरोध करने वाले संगठन दोनों प्रक्रियाओं को जुड़ा हुआ बता रहे हैं वहीं, सरकार का कहना है कि फ़िलहाल एनपीआर हो रहा है और एनआरसी नहीं किया जाएगा.

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English summary
Why doubt in what Amit Shah said in Parliament
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