नरेंद्र मोदी विदेशी नेताओं को गुजरात क्यों बुलाते हैं?
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अहमदाबाद में आज मुलाकात करेंगे.
इस सप्ताह के शुरुआत में, मोदी जामनगर में विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसीन के उद्घाटन के मौके पर मारिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुग और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ट्रेडोस एडनॉम गेब्रियेसस की मेजबानी कर चुके हैं.
अगर अतीत में देखें तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दूसरे नेता भी गुजरात गए हैं. 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से दुनिया के दूसरे राष्ट्राध्यक्षों का गुजरात जाना बढ़ा है.
पहले ज़्यादातर राष्ट्राध्यक्ष दिल्ली और ताज महल देखने आगरा तक खुद को सीमित रखते थे, कुछ लोग मुंबई और चेन्नई भी जाते थे. लेकिन गुजरात का अहमदाबाद अब कूटनीतिक बैठकों के नए केंद्र के तौर पर उभरा है.
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शी जिनपिंग का गुजरात दौरा
सितंबर 2014 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने भारतीय दौरे पर सबसे पहले अहमदाबाद गए और उसके बाद दिल्ली आए थे. 2017 में जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो अब 13 और 14 सितंबर को अहमदाबाद में रहे.
2018 में इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू ने भी अहमदाबाद का दौरा किया. वे दिल्ली और मुंबई भी गए थे. फरवरी, 2020 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप अपनी पत्नी के साथ के दो दिनों के लिए जब भारत आए तो पहले अहमदाबाद गए, फिर आगरा और आख़िर में दिल्ली.
गुरुवार को ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अहमदाबाद पहुंचेंगे. अहमदाबाद में कुछ कार्यक्रम और बैठकों में शामिल होने के बाद वे दिल्ली के लिए रवाना होंगे.
बदल गई है परंपरा
2014 से पहले देखें तो ज़्यादातर देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की भारत यात्रा दिल्ली तक सीमित होती थी. व्यापारिक राजधानी मुंबई होने के चलते कुछ देशों के राष्ट्र प्रमुख वहां भी जाते थे. लेकिन अपवाद स्वरूप ही कोई नेता, चेन्नई और कोलकाता जाते. अलग अलग देशों के शीर्ष नेताओं की बैठक दिल्ली में ही होती थी.
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लेकिन अब हालात बदल गए हैं. नरेंद्र मोदी दुनिया के कई देशों के राष्ट्र प्रमुख को गुजरात आमंत्रित कर चुके हैं. वहां उनके आगमन पर रोड शो और रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन हो चुका है. 2020 में जब डोनाल्ड ट्रंप गुजरात आए तब मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, रोड शो का आयोजन भी हुआ था. उस कार्यक्रम की आलोचना भी हुई थी.
जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे ने भी अपनी भारत यात्रा गुजरात से ही शुरू की थी. उनकी गुजरात यात्रा को उस वक्त विश्लेषकों ने बहुत महत्वपूर्ण बताया था क्योंकि तब गुजरात में 50 जापानी कंपनियां अपना कारोबार कर रही थीं.
वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब अपनी पत्नी के साथ 2014 में अहमदाबाद आए थे, तब साबरमती नदी के किनारे पर उन्हें लोकसंगीत के साथ उनका स्वागत किया गया था.
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक विनोद शर्मा कहते हैं, "इससे पहले ऐसा नहीं था. विदेशी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अपने घरेलू राज्य में भारतीय प्रधानमंत्री आमंत्रित नहीं करते थे." हालांकि पिछले कुछ समय में कई दूसरे नेताओं ने दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों का दौरा किया है.
अक्टूबर, 2021 में डेनमार्क के प्रधानमंत्री मैट फ्रेडरिकसन ने दिल्ली का दौरा किया था और फरवरी, 2020 में म्यांमार के राष्ट्रपति यू विन मिंट ने दिल्ली और आगरा का दौरा किया था.
श्रीलंका, भूटान और पुर्तगाल के प्रधानमंत्री भी 2018 और 2019 में भारत के दौरे पर आए तो दिल्ली आए थे. अक्टूबर, 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूनेस्को की वैश्विक धरोहर सूची में शामिल तमिलनाडु के मामाल्लापुरम गए थे. इटली के प्रधानमंत्री पाउलो जेंटिलो ने अक्टूबर, 2017 में दिल्ली का दौरा किया था.
सवाल यह है कि किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री गुजरात का दौरा क्यों करते हैं?
गुजरात का कारोबारी मॉडल
दरअसल गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात समिट के आयोजन की शुरुआत की थी. इस समिट ने देश और विदेश के निवेशकों का आकर्षित किया था. बीजेपी ने गुजरात को अपने कारोबारी मॉडल राज्य के तौर पर प्रचारित किया.
गुजरात चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष हेमंत शाह बताते हैं, "विदेशी नेताओं के गुजरात आने से इंडस्ट्री को काफ़ी फ़ायदा हुआ है. आज दुनिया के नक्शे पर गुजरात का अहम स्थान है."
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हेमंत शाह गुजरात को मिलने वाले लाभ का जिक्र करते हैं, "जब भी कोई विदेशी मेहमान आता है तो उसे हमारे राज्य को समझने का मौका मिलता है. इसका फ़ायदा लंबे समय तक होता है. उसके आधार पर ही वे निवेश की योजना बनाते हैं. प्रधानमंत्री गुजरात के हैं, इससे गुजरात को लाभ मिलता है तो ये अच्छा ही है."
वहीं जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत प्रोफेसर और लेखक घनश्याम शाह इस तर्क से असहमति जताते हुए कहते हैं, "जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री या भारत के प्रधानमंत्री नहीं थे, तब भी गुजरात में विदेशी निवेश आता था. कपड़ा मिलों के चलते दुनिया भर में अहमदाबाद की पहचान थी. गुजरात की कोराबारी छवि बीजेपी सरकार से बहुत पहले की है."
राजनीतिक फ़ायदा लेने की कोशिश?
डोनाल्ड ट्रंप, नेतान्याहू और शिंज़ो अबे के गुजरात आने पर रोड शो का आयोजन किया गया जिसकी आलोचना भी हुई. लेकिन कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश होती है.
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक विनोद शर्मा कहते हैं, "संघीय राजनीति में हर राज्य की एक बराबर अहमियत होती है और अगर एक राज्य को महत्व मिले तो यह नुकसानदेय है."
विनोद शर्मा कहते हैं, "जब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने टीम इंडिया की बात की थी. जब टीम की बात हो तो सभी खिलाड़ियों को खेलने के बराबरी के मौके मिलने चाहिए. केंद्र सरकार को देखना चाहिए कि किन राज्यों में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के संसाधन मौजूद हैं. उन राज्यों में ज़्यादा से ज़्यादा विदेशी निवेश लाने के लिए स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा शुरू कराने की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है. हर राज्य को बराबर का मौका मिलना चाहिए."
हालांकि विनोद शर्मा साथ में यह भी जोड़ते हैं, "अगर दूसरे देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ही गुजरात में विशेष निवेश करना चाहें और उस पर ज़ोर दें, तब बात दूसरी है."
वरिष्ठ गुजराती पत्रकार रमेश ओझा कहते हैं, "मुझे नहीं लगता है कि किसी दूसरे प्रधानमंत्री ने अपने घरेलू राज्य को इतनी अहमियत दी होगी जितनी नरेंद्र मोदी दे रहे हैं. इसमें दो बाते हैं- एक तो उनका अपने राज्य से लगाव है और दूसरी बात यह है कि गुजरात उनके लिए एक कंफोर्ट ज़ोन भी है."
गुजरात का प्रमोशन
जब कोई नेता किसी दूसरे देश का दौरा करते हैं, तो उस देश की राजधानी ही जाते हैं, कुछ मामलों में वे दूसरे शहरों में भी जाते हैं. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के दौर में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का गुजरात दौरा एक नियमित फीचर बनता जा रहा है.
गुजरात काउंसिल ऑफ़ द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ़ की पूर्व चेयरपर्सन भाग्येश सोनेजी बताती हैं, "भारत के प्रधानमंत्री और भारत के गुजराती प्रधानमंत्री के बीच का अंतर नरेंद्र मोदी में स्पष्ट जाहिर होता है."
घनश्याम शाह कहते हैं, "दरअसल मोदी गुजरात को दूसरे राज्यों से आगे देखना चाहते हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे और मोदी उनका कैंपेन संभाल रहे थे. उस समय में भी अपने भाषण में वे आडवाणी को गुजरात का प्रतिनिधि बताते थे क्योंकि आडवाणी गांधीनगर सीट से चुनाव जीतते थे."
शाह बताते हैं, "गुजरात को प्रमोट करने का कोई मौका नरेंद्र मोदी नहीं गंवाते हैं. वे राष्ट्रीय स्तर पर गुजरात को मॉडल के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं."
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